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    जापान की सत्तारूढ़ पार्टी ने बुधवार को पूर्व विदेश मंत्री फुमियो किशिदा को अपना नया नेता चुना जिससे वह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के अगले प्रधान मंत्री बनने के लिए तैयार हो गए। मृदुभाषी मध्यमार्गी किशिदा ने पूर्व प्रधान मंत्री योशीहिदे सुगा की जगह लेने के लिए एक असामान्य रूप से करीबी दौड़ में लोकप्रिय वैक्सीन प्रमुख तारो कोनो को हराया। गौरतलब है कि तारो कोनो कार्यालय में सिर्फ एक साल बाद पद छोड़ रहे हैं।

    64 वर्षीय फुमियो किशिदा को 4 अक्टूबर को संसद में एक वोट से नए प्रधान मंत्री के रूप में पुष्टि करनी होगी। इसके बाद नवंबर तक होने वाले आम चुनावों में उन्ही द्वारा लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) का नेतृत्व करने की उम्मीद है।

    अपनी जीत के बाद बोलते हुए, उन्होंने सदस्यों से “जनता को दिखाने के लिए कि एलडीपी का पुनर्जन्म हुआ है, और उनके समर्थन के लिए अपील” करने का आह्वान किया।

    हिरोशिमा के एक राजनीतिक परिवार के वंशज किशिदा ने लंबे समय से प्रधान मंत्री कार्यालय को लक्ष्य बनाया है और पिछले साल पार्टी नेता के पद के चुनाव में असफल रहे थे जिसमे पूर्व प्रधान मंत्री सुगा ने जीत हासिल की थी। वह इस बार प्रधान मंत्री पद की दौड़ में कदम रखने वाले पहले उम्मीदवार थे। उन्होंने बुधवार को अपनी जीत के बाद कहा कि, “मेरा कौशल वास्तव में लोगों को सुनना है और जापान के उज्ज्वल भविष्य” के लिए काम करने का वादा किया।

    फुमियो किशिदा ने पहले दौर में तारो कोनो को केवल एक वोट से हराया था। हालाँकि, दुसरे चरण के बाद तारो कोनो के 170 वोटों के खिलाफ उन्हें 257 वोट मिले।

    दो अन्य उम्मीदवार, दक्षिणपंथी साने ताकाची और नारीवादी पूर्व लैंगिक समानता मंत्री सेको नोडा, पहले दौर के वोट से आगे नहीं बढ़े। पूर्व एलडीपी नीति प्रमुख किशिदा ने महामारी के लिए पूर्व प्रधान मंत्री सुगा की प्रतिक्रिया पर सार्वजनिक असंतोष को भुनाने की मांग की थी जिसने उनकी सरकार की अनुमोदन रेटिंग को रिकॉर्ड चढ़ाव में मदद की है।

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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