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मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध से चीन परेशान, सीपीईसी पर जैश कर सकता है हमला

चीन की महत्वकांक्षी परियोजना

चीन को आगामी दो सप्ताह में आतंकी मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की आतंकी सूची में शामिल करने पर निर्णय लेना है। हालाँकि बीजिंग को भय है कि इस निर्णय से उनकी महत्वकांक्षी परिजयोजना के अहम भाग सीपीईसी को जैश ए मोहम्मद अपना निशाना बना सकता है।

चीन का पक्ष अहम

इकनोमिक टाइम्स के मुताबिक चीन मसूद अज़हर के खिलाफ यूएन में लाये गए प्रस्ताव को समर्थन करने पर विचार कर रही है। साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान की तरफ भी रुख कर रही है। सीपीईसी परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आलावा गिलगिट-बाल्टिस्तान और साथ ही खैबर पख्तूनवा के मंशेरा जिले से भी होकर गुजरती है। इसी इलाके में बालाकोट भी स्थित है, जहां अधिकतर आतंकी शिविर मौजूद है।

चीन के उप विदेश मंत्री ने कोंग सुआनयोउ ने 5-6 मार्च को पाकिस्तान की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान से सीपीईसी की गारंटी पर भी चर्चा की थी। आगामी माह की शुरुआत में बीआरआई सम्मलेन का आयोजन किया जायेगा। सीपीईसी से सम्बंधित परियोजनाओं पर 10000 से अधिक चीनी नागरिक कार्य कर रहे हैं।

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में जैश मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित के लिए प्रस्ताव प्रस्तावित किया। वैश्विक आतंकी की फेरहिस्त में आने से मसूद अज़हर पर यात्रा प्रतिबंद लग जायेगा, उसकी संपत्ति फ्रीज और हथियारों को आधिकारिक तौर पर बैन कर दिया जायेगा। हालाँकि इस पर चीन के रुख से भारत बेहद परेशान है।

चीन का अड़ंगा

चीन ने तीन बार मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी की सूची में शामिल करने पर अड़ंगा लगाया है। भारत के मुताबिक यूएन में मसूद अज़हर को बचाने वाला मात्र चीन ही है। मसूद अज़हर को 13 मार्च को यूएन वैश्विक आतंकी की सूची में शामिल कर देगा यदि कोई सदस्य इस पर आपत्ति दर्ज नहीं करेगा।

चीन पाकिस्तान को अपना सदाबहार दोस्त मानता है। इस गलियारे से चीन अरब सागर तक पंहुच जायेगा। चीन ने बीते सप्ताह पाकिस्तान में सामाजिक-आर्थिक विकास विशेषज्ञों की टीम भेजी थी, ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा, जल, वोकेशनल ट्रेनिंग, कृषि आदि जैसे क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं तलाशी जा सके।

इस्लामिक दुनिया तक पंहुचने के लिए चीन पाकिस्तान को एक दरवाजे के तौर पर भी देखता है। चीन उइगर मुस्लिमों के ईस्ट तुर्किस्तान इंडिपेंडेंस मूवमेंट से खासा परेशान है। यह पाकिस्तान में स्थित लश्कर ए तैयबा के आतंकी समूह से जुड़ा हुआ है। बलोचिस्तान और सिंध ने चीनी कर्मचारियों और सैनिकों के खिलाफ आतंकी हमलों में काफी इजाफा हुआ है।

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कविता

कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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