सोमवार, फ़रवरी 24, 2020

मोदी कैबिनेट : आएगा “सुपर कैबिनेट” कांसेप्ट, हफ्ते भर में होगी बड़ी फेरबदल

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हिमांशु पांडेय
हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी सितम्बर महीने के शुरूआती हफ्ते में चीन के दौरे पर जायेंगे। माना जा रहा है कि उनके इस दौरे के दौरान डोकलाम विवाद का हल निकल आएगा। प्रधानमंत्री मोदी के चीन दौरे से पहले उनकी कैबिनेट में भारी फेरबदल संभव है। हाल ही एनडीए में कुछ नए सहयोगी जुड़े हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू ने एनडीए में शामिल होने की औपचारिक घोषणा कर दी है। वहीं तमिलनाडु के सत्ताधारी दल एआईएडीएमके के दोनों धड़ों के विलय होने के बाद इसके भी एनडीए में शामिल होने के रास्ते खुल गए हैं। हालाँकि अभी इसकी औपचारिक घोषणा बाकी है।

कई मंत्रियों के पास है अतिरिक्त प्रभार

वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने और और केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे की असामयिक मौत के बाद उनके मंत्रालयों का अतिरिक्त कार्यभार कैबिनेट के कई मंत्रियों में बाँट दिया गया था। केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी को वेंकैया नायडू के सूचना और प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार मिला था वहीं नरेंद्र सिंह तोमर को वेंकैया नायडू के ही शहरी विकास मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला था। उनके पास अब कुल 5 मंत्रालय हैं। मध्य प्रदेश से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे के निधन के बाद से ही केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन पर्यावरण मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। इन मंत्रियों के अतिरिक्त प्रभार वाले मंत्रालयों को अन्य सांसदों को सौंपकर इनका भार हल्का किया जा सकता है।

मिल सकता है एक पूर्णकालिक रक्षा मंत्री

मोदी सरकार की सबसे बड़ी खामी यह रही है कि वह अपने 3 वर्षों के कार्यकाल के दौरान देश को एक पूर्णकालिक रक्षा मंत्री नहीं दे सकी है। मोदी कैबिनेट की गठन के वक़्त अरुण जेटली ने वित्त मंत्रालय के साथ रक्षा मंत्रालय का कार्यभार भी ग्रहण किया था। पर दोनों मंत्रालयों के लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण कुछ समय बाद उन्हें रक्षा मंत्री के पद से मुक्त कर दिया गया। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को दिल्ली बुलाकर उन्हें रक्षा मंत्री का कार्यभार सौंपा गया और उनकी जगह लक्ष्मीकांत पारसेकर को गोवा का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। लेकिन गोवा विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद पुनः मनोहर पर्रिकर को बतौर मुख्यमंत्री गोवा भेज दिया गया।

मनोहर पर्रिकर
पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर

मनोहर पर्रिकर के रक्षा मंत्री कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धि भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्ट्राइक रही। अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इसने सुर्खियां बटोरी और भारत को सशक्त किया। हालाँकि उनका कार्यकाल बहुत लम्बा नहीं रहा लिहाजा इसके दूरगामी परिणाम नहीं नजर आये पर उनके कार्यकाल में वक़्त सीमापार की गतिविधियों पर अंकुश जरूर लगा था। हालिया डोकलाम विवाद के बाद से देश को एक पूर्णकालिक रक्षा मंत्री की जरुरत महसूस हुई है। खबर है कि भाजपा अपने किसी वरिष्ठ नेता को रक्षा मंत्रालय सौंप सकती है।

हो सकती है “प्रभु” की छुट्टी

पिछले 5 दिनों के दौरान हुए 2 रेल हादसों ने देश को हिलाकर रख दिया है। इन दुर्घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने इस्तीफे की पेशकश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरेश प्रभु को इन्तजार करने को कहा था। पिछले 5 दिनों में देश में 2 भीषण रेल हादसे हो चुके हैं। पहले उत्तर प्रदेश के मुज्जफरनगर में उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने से 24 लोगों की मौत हो गयी थी। इसके बाद कल उत्तर प्रदेश के ही औरैया जिले में कैफियत एक्सप्रेस की ट्रक से टक्कर होने से तक़रीबन 74 लोग घायल हो गए हैं। इन दुर्घटनाओं की वजह से रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है।

सुरेश प्रभु इस्तीफा
रेल मंत्री सुरेश प्रभु

केंद्र सरकार रेल मंत्री सुरेश प्रभु के इस्तीफे को मंजूर कर सकती है पर वह यह नहीं चाहती कि उनके इस्तीफे को रेल हादसों से जोड़कर देखा जाए। सुरेश प्रभु मोदी मंत्रिमण्डल के सबसे लोकप्रिय और प्रभावी मंत्रियों में रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार चाहती है कि सुरेश प्रभु का इस्तीफ़ा स्वीकार ना कर वह मंत्रिमंडल में फेरबदल के वक़्त उनका विभाग बदल दे। रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा शुरू की गई “रेल मंत्री को ट्वीट” पहल काफी लोकप्रिय रही है और आज भी रोजाना हजारों लोग इससे लाभान्वित हो रहे है। हालिया सर्वे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु को मोदी कैबिनेट के सबसे लोकप्रिय मंत्रियों की सूची में अग्रणी स्थान मिला था।

“प्रभु” ने ली थी दुर्घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट कर कहा था, “तीन साल से भी कम वक्त के दौरान मैंने रेल मंत्री रहते हुए खून पसीने से रेलवे की बेहतरी के लिए काम किया है। हाल ही में हुए हादसों से मैं काफी आहत हूँ। पैसेंजरों की जान जाने, उनके घायल होने से मैं दुखी हूँ। इससे मुझे बहुत पीड़ा है। पीएम के “न्यू इंडिया” विजन के तहत पीएम को ऐसे रेलवे की जरूरत है जो सक्षम हो और आधुनिक हो। मैं वादा कर सकता हूँ कि हम उसी राह पर हैं, रेलवे आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में रेलवे ने सभी सेक्टर में दशकों पुराने सिस्टम और सुधारों से पार पाने की कोशिश की है। मैंने पीएम मोदी से मुलाकात भी की। इन हादसों की मैं नैतिक जिम्मेदारी लेता हूँ। पीएम ने मुझे इंतजार करने को कहा है।

“सुपर कैबिनेट” बन सकती है “मोदी कैबिनेट”

कहा जा रहा है कि कार्यप्रणाली में एक-दूसरे के समान मंत्रालयों को जोड़कर “सुपर मिनिस्ट्री” का कांसेप्ट लाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “मोदी कैबिनेट” को “सुपर कैबिनेट” बनाना चाहते है। इस कांसेप्ट के अनुसार परिवहन से जुड़े सभी मंत्रालयों को एक कर “सुपर ट्रांसपोर्ट मंत्रालय” बनाया जा सकता है। इसमें भूतल परिवहन भी शामिल होगा। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के कामकाज से खुश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें “सुपर ट्रांसपोर्ट मंत्रालय” का कार्यभार सौंप सकते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रामीण और शहरी विकास मंत्रालय, मध्यम और भारी उद्योग जैसे मंत्रालयों को भी एक कर “सुपर मिनिस्ट्री” का हिस्सा बनाया जा सकता है।

नरेंद्र मोदी और नितिन गडकरी
गडकरी बनेंगे सुपर ट्रांसपोर्ट मंत्री

 

जुड़ेंगे कुछ नए साथी, पदोन्नति पायेंगे कुछ पुराने मंत्री

बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन की सरकार बनने के बाद जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एनडीए में शामिल होने का प्रस्ताव पास हो गया। इसकी औपचारिक घोषणा भी हो चुकी है। तमिलनाडु में एआईएडीएमके के दोनों धड़ो का विलय होने के बाद इसके भी एनडीए में शामिल होने के रास्ते साफ़ हो गए है, महज औपचारिक घोषणा रह गई है। माना जा रहा है कि जेडीयू के 2 और एआईडीएमके के 4 सांसदों को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। नीतीश कुमार जल्द ही इस सन्दर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करेंगे।

स्मृति ईरानी
स्मृति ईरानी को मिल सकती है पदोन्नति

कैबिनेट के पुराने मंत्रियों में नितिन गडकरी और स्मृति ईरानी का काम सराहनीय रहा है। वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्मृति ईरानी पर भरोसा जताते हुए उन्हें सूचना और प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा था। नितिन गडकरी की पदोन्नति तय मानी जा रही है और स्मृति ईरानी को भी बतौर कपड़ा मंत्री अपने प्रभावी कार्यकाल का लाभ मिल सकता है।

हो सकती है शाह-मौर्य की एंट्री

मोदी की इस “सुपर कैबिनेट” में उनके दाहिने हाथ कहे जाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शामिल हो सकते हैं। केशव प्रसाद मौर्य इलाहाबाद की फूलपुर सीट से लोकसभा सांसद हैं और उन्होंने उत्तर प्रदेश विधान मंडल के किसी भी सदन की सदस्यता नहीं ली है। उनके फूलपुर सीट खाली करने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती के वहाँ से उपचुनावों में खड़े होने की बात सामने आ रही थी। इस सीट पर दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं का बड़ा जनाधार है और ऐसे में भाजपा किसी भी सूरत में मायावती को अपनी जड़ें जमाने देना नहीं चाहेगी। माना जा रहा है कि “सेफ गेम” खेलते हुए भाजपा मौर्य को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी देकर पुनः ओबीसी कार्ड खेल सकती है।

अमित शाह और केशव प्रसाद मौर्य
फिर नजर आ सकती है अजेय जोड़ी

अमित शाह हाल ही में राज्यसभा सांसद बने हैं। अब तस्वीर स्पष्ट हो रही है कि उनकी राज्यसभा सदस्यता का मुख्य उद्देश्य देश को एक पूर्णकालिक ताकतवर रक्षा मंत्री देना था। अमित शाह गुजरात में गृह मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें रक्षा मंत्रालय सौंप सकते हैं। दूसरी स्थिति यह बनती है कि वर्तमान गृह मंत्री राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्रालय सौंपकर अमित शाह को गृह मंत्री बना दिया जाए। मोदी सरकार संकेत दे चुकी है कि रक्षा मंत्री के पद पर वह अपने किसी वरिष्ठ नेता को नियुक्त कर सकती है और मौजूदा समय में इसके लिए इन दोनों से बेहतर कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है।

राज्य की राजनीति से छलांग लगा सकते हैं कई नेता

हाल ही में दिल्ली में सरकार की भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक हुई है। अब अगर इसके बाद मन्त्रिमण्डल विस्तार के वक़्त कोई मुख्यमंत्री मोदी की “सुपर कैबिनेट” में नजर आ जाये तो इस बात पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए। भाजपा 2019 को ध्यान में रखकर हर कदम फूँक-फूँक कर रख रही है वह कैबिनेट में हर राज्य की भागेदारी चाहती है। इसके लिए वह राज्यों की राजनीति से कुछ बड़े चेहरों को उठा सकती है। अनुमानतः कुल 12 मंत्री पद नए लोगों को दिए जा सकते हैं और इनमें से 2 मंत्री बिहार को मिलने तय है। एआईएडीएमके को भी 4 मंत्री पद मिलने की उम्मीद है और यह भाजपा के दक्षिणी प्रभुत्व को मजबूत करेगी। माना जा रहा कि उत्तर मध्य और पूर्वोत्तर के राज्यों से कुछ प्रतिनिधि कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं।

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