Thu. Oct 6th, 2022
    फ्रांस और चीन

    चीन और फ्रांस ने सोमवार को अरबों के समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग फ्रांस की यात्रा पर थे। इसमें एयरबस योजना भी शामिल थी। राष्ट्रपति इम्मानुएल मैक्रॉन चाहते थे कि चीनी तकनीक और व्यापार अग्रिमों के खिलाफ यूरोपीय संघ से कार्रवाई की मांग की थी। शी जिनपिंग की पेरिस यात्रा से प्रदर्शनकारियों को ईयू को चीन पर अधिक कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाने का एक अवसर मिल गया है।

    रायटर्स के मुताबिक इम्मानुएल मैक्रॉन ने शी जिंगपिंग के साथ संयुक्त सम्बोधन में कहा कि “यूरोप को एकजुट रहना है और यह एक सुसंगत सन्देश था। इसलिए हम रणनीतिक निवेश कर रहे हैं।” मैक्रॉन और शी के मुलाकात के बाद दोनों मंगलवार को जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से और ईयू के प्रमुख जीन क्लॉउड़े जुंकेर से मुलाकात करेंगे।

    इटली की यात्रा के बाद शी जिनपिंग पेरिस की यात्रा पर आये हैं। चीन की महत्वकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को पश्चिमी देशों में सबसे पहले इटली ने ही मान्यता दी है। बीआरआई की परियोना के तहत चीन अपनी जमीन को दक्षिणी पूर्वी, यूरोप अफ्रीका और मध्य एशिया से जोड़ेगा।

    फ्रांस ने कहा कि रेशम मार्ग सहयोग को दोनों दिशाओं में कार्य की जरुरत है। फ़्रांसिसी राष्ट्रपति ने कहा कि “ईयू की कंपनियों को चीन में बेहतर तरीके से पंहुच की जरुरत है। कारोबारी पर्यावरण और निष्पक्ष प्रतिद्वंदिता में आदान-प्रदान और सुधार में अधिक भरोसे की जरुरत है। बीआरआई को अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का पालन करना होगा।”

    दोनों पक्षों ने 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसकी कीमत 45 अरब डॉलर है। 300 एयरबस योजना अकेले 30 अरब यूरो की है। इन कॉन्ट्रैक्ट्स में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से बैंकिंग और शिपिंग भी शामिल है।

    फ्रांस 24 के कॉलम में मुताबिक, शी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चाहते हैं फ्रांस बीआरआई परियोजना में सहयोग करे। उन्होंने कहा था कि “हम अपने मुल्क का विकास करना चाहते हैं ताकि दुसरो को इससे फायदा हो सके और यही बीआरआई परियोजना के साथ है।”

    फ्रांस के अधिकारीयों ने चीन का चुनौती और साझेदार के तौर पर वर्णन किया है। चीन द्वारा पेरिस की तकनीक का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करने के प्रयासों पर फ्रांस को बेहद जागरूक रहना होगा। ईयू भी चीन के खिलाफ रक्षात्मक रणनीति का इस्तेमाल कर रहा है।

    पेरिस के एशियाई राजनयिक ने कहा कि “मैक्रॉन इस बात से नाखुश है कि रोम में शी जिनपिंग की परियोजना को समर्थन मिला।” दक्षिणपंथी समुदायों ने मैक्रॉन से दरख्वास्त की है कि चीन में मानवधिकार उल्लंघनों से किनारा न करे। चीन में उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पेरिस में प्रदर्शन किया था।

    फ़्रांसिसी राष्ट्रपति ने कहा कि “ईयू का आधार प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक आधार है। इसलिए फ्रांस ने इस मसले को चीन के साथ बातचीत के दौरान उठाया था।”

    यूरोप में बेल्ट एंड रोड का विस्तार

    चीन की बेल्ट एंड रोड योजना में एशिया के अनेकों देश जुड़ चुके हैं। इसमें पाकिस्तान, श्रीलंका, वियतनाम, मालदीव, म्यांमार, नेपाल आदि शामिल हैं।

    अब हालाँकि चीन इस योजना को यूरोप में मध्य पूर्वी एशिया के देशों से भी जोड़ रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नें हाल ही में यूरोपीय देशों की यात्रा की थी, जिसके जरिये वे यहाँ के देशों को इस योजना के साथ जोड़ना चाहते थे।

    इस दौरान इटली बेल्ट एंड रोड योजना से जुड़ गया है। इस दौरान इटली नें चीन के साथ लगभग 2.5 अरब यूरो की योजना पर हस्ताक्षर किये, जिनकी भविष्य की लागत लगभग 20 अरब यूरो बताई जा रही है।

    जहाँ चीन और इटली इस योजना से जुड़ने पर ख़ुशी मना रहे हैं वहीँ अमेरिका समेत कई यूरोपीय देश भी इटली के इस कदम को ठीक नहीं बता रहे हैं।

    इटली के इस कदम का हालाँकि अन्य यूरोपीय देशों नें कड़ा विरोध किया है।

    इसके अलावा यूरोप के वे देश, जिन्होनें पहले ही इस योजना में हिस्सा ले लिए है, जिसमें पोलैंड और अन्य पूर्वी यूरोप के देश आते हैं, उन्होनें शिकायत की है कि चीन नें जो वादे किये थे वे अब तक पुरे नहीं हुए हैं।

    क्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् नें हाल ही में ट्विटर पर चेतावनी दी थी कि यदि इटली ऐसा करता है तो यह पूरी तरह से चीन का फायदा होगा और इटली के लोगों का इसमें कोई फायदा नहीं होगा।

    यूरोपीय संघ को खतरा है कि यदि इटली चीन जैसे देश से इतना बड़ा करार करता है तो भीतरी यूरोपीय देशों में सम्बन्ध कमजोर हो जायेंगे।

    इटली के अलावा फ्रांस नें भी चीन के साथ अरबों डॉलर का समझौता किया है, लेकिन फ्रांस नें बेल्ट एंड रोड योजना से जुड़ने से मना कर दिया है।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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