भारत पाकिस्तान संबंधों में मोदी की जीत का क्या होगा असर?

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनावो में जीत के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि “मैं दक्षिण एशिया में शान्ति, प्रगति और समृद्धता के लिए भारतीय समकक्षी के साथ आगे कार्य करने की तरफ देख रहे हैं।” मोदी की भारतीय जनता पार्टी ने 542 में से 303 सीटे जीती है। भारत में सरकार के गठन के लिए 282 संसदीय सीटों की जरुरत है और मोदी इस सरकार का नर्तृत्व करेंगे।

भाजपा को हिन्दू राष्ट्रवाद के समर्थन के लिए जाना जाता है। मोदी के अभियान में राष्ट्रीय सुरक्षा के पर सख्त सन्देश और विवादित कश्मीर में विद्रोह के कथित समर्थन के लिए पाकिस्तान को सजा देने का वादा किया था। इमरान खान के ट्वीट के बाद गुरूवार को नरेंद्र मोदी ने शुक्रिया से जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि “वह क्षेत्र में शान्ति और समृद्धता को हमेशा प्राथमिकता देते हैं।”

दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और दोनों देशों के बीच इस माह की शुरुआत में सैन्य संघर्ष हुआ था। कश्मीर में सीआरपीएफ के काफिले पर फियादीन हमला किया था जिसमे 40 जवानो की मौत हो गयी थी। इस हमले की जिम्मेदारी। पाकिस्तान में स्थित आतंकी समूह जैश ए मोहम्मद ने ली थी।

इसके प्रतिकार ने भारत की वायुसेना ने चरमपंथी शिविरों पर बमबारी की थी और इसमें करीब 300 आतंकियों की मौत का दावा किया गया था। इसके एक दिन बाद पाकिस्तान ने भारत प्रशासित कश्मीर में हमला किया था। इसमें एक भारतीय वायुसेना का पायलट पाकिस्तान की हिरासत में था जिसने दो दिन बाद ही भारत के सुपुर्द कर दिया गया था।

भाजपा सरकार का हवाई हमला और पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रवैया था। चुनावो से पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खान ने सुझाव दिया था कि यदि दक्षिणपंथी सरकार सत्ता पर वापसी करती है तो शान्ति वार्ता करना आसान हो जायेगा।

विश्लेषक सहीद हुसैन के मुताबिक “मोदी का चुनावी अभियान दो चीजों पर निर्भर था, एक राष्ट्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रवैया। मुझे नहीं लगता कि हालात एक लम्बे समय तक परिवर्तित होंगे। अब शायद वह मांग कर दे कि पाकिस्तान बातचीत के लिए घुटनो पर आये।”

खान सरकार पाकिस्तान में बदतर आर्थिक हालातो से जूझ रहे हैं। केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में 12.25 फीसदी की वृद्धि की है ताकि देश में महंगाई को रोक सके और मौजूदा घाटे को पाट सके।

हुसैन ने कहा कि “पाकिस्तान आगे बढ़ने के लिए बेहद उत्साहित दिखता है और यह उसकी आर्थिक हालत और बाहरी दबाव के कारण है।” बुधवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संघाई सहयोग संगठन के आयोजन के इतर भारतीय समकक्षी सुषमा स्वराज से मुलाकात की थी।

कुरैशी ने कहा कि “मैंने स्पष्ट कर दिया है कि हम सभी मतभेदों को सुलझाना चाहते हैं।” भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात के बाबत कोई बयान जारी नहीं किया है।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here