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मुझे मैरी कॉम से प्रेरणा मिलती है : सुनील छेत्री

सुनील छेत्री

नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)| अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर साल के सर्वश्रेष्ठ फुटबाल खिलाड़ी चुने गए भारतीय फुटबाल टीम के कप्तान सुनील छेत्री ने कहा है कि उन्हें देश की दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम से काफी प्रेरणा मिलती है। अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) ने मंगलवार को ही साल 2018-19 के लिए अपने वार्षिक पुरस्कारों का ऐलान किया जिसमें छेत्री को साल का सर्वश्रेष्ठ पुरुष फुटबाल खिलाड़ी चुना गया है। छेत्री ने छठी बार यह खिताब अपने नाम किया है।

छेत्री ने कहा, “यह पुरस्कार मुझे और ज्यादा अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है और यह मुझे अपनी जिम्मेदारियों का अहसास दिलाती है। ईमानदारी से कहूं तो मैंने इसके बारे में कभी नहीं सोचा था। मैं केवल इस बात से खुश रहता हूं कि मैं देश के लिए खेल रहा हूं और इसलिए मैं कड़ी ट्रेनिंग करता हूं और इसका आनंद लेता हूं। मैंने 100 से अधिक मैच खेलने, इतने सारे गोल करने और छठी बार एआईएफएफ का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने जाने के बारे में कभी नहीं सोचा था।”

छेत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि इस समय मेरे जीवन में ज्ञान और अनुशासन का काफी जोरों पर है। मैं इस समय सही से आराम कर रहा हूं, सही से खाना खा रहा हूं और सही से अपनी ट्रेनिंग कर रहा हूं।”

छेत्री ने इससे पहले 2007, 2011, 2013, 2014 और 2017 में भी यह अवार्ड जीता था। अब तक 70 अंतर्राष्ट्रीय गोल कर चुके स्टार फुटबालर मैरी कॉम के बहुत बड़े फैन हैं, जिनसे उन्हें और अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा, “मुझे उन सब दिग्गजों से अच्छा करने की प्रेरणा मिलती हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में बहुत कुछ हासिल कर चुके हैं। मैरी कॉम भी उनमें से एक हैं। उनके पास एक अविश्वसनीय कहानी है।”

छेत्री ने मैरी कॉम की तारीफ करते हुए कहा, “वह छह बार की विश्व चैंपियन हैं। दो बच्चों की मां होने के बावजूद विश्व चैंपियन होना बहुत बड़ी बात है। इन सबके अलावा उनके पास कुल 14 स्वर्ण पदक है। ऐसे में अगर वह देश को प्रेरित नहीं करेंगी तो कौन करेंगी। मैं उनका बहुत बड़ा फैन हूं।”

यह पूछे जाने पर कि तो आपको किसी फुटबालर से प्रेरणा नहीं मिलती है, कप्तान ने कहा, “इसके लिए मैं दो जैंटलमैन क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी का नाम लेना चाहूंगा। पिछले 10-11 साल से, इन दोनों खिलाड़ियों ने विश्व फुटबाल पर पूरी तरह से अपनी छाप छोड़ी है। अगर ये खिलाड़ी 2-3 मैच में गोल नहीं करते हैं तो लोग यह कहने लगते हैं कि ये खिलाड़ी फॉर्म में नहीं हैं। मैं जब भी तनाव में रहता हूं और खुद को थका हुआ महसूस करता हूं कि मैं इन दोनों की ओर देखता हूं।”

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पंकज सिंह चौहान

पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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