भारत पाकिस्तान संबंधों पर चिंता दोनों तरफ है: पूर्व पाकिस्तानी विदेश सचिव

भारत और पाकिस्तान

पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव रिआज़ खोकर ने कहा कि “पाकिस्तान ने भारत को प्रत्यक्ष या अपने मित्रो के माध्यम से सूचित कर चुका है कि तनाव की सीढ़ी पर चढ़ना खतरनाक हो सकता है।” फरवरी में तनाव के कारण भारत पाकिस्तान सम्बन्ध बिगड़ गए थे दोनों देश जंग के काफी नजदीक थे। खोकर भारत, अमेरिका और चीन में बतौर पाकिस्तानी राजदूत नियुक्त थे और इस्लामाबाद में विदेश नीति से जुड़े है।

उन्होंने कहा कि “दो दक्षिण एशिया के देशों के समक्ष बैठकर बातचीत से अपने मतभेदों को सुलझाने और तनाव को कम करने के आलावा कोई अन्य विकल्प मौजूद नहीं है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद दोनों देश मिसाइल दागने के काफी करीब आ गया थे। इस आतंकी हमले में भारत के सीआरपीएफ के 40 जवानो की मौत हुई थी जिसकी जिम्मेदार जैश ए मोहम्मद ने ली थी।

अस्ताना इकोनॉमिक मंच के इतर एक इंटरव्यू ने उन्होंने कहा कि “हमारी जानकारी थी कि भारत पाकिस्तान के दो या तीन शहरी पर मिसाइल हमले की तैयारी कर रहा है और हमारी सिर्फ प्रतिक्रिया न सिर्फ भारत को प्रत्यक्ष तरीके से सूचित करना है बल्कि अपने मित्रो के जरिये भी सूचित करना है कि हम तनाव की सीढ़ियों पर चढ़ रहे हैं और हमें किसी भी हालत में इसे टालना होगा।”

खोकर ने भारत-पाकिस्तान के बीच कम करने में किसी अन्य देश के बारे में नहीं बताया। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, सऊदी अरब और यूएई ने तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। खोकर ने कहा कि “भारत-पाकिस्तान संबंधों के बुरे दौर में सीमा के दोनों तरफ लोगो में चिंता थी। हमें उम्मीद है कि भारतीय चुनाव के समापन के बाद दोनों देशों के बीच तनाब कम होगा और उन्हें भान होगा कि संजीदा बातचीत के आलावा कोई अन्य विकल्प मौजूद है।”

उन्होंने कहा कि “साल 2008 के बाद से दोनों देशों के बीच को गंभीर बातचीत नहीं हुई है और संपर्क को बहाल करने की जिम्मेदारी दोनों पक्षों की है। अब भारत का दायित्व है, एक विशाल देश होने के नाते उन्हें पहल करनी चाहिए। हम तैयार है। हमारा दृष्टिकोण बातचीत ही है। भारत या पाकिस्तान के लिए जंग कोई विकल्प नहीं है।”

उन्होंने कहा कि “भारत और पाकिस्तान व्यापार और पारवहन सम्बंधिन को मध्य एशिया के साथ मज़बूत कर सकते हैं यदि द्विपक्षीय समबन्धों में सुधार आये और अफगानिस्तान के हालात बेहतर हो। दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान ही जोड़ते हैं। दक्षिण एशिया से मध्य एशिया के लिए सबसे छोटा मार्ग पाकिस्तान और अफगानिस्तान के जरिये जाता है।”

 

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