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    आज़ादी के महानायक महात्मा गाँधी

    भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150 वीं सालगिरह के मौके पर तीन इलाको और जोहेन्सबर्ग के आस-पास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण किया गया था। इस प्रोजेक्ट की अध्यक्षता शहर के भारतीय राजनयिक डॉक्टर केजे श्रीनिवास ने की थी जिन्हों सबसे पहले रविवार को दफ्तर के बाहर 10 वृक्षों को रोपित किया था।

    विश्व में सर्वधिक वृक्षों की संख्या के कारण जोहेन्सबर्ग प्रख्यात है। इसके बाद राजनयिक भारतीय शहर लेनसिया की तरफ निकल पड़े थे ताकि गाँधी समिति में शामिल होकर गाँधी हॉल के समक्ष 20 वृक्षो को रोपित कर सके। इस क्षेत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक समारोह के लिए यह स्थल काफी मशहूर है।

    इससे पूर्व रंगभेद के युग ने सरकार ने सिटी सेंटर में स्थित असल गाँधी हॉल को तोड़ दिया था और इसके बाद लेसनिया का निर्माण हुआ था। गाँधी हॉल में अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के लिए महात्मा गाँधी कई समुदायों के साथ बैठके करते थे।

    इसका आखिरी छोर टॉलस्टॉय फार्म है जो लेनसिया से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी शुरुआत गाँधी ने जोहेन्सबर्ग में अपने कार्यकाल की शुरुआत के दौरान की थी और इसके बाद वह भारत की आज़ादी के लिए वापस लौट आये थे।

    श्रीनिवास ने कहा कि “यह प्रोजेक्ट भारत सरकार की योजना का भाग है जिसके तहत वैश्विक स्तर पर हर भारतीय मिशन को महात्मा गाँधी की 150 वीं वर्षगाँठ तक शहरो में 200 वृक्षों को रोपित करना है।” भारतीय उच्चायोग के साथ योजना जारी है और स्थानीय समुदाय को इस क्षेत्र को पर्यटन को आकर्षित करने वाले में तब्दील कर देना चाहिए।”

    उन्होंने कहा कि “हम लेनसिया के स्कूलों में और वृक्षों को लगाएंगे ताकि 200 पेड़ो के आकंड़े को पार कर सके। दूतावास और गाँधी वाक कमिटी के बीच संयुक्त प्रोजेक्ट में स्कूल भी शामिल होंगे। 14 जुलाई को इस क्षेत्र में व्यापक साईकल यात्रा की जाएगी।”

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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