बाबा रामदेव का ट्रस्ट शुरू करेगा भारत का पहला वैदिक स्कूल बोर्ड

बाबा रामदेव की पतंजलि

हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार बाबा रामदेव द्वारा संचालित ट्रस्ट ने भारत में एक शिक्षा बोर्ड स्थापित करने में दिलचस्पी दिखाई है। पतंजलि स्वयं का बोर्ड शुरू करके वैदिक शिक्षा का प्रचार करना चाहता है। यह जानकारी पतंजलि द्वारा द इंडियन एक्सप्रेस को दी गयी है।

हरिद्वार ट्रस्ट का मिला समर्थन :

पतंजलि को अपना स्वयं का बोर्ड स्थापित करने के लिए कुछ इकाइयों का समर्थन चाहिए था। इसके लिए पतंजलि ने एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट जारी किया था जिसके अंतर्गत यदि किसीको इसमें दिलचस्पी है तो वे प्रतिक्रिया दें। अतः इसके परिणामस्वरूप हरिद्वार के एक ट्रस्ट ने पतंजलि की इस पहल को समर्थन दिया है। एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट पर प्रतिक्रिया करने की एक्सपायरी डेट मंगलवार शाम तक थी।

वैदिक बोर्ड का ध्येय :

पतंजलि का यह बोर्ड स्थापित होने पर भारतीय पारंपरिक ज्ञान का प्रचार करेगा। पारंपरिक शिक्षा में वेदों की जानकारी, संस्कृत की शिक्षा आदि शामिल हैं। यह पाठ्यक्रम, आचरण परीक्षा, प्रमाण पत्र जारी करने और गुरुकुलों, पथशालाओं और वैदिक और आधुनिक शिक्षा के मिश्रण की पेशकश करने वाले स्कूलों को मान्यता देगा। पतंजलि का यह बोर्ड भी सीबीएसई बोर्ड की तरह स्कूलों से परिक्षण का शुल्क लेगा।

इन संस्थानों को होगा लाभ :

एक बार यदि यह बोर्ड स्थापित हो जाता है तो इससे रामदेव के आवासीय विद्यालय आचार्यकुलम जैसे हरिद्वार, विद्या भारती स्कूलों (आरएसएस द्वारा संचालित) और आर्य समाज द्वारा संचालित गुरुकुल जैसे शैक्षणिक संस्थानों आदि को लाभ मिलेगा। बतादें की ये शिक्षण संस्थान अभी तक 12वीं तक शिक्षा नहीं देते हैं। वैदिक बोर्ड स्थापित होने पर इन विद्यालयों का खुद का बोर्ड होगा और फिर वे उच्च शिक्षा देने में सक्षम होंगे।

अभी कोई प्राइवेट वैदिक बोर्ड के ना होने के कारण ये विद्यालय अपने हिसाब से कार्य नहीं कर पा रहे हैं और 12वीं तक की शिक्षा को सीबीएसई बोर्ड अनुमति नहीं दे रहा है।

पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के बारे में :

पतंजलि की वेबसाइट पर दी गयी जानकारी के अनुसार पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट का उद्देश्य “योग और आयुर्वेद के अध्ययन और अनुसंधान के अलावा यज्ञ, जैविक कृषि, गोमूत्र, प्रकृति और पर्यावरण से संबंधित विषयों का अध्ययन और शोध करना” है। रामदेव के अलावा आचार्य बालकृष्ण, स्वामी मुक्तानंद और शंकरदेव इसके ट्रस्टी हैं। इस बोर्ड को स्थापित करने का जिम्मा महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान संस्था को सौंपा गया है।

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