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    पश्चिम बंगाल की सियासत दिन ब दिन दिलचस्प होती जा रही है। कुछ ही समय बाद पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं, और यहां आए दिन नई नई बयानबाजी और नए नए राजनीतिक दांव पेंच देखने को मिल रहे हैं। ममता बनर्जी जो कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले 2 विधानसभा चुनावों से राज कर रही हैं, वे अपनी जीत इस बार भी सुनिश्चित करके जीत की हैट्रिक लगाना चाहती हैं, लेकिन वहीं बीजेपी भी पूरी फॉर्म में है और उनसे उनका गढ़ छीनना चाहती है।

    ममता की लड़ाई यहां सिर्फ बीजेपी से नहीं है। यहां औवेसी की पार्टी AIMIM ने भी बंगाल में खाता खोलने का मन बना लिया है। लेकिन यहां चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने औवेसी की पार्टी से विधायक छीन लिया है। AIMIM के बंगाल चीफ ने तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। इस तरह ममता बनर्जी ने मुस्लिम वोटों को साधने का भी जुगाड़ कर लिया है। इस से ओवैसी की पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है।

    AIMIM के कार्यवाहक अध्यक्ष एस के अब्दुल कलाम ने तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ले ली है और ओवैसी की पार्टी का साथ छोड़ दिया है। इसके साथ ही पार्टी के कई और सदस्य भी टीएमसी में शामिल हो गये हैं। AIMIM को छोड़ने का कारण उन्होंने ममता के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल में शांति का माहौल रहने और सुशासन होना बताया है। लेकिन वहीं इससे ममता बनर्जी के पार्टी के लोग नाराज नजर आ रहे हैं।

    तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस तरह AIMIM के नेताओं को चुनाव के ऐन वक्त पर पार्टी में शामिल नहीं होना चाहिए था। इससे राजनीति में एक नकारात्मक छवि का निर्माण होगा। ओवैसी की पार्टी ने हाल ही में बिहार में अपना खाता खोला है और 5 सीटों पर जीत दर्ज कराई है। जिसके बाद से औवेसी का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है और वे दूसरे राज्यों में अपना दांव आजमा रहे हैं। लेकिन ममता के गढ़ में सेंध लगाना उनके लिए टेढ़ी खीर हो सकता है।

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