विश्व बैंक ने साल 2021 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान जारी किया है। विश्व बैंक ने कहा है कि साल 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.3 फीसद की विकास दर रहने का अनुमान है। इससे पहले विश्व बैंक ने कहा था कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था 10.1 फीसद की दर से ग्रोथ करेगी। वाशिंगटन स्थित वर्ल्ड बैंक की ओर से मंगलवार को जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर से सेवाओं समेत दूसरी चीजों पर प्रभाव पड़ा है।

विश्व बैंक ने कहा कि भारत में काफी अधिक कोरोना वायरस संक्रमण के मामले दर्ज हुए, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में विश्व बैंक ने कहा कि साल 2021 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के 5.6 फीसद की दर से ग्रोथ करने का अनुमान है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था में 2019 में चार प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई थी हालांकि, साल 2023 में, भारत की अर्थव्यवस्था में 6.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो सकती है। कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के चलते घरेलू खपत और निवेश प्रभावित होने के कारण क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान को 11 फीसदी से घटाकर 9.5 फीसदी कर दिया था। क्रिसिल के अर्थशास्त्रियों ने अपने पूर्वानुमानों में कटौती करते हुए कहा कि वृद्धि के दो वाहकों- निजी खपत और निवेश, पर दूसरी लहर का प्रकोप एकदम स्पष्ट है, जिसके चलते ये संशोधन किए गए हैं।

रेटिंग एजेंसी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि संक्रमण के दैनिक मामलों में ऊपरी स्तर से गिरावट आई है, लेकिन राज्यों को प्रतिबंध हटाते समय सावधान रहना चाहिए, क्योंकि एक और लहर आने की आशंका बनी हुई है। धीमी गति से हो रहे टीकाकरण के चलते यह आशंका और भी बढ़ गई है। क्रिसिल ने कहा कि कोविड-19 से संबंधित प्रतिबंध कुछ हद तक जारी रहेंगे और कम से कम अगस्त तक किसी न किसी रूप में गतिशीलता प्रभावित होगी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में इसमें 5.6 प्रतिशत वृद्धि होगी। अगर ऐसा होता तो है कि यह 80 साल में मंदी के बाद मजबूत वृद्धि होगी। इसका मुख्य कारण कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मजबूत पुनरूद्धार है। हालांकि पुनरूद्धार के बावजूद वैश्विक उत्पादन महामारी पूर्व अनुमान के मुकाबले इस साल 2 प्रतिशत कम रहेगा। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका में इस साल 6.8 प्रतिशत वृद्धि रहने का अनुमान जताया गया है। इसका कारण बड़े स्तर पर राजकोषीय मदद तथा महामारी से जुड़ी पाबंदियों में ढील है।

अन्य विकसित देशों में वृद्धि मजबूत होगी लेकिन उसकी गति कम होगी। रिपोर्ट के अनुसार उभरते और विकासशील देशों में चीन की वृद्धि दर 2021 में 8.5 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसकी वजह दबी हुई मांग में तेजी आना है। विश्वबैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मालपास ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर पुनरूद्धार के संकेत हैं लेकिन महामारी के कारण विकासशील देशों में गरीबी और असमानता बढ़ी है।’’


दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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