सोमवार, अप्रैल 6, 2020

पुलिस की मदद के बिना की दो महिलाओ ने “सबरीमाला मंदिर” में घुसने की कोशिश, विरोध के कारण मिली निराशा

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साक्षी बंसल
पत्रकारिता की छात्रा जिसे ख़बरों की दुनिया में रूचि है।

शनिवार के दिन, दो महिलाओ ने “सबरीमाला मंदिर” में घुसने की कोशिश की थी मगर श्रद्धालुओं के विरोध के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। पुलिस ने बताया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गयी थी।

पहली महिला की उम्र थी 42 और दूसरी महिला की उम्र 20 साल से थोड़ी ज्यादा थी। सूत्रों का कहना है कि इस काम को अंजाम देने के लिए दो समूह बनाये गए थे। पहले समूह में 42 उम्र वाली महिला थी जो मंदिर से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर थी मगर विरोधियो के चक्कर में उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। दूसरा समूह, जिसमे युवा लड़की थी, उन्होंने पहले ही लौटने का मन बना लिया था जब उन्होंने विरोधियो की उत्तेजना देखी मगर इसके बावजूद भी उन्हें विरोधियो के तीखे सवालो का शिकार होना पड़ा।

पुलिस ने बाद में बताया कि महिलाओ ने नाही अपने प्लान के बारे में जानकारी दी और नाही कोई सुरक्षा मांगी। एक उच्च ऑफिसियल ने एनडीटीवी को बताया-“हमे तभी पता चला जब विरोधी भड़क उठे। हमने उन्हें पुलिस स्टेशन सुरक्षित पहुँचाया और तीन लोगो को पकड़ा भी।”

जबसे सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितम्बर को ये फैसला दिया है कि हर महिला मासिक धर्म में होने के बावजूद भी भगवान अयप्पा के दर्शन करने के लिए “सबरीमाला मंदिर” जा सकती है तबसे विरोध प्रदर्शन अपने चरम पर पहुँच चुका है। केरल की वामपंथी सरकार ने कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेगी मगर भाजपा और आरएसएस इसके सख्त खिलाफ है और उन्होंने कहा है कि न्यायपालिका और राज्य सरकार का कोई अधिकार नहीं बनता कि वे किसी के भी धार्मिक मामलो में दखलबाज़ी दें। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी राज्य सरकार का विरोध किया है।

अगले ही महीने जब मंदिर का दरवाजा हर श्रद्धालु के लिए खुला तो कई महिलाओ ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की मगर विरोधियो के कारण उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई। जब माहौल काफी गरम हो गया तब भाजपा मुख्य श्रीधरन पिल्लई ने कहा था कि ये उनकी पार्टी के लिए सुनहरा मौका है ताकि वे केरल में अपने हाथ पैर फैला सके।

मगर पिनरई विजयन ने कहा था कि वे महिलाओ को उनका हक़ दिलाकर ही रखेंगे। और लगता है कि भाजपा को इस सुनहरे अवसर ने कोई ख़ास फायदा नहीं किया। हाल ही में जब स्थानीय निकाय उपचुनाव हुए तो वामपंथी सरकार को बड़ी जीत हासिल हुई। उन्हें 39 सीट में से 21 मिली जबकि कांग्रेस को 12 मिली और भाजपा 2 पर ही सिमट गयी।

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