दा इंडियन वायर » समाचार » भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 साल: क्या हैं आयाम?
विदेश समाचार

भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 साल: क्या हैं आयाम?

1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों का पारा चढ़ता और उतरता रहा है। 15 अगस्त, 1975 में बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की हत्या तक यह संबंध सौहार्दपूर्ण रहा। इसके बाद एक सैन्य शासन का उदय हुआ जिसमे जनरल जियाउर रहमान राष्ट्रपति बने और उनकी भी हत्या कर दी गई। 1982-1991 के बीच फिर से द्विपक्षीय रिश्ते सुधरे जब जनरल एच एम इरशाद द्वारा सेना के नेतृत्व वाली सरकार ने देश पर शासन किया।

पिछले दशक में बेहतर हुए सम्बन्ध

जब 1991 में बांग्लादेश की संसदीय लोकतंत्र में वापसी हुई है, तब यह संबंध और कई उतार और चढ़ाव से गुजरे हैं। हालाँकि, पिछले दशक से, भारत-बांग्लादेश संबंध सहयोग के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं और व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्रों में अधिक आत्मसात होने के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों से आगे बढ़ रहे हैं।

सीमा पर बढ़ता सहयोग

बांग्लादेश और भारत ने 2015 में ऐतिहासिक भूमि सीमा समझौते की पुष्टि करके अपनी सीमा के मुद्दों को शांति से हल करने का वास्तविक उपलब्धि हासिल की है, जहां निवासियों को अपने निवास स्थान का चयन करने और भारत या बांग्लादेश के नागरिक बनने की अनुमति दी गई थी।

व्यापार में साझेदार

बांग्लादेश आज दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत ने कई बांग्लादेशी उत्पादों के लिए शुल्क-मुक्त व्यापार की पेशकश की है। यह अधिक संतुलित हो सकता है यदि भारतीय पक्ष से गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाया जा सकता है। दोनों देशों के बीच विकास के मोर्चे पर सहयोग रहा है। भारत ने सड़क, रेलवे, पुल और बंदरगाहों के निर्माण के लिए बांग्लादेश को तीन लाइन ऑफ़ क्रेडिट के माध्यम से आठ बिलियन डॉलर की राशि दी है।

पर्यटन की दृष्टि से भी बांग्लादेश भारत के लिए एक अहम देश है। 2017 में, बांग्लादेशियों ने पश्चिमी यूरोप से आने वाले पर्यटकों को पछाड़ दिया। भारत में आने वाले हर पांच पर्यटकों में से एक बांग्लादेशी था। बांग्लादेश भारत के अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा रोगियों का 35% से अधिक के लिए जिम्मेदार है और चिकित्सा पर्यटन में भारत के राजस्व का 50% से अधिक योगदान देता है।

बढ़ती कनेक्टिविटी

कोलकाता और अगरतला के बीच एक सीधी बस सेवा बांग्लादेश से एक मार्ग के माध्यम से चलती है। दोनों देश के बीच तीन यात्री और मालवाहक रेल सेवाएं चल रही हैं, जिसमें दो नए रुट जोड़े जाएंगे। हाल ही में 1.9 किमी लंबे मैत्री सेतु पुल का उद्घाटन किया गया, जो भारत में सबरूम को बांग्लादेश के रामगढ़ से जोड़ता है।

बांग्लादेश अपने मोंगला और चटगांव बंदरगाह से माल की ढुलाई की अनुमति देता है जो सड़क, रेल और जलमार्ग द्वारा अगरतला (त्रिपुरा), दाऊकी (मेघालय), सुतारकंडी (असम) और श्रीमंतपुर (त्रिपुरा) को जोड़ता है।

क्या है चुनातियाँ

तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है। बॉर्डर पर फायरिंग और मौतों को रोकना अभी बाकी है। संपूर्ण भारत में नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन्स के लागू करने के भारत के प्रस्ताव से दो देशों के संबंधों में थोड़ा तनाव आया है। यह देखना बाकी है कि भारत बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों को कैसे भेजता है। अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी ’के बावजूद भारत इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव को कम करने में कबयाब नहीं रहा है।

प्रधान मंत्री मोदी ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने के लिए बांग्लादेश में एक दौरा किया, राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमानकी जन्म शताब्दी और भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 साल पूरे हुए हैं। उम्मीद है कि इस दौरे से और आगे आने वाले बातचीतों में इन मुद्दों पर भी सहमति बनेगी।

About the author

आदित्य सिंह

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

Add Comment

Click here to post a comment

फेसबुक पर दा इंडियन वायर से जुड़िये!

Want to work with us? Looking to share some feedback or suggestion? Have a business opportunity to discuss?

You can reach out to us at [email protected]