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मालदीव में सोलिह की जीत भारत के लिए कितनी मददगार?

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मालदीव में चुनाव संपन्न होने के बाद माले भारत के सुरक्षा मुद्दों पर गौर फरमाने की जुगत में दिख रहा है लेकिन चीन का मालदीव पर दबाव अधिक है। पूर्व विदेश मंत्री दुन्या गयूम ने कहा कि माले को चीन और भारत के बीच संतुलन बनाकर चल रहा था।

उन्होंने कहा भारत हमारा नजदीकी मित्र रहा है और माले इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा। दुन्या गयूम ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश को मालदीव जैसे छोटे देशों का मान करना चाहिए। मालदीव जानता है की चीन के माले के निकट होने की वजह से भारत के सुरक्षा हितो को झटका लगा है। मालदीव भी इस मुद्दे पर संवेदनशील है।

उन्होंने कहा चीन से हमारे सम्बन्ध सुरक्षा के लिहाज़ से जरुरी है। मालदीव के समक्ष जब कर्ज को चुकता करने का जरिया होगा तो माले पीछे नहीं हटेगा।

लेकिन मालदीव को बुनियादी ढांचे और विकास के लिए बाहरी आर्थिक और विशेषज्ञता की जरुरत है। विश्व को लेकर हमारे निर्णय राष्ट्र हित के साथ ही होंगे। पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम छह वर्ष से अधिक समय से कैद में है।

विपक्षी पार्टियों का साथ आकर गठबंधन बनाना और एक उमीदवार को चुनना एक चुनौती थी लेकिन इससे बड़ी चुनौती सभी को निजी हितों को दरकिनार कर एक साथ रहना है। पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि यह वो समय है जब सभी दल एक विरोधी के खिलाफ खड़े हुए है।

सभी विपक्षी पार्टी मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी, जम्हूरी, अढ़ालाथ और प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव का एक गुट का एक साथ खड़े होना लाजवाब था। इन सभी सियासी दलों ने अपने निजी विवादों को किनारे रख राष्ट्र के बेहतर भविष्य के लिए कार्य किया है या यूँ कहे की गठबंधन ने अपना असर दिखा दिया।

उन्होंने कहा कि मालदीव कि जनता न्याय न मिलने कि दिक्कतों को झेल रही थी। उन्होंने कहा कि यामीन एक शानदार नेता थे जिसने राष्ट्र हित के लिए आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम निर्णायक फैसले लिए। लेकिन जनता की आज़ादी सिमटने लगी।

प्रजा को अपनी आज़ादी वापस चाहिए थी इसलिए पासा विपक्षी खेमे में जा गिरा। इब्राहिम सोलिह के बाबत उन्होंने बताय कि वह एमडीपी से है जिनके राजनीतिक गुरु निर्वासित मोहम्मद नशीद है इब्राहिम सोलिह मिलनसार और शांत स्वभाव के व्यक्ति है। साथ ही वह अब्दुल गयूम कि तरह अनुभव के धनी हैं।

साल 2017 में 38 माह के लिए जेल गए क़ासिम इब्राहिम के योगदान को कम नहीं आंकना चाहिए वह दयालु इंसान है।  क़ासिम इब्राहिम का साथ मिलने वाले की चुनाव में जीत पक्की होती है। एमडीपी को विशवास है कि कासिम का साथ उन्हें ही मिलेगा।

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