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    कुम्भ मेला

    आज महाशिवरात्रि के पर्व पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा हुआ है क्योंकि महाकुम्भ के दौरान किये जाने वाले पवित्र स्नान की आखिरी तिथि है। कुम्भ मेला जोकि विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार होता है, उसका आज आखिरी दिन है।

    शिवरात्रि है महाकुम्भ के लिए महत्वपूर्ण :

    kumbh mela 2019

    शिवरात्रि का पर्व जोकि एक हिन्दू पर्व है, कुम्भ मेले के लिए भी यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह हर 12 सालों में आयोजित किये जाने वाले सबसे बड़े धार्मिक सोहार्द कुम्भ मेले का अंत करता है। अतः हर कुम्भ मेले के आखिरी दिन शिवरात्रि होती है। इस साल भी यह मेला आज 4 मार्च को ख़त्म होगा। इस वर्ष लगभग 22 करोड़ श्रद्धालुओं के इस पवित्र संगम में दुबकी लगाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    महाशिवरात्रि के बारे में जानकारी :

    kumbh mela 2019

    महाशिवरात्रि का पर्व जोकि आज मनाया जा रहा है, 12 महीनों में यह एक बार आता है। हिंदुओं के धार्मिक पुरानों में लिखा हुआ है की महाशिवरात्रि के दौरान भगवान् शिव ने समुंद्र मंथन से पैदा हुए विष को पी लिया था और तबसे ही इस दिन को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। पेश की गयी रिपोर्ट्स के अनुसार आज के पावन दिन में लगभग 1 करोड़ श्रद्धालु इस संगम में डुबकी लगायंगे।

    कुम्भ मेले के बारे में जानकारी :

    kumbh mela 2019

    कुम्भ मेला हिन्दू की पौराणिक कथाओं पर आधारित है। यह पूरी दुनिया में सबसे बड़ी सार्वजनिक सभा और सामूहिक कार्य है। अर्द्ध कुंभ हर छह साल में आयोजित किया जाता है, जबकि कुंभ मेला 12 साल बाद आता है। इसका आयोजन गंगा के तट पर होता है। गंगा नदी को सबसे पवित्र माना जाता है एवं यह भी माना जाता है की यदि कुम्भ के समय गंगा में स्नान किया जाए तो स्नान करने वाले के सारे पाप धुल जाते हैं। अतः हर साल करोड़ों की संख्या में लोग यहाँ पधारते हैं।

    यह प्रयागराज में होता है जिसे पहले अलाहाबाद के नाम से जाना जाता था लेकिन योगी सरकार ने इसका नाम अब प्रयागराज रख दिया है। इस साल योगी सरकार ने अर्ध कुम्भ का नाम बदलकर कुम्भ कर दिया है कुम्भ को बदलकर महाकुम्भ कर दिया है।

    By विकास सिंह

    विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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