‘मेक इन इंडिया’ – भारत को आर्थिक विश्वशक्ति बनाने में अहम् योजना

मेक इन इंडिया
मेक इन इंडिया की शुरुआत करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्राचीन काल से ही भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है। 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने के बाद भारत की गिनती विश्व के गरीब देशों में होती थी। देशवासियों का मुख्य व्यवसाय कृषि था और 75-80 फीसदी जनसंख्या जीवन-यापन के लिए कृषि पर आश्रित थी। आजादी के दशकों बाद भी देश में औद्योगीकरण की रफ्तार सुस्त थी और भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती थी। 90 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा आर्थिक उदारीकरण आरम्भ करने के बाद से देश की अर्थव्यवस्था ने तरक्की की राह पकड़ी और निजी क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति आई। बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में निवेश करना शुरू किया और देखते ही देखते भारत की गिनती विश्व के सबसे बड़े बाजारों में होने लगी।

मेक इन इंडिया
मेक इन इंडिया लोगो का प्रारूप

भारत की अर्थव्यवस्था सुधर रही थी पर अभी भी देश की जनसंख्या के लिहाज से यह विकास दर काफी धीमी थी। अधिकतर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने उत्पादों के आयातित कलपुर्जों को एकत्रित करने के लिए भारत में प्लांट बना रखे थे जिससे प्रत्यक्ष तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा नहीं होता था और रोजगार सृजन में भी कमी आ रही थी।

अर्थव्यस्था के विकास की रफ्तार बढ़ाने, औद्योगीकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितम्बर, 2014 को मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत की। इसकी शुरुआत से ही मेक इन इंडिया के अनेक लाभ देखे गए हैं। मेक इन इंडिया की शुरुआत होने के बाद निवेश के लिए भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों की पहली पसंद बन गया और वर्ष 2015 में भारत ने अमेरिका और चीन को पछाड़कर 63 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त किया। इसके बाद साल 2016 में पुरे विश्व में आर्थिक मंदी के बावजूद भारत ने करीबन 60 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त किया, जो विश्व के कई बड़े विकसित देशों से कहीं अधिक था।

भारत सरकार द्वारा मेक इन इंडिया कार्यक्रम की घोषणा के बाद से देश के अनेक क्षेत्रों में निर्माण अब भारत में ही होने लगा है। रक्षा, तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटो-मोबाइल समेत सभी क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों नें पिछले करीबन तीन सालों में भारत में बड़ी मात्रा में निवेश किया है। ग्राहकों की संख्या के हिसाब से तो भारत एक बड़ा बाजार पहले भी था, लेकिन अब निर्माण के क्षेत्र में भी भारत अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।

उद्देश्य और रुपरेखा

मेक इन इंडिया अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक सराहनीय पहल है। यह एक स्लोगन नहीं बल्कि वह विचार है जिसपर अमल करने की सोचते हुए देश की पिछली सरकारों ने कई साल गँवा दिए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और उनका कौशल विकसित करना है। इस पहल की शुरुआत के वक्त उच्च गुणवत्ता मानकों और निम्नतम पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को ध्यान में रखा गया है। मेक इन इंडिया पहल के तहत देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले 25 क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया गया है। अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले इन 25 क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने की कवायद जारी है और इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए अग्रलिखित 25 क्षेत्रों में विकास पर जोर दिया जा रहा है:

– ऑटोमोबाइल्स
– ऑटोमोबाइल कलपुर्जे
– उड्डयन
– जैव प्रौद्योगिकी
– रसायन
– निर्माण
– रक्षा उत्पाद निर्माण
– इलेक्ट्रिकल मशीनरी
– इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम
– खाद्य प्रसंस्करण
– सूचना प्रौद्योगिकी एवं व्यापार प्रक्रिया प्रबंधन
– चमड़ा
– मीडिया और मनोरंजन
– खनन
– तेल और गैस
– फार्मासिटिकल्स
– बंदरगाह और जहाजरानी
– रेलवे
– अक्षय ऊर्जा
– सड़क और राजमार्ग
– अंतरिक्ष और खगोल
– कपड़ा और वस्त्र
– तापीय ऊर्जा
– पर्यटन और अतिथ्य सत्कार
– स्वास्थ्य

मेक इन इंडिया
मेक इन इंडिया

प्रतिक्रिया

25 सितम्बर, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी। शुरुआत के बाद से ही यह पहल विश्वभर में चर्चा बटोरने लगी। भारत मजबूती से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और विश्वपटल पर तेजी से उभरता हुआ बाजार है। आज भारत की गिनती एशिया के अग्रणी देशों में होती है और आने वाले समय में वह विश्व की महाशक्ति बनकर उभरेगा। मोदी सरकार की इस पहल को विश्वभर से सकारात्मक प्रतिक्रिया और समर्थन मिला जिसकी बदौलत भारत ने वर्ष 2015 में अमेरिका और चीन सरीखे देशों को पछाड़ते हुए 63 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त किया। वर्ष 2013 की तुलना में वर्ष 2014 के अक्टूबर महीने में भारत में 13 फीसदी अधिक जापानी कंपनियां रजिस्टर्ड हुई थी। नवंबर 2014 में भारत में फैक्ट्री विकास दर की रफ्तार अधिकतम रही थी।

मेक इन इंडिया
मेक इन इंडिया ने दी भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार

भारत का पुराना सहयोगी रहा जापान अब भारत के प्रमुख सहयोगी देशों की सूची में अग्रणी स्थान पर काबिज हो चुका है। बुलेट ट्रेन परियोजना के अलावा कई जापानी कंपनियों ने भारत में निवेश करने में रूचि दिखाई और मेक इन इंडिया की सफलता में अपनी भागीदारी दी। मेक इन इंडिया की लॉन्चिंग के बाद अगले ही महीने में भारत में रजिस्टर्ड होने वाली जापानी कंपनियों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। जापान तकनीकी रूप से दक्ष देश है उसकी गिनती विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में होती है। मेक इन इंडिया में जापानी निवेश निश्चित रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ तकनीकी को सुधारने में भी कारगर होगा।

मेक इन इंडिया
मेक इन इंडिया में जापान ने दिखाया भरोसा

निर्माण क्षेत्र पर जोर

मेक इन इंडिया के माध्यम से मोदी सरकार ने निर्माण क्षेत्र के विकास पर जोर दिया है। ऑटोमोबाइल, ऑटोमोबाइल कलपुर्जे, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे क्षेत्रों के मोदी सरकार ने रक्षा उत्पाद और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी थी। रक्षा उत्पाद के क्षेत्र में 49 फीसदी वहीं रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लागू करने का प्रस्ताव मोदी कैबिनेट ने पास किया था।

यहाँ दी गयी विडिओ में बताया गया है कि किस तरह मेक इन इंडिया विदेशी कंपनियों को आकृषित कर रहा है।

[youtube https://www.youtube.com/watch?v=6DqXQRDqBWE]

मोदी सरकार का मुख्य उद्देश्य मेक इन इंडिया अभियान के तहत भारत को विश्व में निर्माण क्षेत्र का केंद्र बनाना है। इसके साथ-साथ देश के भीतर ही उन्नत प्रौद्योगिकी और तकनीकी से निर्माण क्षेत्र में विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। आज भी भारत में निर्माण क्षेत्र में अधिकतर काम मानव शक्ति से होते हैं। मोदी सरकार मानव शक्ति को मानव कौशल में बदलना चाहती है जिससे गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उत्पादकता भी बढ़ाई जा सके।

रोजगार सृजन

मेक इन इंडिया के तहत मोदी सरकार के मुख्य उद्देश्यों में से एक है बेरोजगारी दूर करना। मेक इन इंडिया के तहत भारत में शुरू होने वालों उद्योगों के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की जरुरत होगी और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कौशल विकास मंत्रालय की स्थापना की थी। युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए मोदी सरकार के कौशल विकास मंत्रालय द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिसके तहत युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में जो विदेशी कंपनियां निवेश कर रही हैं उनमें से अधिकतर कंपनियां मानव शक्ति की जगह मानव कौशल पर केंद्रित कार्यशैली पर काम करती है। मेक इन इंडिया के मूर्त रूप लेने के बाद निश्चित रूप से देश के युवाओं को लाभ होगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।

नीचे दी गयी विडियो में मेक इन इंडिया के दौरान हो रहे रोजगार सृजन का एक छोटा सा पहलु दिखाया गया है।

https://youtu.be/jt2BLvXU9TI

 

मजबूत होगी भारतीय अर्थव्यवस्था

मेक इन इंडिया के पूर्णयतया मूर्त रूप लेने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। युवाओं को देश में रोजगार मिलेगा और विदेशी आयात में कमी आएगी। इससे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत होगी और सरकारी कोष को मजबूती मिलेगी। रक्षा उत्पादों के देश में बनने के बाद रक्षा सौदों की लागत घटेगी और बिचौलियों से बचा जा सकेगा। कंपनियों से मिलने वाले करों से राज्य सरकार की आय बढ़ेगी और देश के हर भाग में रोजगार की उपलब्धता बढ़ेगी। भारतीय कंपनियों के उत्पादों की सीधी टक्कर अब विदेशी कंपनियों के उत्पादों से होगा और देश की जनता को इस प्रतिद्वंदिता का लाभ मिलेगा। रोजमर्रा के जरुरत की चीजों के दाम घटेंगे और गुणवत्ता बेहतर होगी। मेक इन इंडिया अगर अपने प्रस्तावित स्वरुप में जमीनी हकीकत में उतर पाता है तो यह भारत के लिए युग परिवर्तक पहल होगी और विश्व में भारत का दबदबा बढ़ेगा।

मेक इन इंडिया के लाभ
मजबूत होती भारतीय अर्थव्यवस्था

आसान नहीं है डगर

मेक इन इंडिया को मूर्त रूप देना आसान नहीं है। भारत ऐसा देश है है जहाँ बिना राजनीति के कुछ भी संभव नहीं है। अभी तक देश हित में जो भी काम हुए हैं वो देश के राजनीतिक दलों ने अपने फायदे के लिए किए हैं। भारत की राजनीति में स्वार्थीपन की पारदर्शिता है और राष्ट्रनीतियां अपारदर्शी है। आँखों के सामने कुछ और नजर आता है पर परदे के पीछे की हकीकत कुछ और ही बयान करती है। सड़कों के निर्माण से लेकर बांध के निर्माण तक, देश में हर मसले पर राजनीति का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। भूमि अधिग्रहण का विरोध और राज्य सरकारों की उदासीनता पुराने समय से ही देश के विकास की राह में बाधा रही हैं। ऐसे में मेक इन इंडिया जैसी युग परिवर्तक पहल अगर बिना वाद-विवाद के तय समय में मूर्त रूप ले सके तो इसे अजूबा ही माना जाएगा।

अब तक तरक्की?

इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार मेक इन इंडिया योजना में अभी तक कोई भी प्रगति बड़े स्तर पर देखनें को नहीं मिली है। जिस प्रकार से इस योजना की चर्चा हुई थी, उस स्तर पर यह लागु नहीं हो पायी है।

मेक इन इंडिया के लांच होनें के 4 साल बाद भी देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार की गति काफी धीमी है। लाखों लोग बेरोजगार होकर घूम रहे हैं।

इसके अलावा जिन लोगों नें छोटे कार्य शुरू किये थे, उन्हें सरकार की योजना नोटबंदी और जीएसटी से काफी धक्का लगा है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या आने वाले समय में मेक इन इंडिया के लाभ बड़े स्तर पर देखनें को मिलेंगे या नहीं?