सोमवार, अप्रैल 6, 2020

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत और ईरान नें व्यापार समझौते को लेकर की चर्चा

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

अमेरिका ने 5 नवम्बर से ईरान पर दूसरे दौर के प्रतिबन्ध लगा दिए थे। हालांकि इन प्रतिबंधों के मध्य अमेरिका ने भारत सहित सात देशों को कुछ शर्तों पर ईरान से तेल खरीदने पर छूट दी थी। मीडिया ख़बरों के मुताबिक ईरान में नियुक्त भारतीय राजदूत और ईरान के वित्त व कृषि विभाग के प्रमुख अमेरिकी प्रतिबंधों के मध्य दोनों राष्ट्रों के बीच व्यापार को बढ़ाने को लेकर चर्चा कर रहे थे।

भारत के कूटनीतिज्ञ सौरभ कुमार और ईरानी अधिकारी मसूद खंसारी ने अमेरिकी प्रतिबंधों के दौर में व्यापार जारी रखने की रणनीति की समीक्षा की थी। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मई में ईरान के साथ हुई परमाणु संधि को तोड़ दिया था और ईरान पर वापस सभी प्रतिबन्ध थोप दिए थे। इन प्रतिबंधों से ईरान की बैंकिंग प्रणाली और तेल क्षेत्र की कमर टूट गयी है।

मसूद खंसारी ने कहा कि अमेरिका के प्रतिबन्ध भारत और ईरान के मज़बूत रिश्तों की शुरुआत के लिए सुनहरा अवसर है। साथ ही उन्होंने ईरान के चाहबार बंदरगाह के विकास से भारत के हितों के बाबत बताया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस बंदरगाह से अब प्रतिबन्ध हटा लिये हैं और अब भारत और ईरान को इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए।

मसूद खंसारी ने कहा कि प्रतिबंधों से काफी दिक्कते उत्पन्न हुई है लेकिन साथ ही कई अवसरों के द्वार भी खुले हैं। उन्होंने कहा कि तेहरान आयात और निर्यात के लिए भारत सहित क्षेत्रीय साझेदारों पर अध्य्यन कर रहा है। भारत के प्रतिनिधि सौरभ कुमार ने ईरान में निर्यात की जाने वाली 1000 भारतीय उत्पादों की सूची दिखाई थी।

सौरभ कुमार ने कहा कि पारदर्शी और साफ़ व्यापार राष्ट्रीय मुद्रा में जारी रह सकता है, भारत से आयात किये गए उत्पादों की कीमत ईरान रूपए में अदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अगले छह माह तक ईरान से तीन लाख बैरल तेल का आयात कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत को तेल निर्यात करने के बदले ईरान प्रतिबंधों से मुक्त उत्पाद मसलन खाद्य सामग्री, दवाइयां और मानवीय सुविधा की वस्तुएं खरीद सकता है। ईरान को तेल की बकाया कीमत यूरो और विदेशी मुद्रा में अदा की जाएगी।

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