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पीढ़ी का अंतर या पीढ़ी अंतराल पर निबंध

पीढ़ी अंतराल निबंध, generation gap essay in hindi (100 शब्द)

दो लोग जिनका अलग अलग समय में जन्म हुआ है एक दुसरे से काफी अलग अलग होते हैं। इनमे से एक होता है उनके सोचने का तरीका। आज के समय में दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है जिसकी वजह से नयी नयी पीढियां पुरानी पीढ़ियों से काफी बदलती जा रही हैं। यदि हम भारत का उदाहरण ले तो जो लोग स्वतंत्र से पहले जन्मे थे वे स्वतंत्र के बाद जन्मे लोगों से विचारों में बिलकुल अलग हैं और जो लोग 21वीं सदी में जन्में हैं वे पिछले लोगों से बिकुल अलग हैं। यह मुख्यतः अलग अलग समय और परिस्थितियों में जन्म लेने की वजह से होता है।

जब दो पीढ़ियों में अंतर हो जाता है तो हम इसे पीढ़ी अन्तराल या जनरेशन गैप (generation gap) कहते हैं। बदलते समय के साथ लोगों के जीने के तौर तरीके, विचारधारा, विशवास और सम्पूर्ण व्यवहार में ही बदलाव आता है जिससे वे दुसरे लोगों से बिलकुल भीं होते हैं। माँ-बाप और बच्चों के बेच ये अंतर आने की वजह से इस रिश्ते में तनाव आता है और अक्सर झगडे होते हैं। हालांकि इसे उचित प्रबंधन से दूर किया जा सकता है।

पीढ़ी का अंतर निबंध, generation gap essay in hindi 2 (200 शब्द)

पीढ़ी में अंतर तब होता है जब दो लोगों के बीच उम्र का काफी फर्क होता है जिससे उन दोनों के विचार मेल नहीं खाते हैं। जैसे माँ-बाप और बच्चे, इनकी विभिन्न राय होती है और इसी कारण से उनमे अक्सर टकराव होता है। पीढ़ी के अंतर या जनरेशन गैप को किन्हीं दो विभिन्न पीढ़ियों के लोगों की विचारधाराओं के अंतर के रूप मे समझाया जाता है। आज के समय में जब पूरी दुनिया के हर क्षेत्र में तेजी से बदलाव आ रहे हैं और इसी वजह से अलग अलग समय में जन्में लोगो के विचार भी अलग अलग होते हैं।

हम उदाहरण के तोर पर भारत को ही लेते हैं यहाँ 21वीं सदी में पैदा हुए लोग पिछली सदी में पैदा हुए लोगों से विचारधाराओं के मामले में बिलकुल अलग हैं। विभिन्न लोगों के विचार मेल नहीं खाते है हालांकि दोनों व्यक्ति अपने हिसाब से सही होते हैं लेकिन समय परिवर्तन के हिसाब से पहले जन्में लोग अपने आप को व्यवस्थित नहीं कर पाते और इसी वजह से हाल ही में जन्में लोग और उनके विचार मेल नहीं खाते हैं और टकराव होता है।

जनरेशन गैप के अंतर का मुख्य असर माता-पिता और संतान के रिश्ते पर पड़ता है। आजकल लोग ज्यादा स्वतंत्र रहना पसंद करते हैं और साथ ही ज्यादा निजता बनाए रखना पसंद करते है हालांकि माँ-बाप की सोच थोड़ी अलग है। माँ-बाप अपने बच्चों में नैतिकता और व्यवाहरिकता सिखाना चाहते है, जिससे इस रिश्ते में अक्सर टकराव देखा जाता है। हालांकि जनरेशन गैप को जड़ से ख़त्म नहीं किया जा सकता है, लेकिन यदि माँ-बाप और बच्चे यदि आपस में अपने सभी विचार रखें और सही गलत का फैसला मिल कर करें तो अन्तर से होने वाले टकराव को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

पीढ़ी अंतराल निबन्ध, generation gap essay in hindi 3 (300 शब्द)

दो पीढ़ी के व्यक्तियों के विचार और तौर तरीकों में जब समय के साथ अंतर आ जाता है तो इसे जनरेशन गैप या पीढ़ी अंतराल कहा जाता है। अक्सर देखा जाता है की माँ-बाप और दादा-दादी के विचार काफी अलग होते हैं इसके अलावा माँ-बाप और बच्चों के विचारों में भी अक्सर अंतर देखा जाता है ऐसे ही आने अंतर की वजह से पीढ़ी अंतराल होता है जिससे की दो पक्षों के विचार बदलते हैं।

पीढ़ी अंतराल की उत्पत्ति (Origin of the Term)

जनरेशन गैप या पीढ़ी अंतराल शब्द की उत्पत्ति सबसे पहले 1960 में हुई थी। यह ऐसा समय था जब पहली बार देखा गया की एक बच्चा अपने माँ-बाप के हर नियम के खिलाफ जाने लगा या उन पर सवाल उठाने लगा। इसमें उनके धार्मिक विश्वास, राजनीतिक विचार, नैतिक मूल्य, रिश्ते की सलाह और यहां तक कि संगीत के प्रकार भी शामिल थे। कुछ समाजवादी व्यक्तियों ने सी विषय पर रिसर्च की और पीढ़ियों के बीच बढ़ रहे अंतर और तेजी से बदला रहे विचारों को जांचा।

जनरेशन गैप की अवधारणा (Interesting Concept)

हालांकि जनरेशन गैप माँ-बाप और बच्चों के बीच टकराव का एक मुख्य कारण होता है, लेकिन जनरेशन गैप इस दुनिया में होना ज़रूरी भी है। इसी की वजह से हर नई पीढ़ी कुछ नया करती है और यदि जनरेशन गैप नहीं होता तो इस दुनिया में बदलाव की गति बहुत धीमी होती। आज कल की बदलती दुनिया में हर नयी पीढ़ी नया फैशन, नए आविष्कार कर रही है क्योंकि उनके विचार, तरीके और ज़रूरतें बदल रही है और इसी वजह से हमारी दुनिया में तकनीकें इतनी तेजी से विकसित हो रही हैं।

जनरेशन गैप की वजह से इसी दुनिया में काफी बदलाव आये हैं जैसे भारत में पहले बड़े परिवार होते थे जिसमे एक से अधिक परिवार मिलकर रहते थे लेकिन अब लोगों की धारणाएं बदल गयी है और अब वे निजता चाहने लगे हैं जिसके कारण ज़्यादातर लोग छोटे परिवारों में रहते है और यहाँ तक की वे अपने माँ-बाप के साथ भी रहना पसंद नहीं करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

जैसा की हर चीज़ का फायदा भी होता है और नुक्सान भी उसी तरह जनरेशन गैप के भी अपने फायदे और नुक्सान हैं। यदि यह नहीं रहेगा तो हमारी दुनिया इस तेजी से नहीं बढ़ेगी हालांकि इसे होने वाले नुक्सान को कुछ प्रयत्न करके हम काफी हद तक कम कर सकते हैं।

जनरेशन गैप essay on generation gap in hindi, (400 शब्द)

प्रस्तावना (Introduction)

आज के परिदृश्य में दुनिया काफी तेजी से बदल रही है। विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में भी उनाती हो रही है और इसी के साथ साथ लोगों का रहन सहन और उनके विचार और जीने के तरीके और ज़रूरतें बदल रही है। इसी के परिणामस्वरूप एक विशेष पीढ़ी के लोगों की धारणाएं दूसरी पीढ़ी के लोगों से मेल नहीं खाती यानी अलग होती हैं और इसे ही जनरेशन गैप या पीढ़ी अंतराल कहा जाता है।

पीढ़ी अंतराल कैसे प्रत्यक्ष होता है? (How is the Generation Gap Evident?)

अलग अलग पीढ़ियों संबंधित लोगों को अलग अलग नाम दिए जाते हैं जैसे जो लोग स्वतंत्रता से पहले हुए थे उन्हें परम्परावादी कहा जाता है इसके अलावा जो लोग 1950-1965 के बीच पैदा हुए हैं उन्हें बेबी बूमर्स कहा जाता है। इसके साथ जो लोग 1965-1980 के बीच पैदा हुए हैं उन लोगों को जनरेशन एक्स और इसके बाद पैसा हुए लोगों को जनरेशन वाय कहा जाता है। निम्न बिंदु पीढ़ी अंतराल को दर्शाते हैं :

1. सयुंक्त परिवार और छोटा परिवार :

पहले की पीढ़ी के लोग अक्सर सयुंक्त परिवार के रूप में रहा करते थे यानी एक से अधिक परिवार एक ही घर में एक साथ रहा करते थे लेकिन बदलते समय के साथ युवाओं की सिच बदल रही है और वे सभी निजता को तरजीह देने लगे हैं जिससे छोटे परिवार उभर रहे है। सभी निजता बनाए रखना चाहते हैं जिसके कारण एक सयुंक्त परिवार से दूर ही रहना पसंद करते हैं और यहाँ तक वे अपने माँ-बाप को भी अपने साथ रखना ठीक नहीं समझते है।

2. भाषा :

जनरेशन गैप की वजह से प्रयोग में ली जा रही भाषा में भी बदलाव देखने को मिले हैं। जैसे जो हिंदी लोग स्वतंत्रता से पहले बोलते थे वैसी हिंदी अब नहीं बोलते हैं उसमे काफी बदलाव आ चुके हैं इसके साथ ही भाषा में कई नए शब्द भी जुड़े हैं ऐसे में यदि कोई पिछली पीढ़ी का व्यक्ति आज के युवाओं से वाद विवाद करता है तो कुछ शब्द उसकी समझ से बाधार होते हैं जिससे वार्ता बाधित होती है।

3. हावभाव :

पिछली पीढ़ियों के लोग अपने अधिकारियों के प्रति वफादार थे और उनसे दिशा निर्देश लेकर काम करने में उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होती थी लेकिन आज की यूवा पीढ़ी इससे बिलकुल अलग है। आज सभी अपना व्यवसाय खोलना चाहते हैं और कोई भी किसी दुसरे के नीचे कार्य नहीं करना चाहता है। इस कारण पिछली पीढ़ी की तुलना में इस पीढ़ी में बहुत बदलाव देखने को मिला है और इसी कारण से बहुत से नए इंटरप्रेन्योर बने हैं।

4. महिलाओं के प्रति व्यवहार :

पहले महिलाएं मुख्यतः घर के अन्दर रहा करती थी और उन पर घर के कामकाज का पूरा बोझ हुआ करता था। इसके साथ में पुरुष को ही बाहर जाकर कार्य करने की अनुमति हुआ करती थी और महिलाएं घर का कार्य संभालती थी। लेकिन अब समाज का महिलाओं के प्रति रवैय्या बदल गया है और अब वे अपनी इच्छानुसार कोई भी कार्य कर सकती हैं या किसी भी क्षेत्र में जा सकती है। नए ज़माने में उन्हें घर की बेड़ियों से आज़ादी मिली है।

निष्कर्ष (Conclusion)

यदि दो पीढ़ी के लोग एक दुसरे से मेल नहीं खाते हैं तो यह एक आम बात है लेकिन यदि एक पीढ़ी के लोग दूसरी पीढ़ी के लोगों पर अपने विचार थोपते हैं तो यह जनरेशन गैप से नुक्सान होता है। हमें ऐसा करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दो पीढ़ियों के बीच तनाव बढ़ता है और अक्सर टकराव होते है।

जनरेशन गैप, essay on generation gap in hindi (500 वर्ड्स)

प्रस्तावना (Introduction)

जनरेशन गैप मुख्यतः दो पीढ़ियों के बीच का अंतर होता है। इस अंतर की वजह से उनके विचारों मरीं भिन्नता आती है। इसको सबसे पहले 1960 में पहचान दी गयी थी तब माना जा रहा था की वर्तमान पीढ़ी अपने से पहले की पीढ़ी के हर विचार और विश्वास आदि पर सवाल उठा रही है। पीढ़ी अंतराल का यह मुख्या असार होता है की एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी के विचारों से बिलकुल सहमत नहीं होती या फिर उन पर सवाल उठाती है।

विभिन्न पीढियां (Classification of Generations)

जब गेन्रतोइन गैप की पहचान की गयी तभी से ही विभिन्न पीढ़ियों का वर्गीकरण किया जाने लगा। इसके मुताबिक़ जो लोग स्वतंत्रता से पहले जन्मे थे उन्हें पारंपरिक कहा जाने लगा इसके बाद जन्मे लोगों को बेबी बूमर्स और 1965-1980 के बीच जन्मे लोगों को जनरेशन एक्स और इसके बाद जन्म लेने वाले लोगों को जनरेशन वाई नाम दिया गया।

  1. पारंपरिक लोग :

यह शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग में लिया जाने लगा जोकि स्वतंत्र से पहले यानी 1946 तक जन्म ले चुके थे। इन लोगों को परम्परावादी या पारंपरिक कहा जाता है। ये अभी तक 70 वर्ष या अधिक के हो चुके हैं और ये सामान्य ज़िन्दगी जीना पसंद करते हैं। ये अपने से ऊपर के लोगों से दिशा-निर्देश लेने में बिलकुल नहीं हिचकिचाते हैं और अपने से छोटे लोगों के साथ प्रेम से रहते हैं तथा अपनी ज़िन्दगी के घटनाओं के बारे में बताना पसंद करते हैं। ये लोग आने वाली पीढ़ी के लोगों से काफी अलग हैं।

2. बेबी बूमर्स :

यह शब्द ऐसे लोगों के प्रयोग किया जाता है जोकि स्वतंत्र के बाद जन्मे लेकिन 1965 से पहले जन्म ले चुके थे। इस पीढ़ी के लोग कड़ी मेहनत करने वाले हैं लेकिन ज्यादातर लोग फीडबैक पर निर्भर नहीं होते हैं। उन्हें अपने काम पूरा करने के पुरस्कार के रूप में पैसा और प्रचार भी चाहिए। चूंकि इनमें से अधिकतर ऐशो-आराम से नहीं जिए इसलिए वे सुनिश्चित करते हैं कि उनके बच्चों को वह सब कुछ मिले जो वे चाहते हैं। अतः वे पाने बच्चों का पूरी तरह ख्याल रखते और चाहते हैं की उनकी सराहना की जाए। वे चाहते हैं कि उनके अधिकारी और बच्चें यह समझे कि वे मूल्यवान और आवश्यक हैं। इन सभी चीजों की कमी उनके बीच असंतोष पैदा करती है।

3. जनरेशन एक्स :

जनरेशन एक्स शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जोकि वर्ष 1965 से 1980 के बीच जन्मे थे। जनरेशन एक्स अपने काम से अपनी पहचान बनाता है। यह समय समय पर छुट्टी लेना पसंद करते हैं और ये लोग नियमों से काम करना पसंद नहीं करते हैं। वे चीज़ों को अपने तरीके से करना बेहद पसंद करते हैं। इन लोगों ने अपने माता-पिटा को काम करते देखा था जिससे इनपर बुरा असर हुआ और अब ये अपने परिवार के साथ समय बिताना बहुत पसंद करते हैं।

4. जनरेशन वाई :

यह शब्द ऐसे व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है जोकि वर्ष 1981 से 1999 के बीच जन्मे थे। इनमे से अधिकांश ने अभी काम करने की उम्र में प्रवेश किया है। यह समूह सार्थक काम में शामिल होने में दिलचस्पी लेता है और अपने काम के प्रति अपनी फीडबैक देने में भी आगे रहता है।

इस पीढ़ी के लोग काफी रचनात्मक होते हैं। वे रचनात्मक व्यक्तियों और उन स्थानों पर काम करना पसंद करते हैं जहां उनकी रचनात्मकता का पता लगाने की अनुमति होती है। यह उनके लिए प्रेरणा का एक स्रोत है और उन्हें जिंदा रखता है। यह एक ऐसी पीढ़ी है जो बहुत जल्दी ऊब जाती है। परंपरावादियों के विपरीत वे अपनी नौकरी काफी बार बदलते हैं। ये एक वर्ष में कई बार अपनी नौकरियां बदलते हैं। ये वहां नौकरी करते हैं जहां उनकी प्रतिभा के अनुसार उन्हें काम में लिया जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

यह दुनिया काफी तेजी से बदला रही है और इसी के साथ इंसान अपने आप को भी बदल रहा है इसके हमें बदलती दुनिया के साथ बदलते रहना चाहिए। यदि हमारे विचार दुसरे व्यक्ति से मेल नहीं खाते तो यह गलत नहीं है लेकिन यदि इस बात पर झगडा होता है तो इससे हमें बचने की कोशिश करनी चाहिए।

पीढ़ी अंतराल, essay on generation gap in hindi (600 शब्द)

प्रस्तावना (Introduction)

पीढ़ी अंतराल या जनरेशन गैप एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। विभिन्न प्रयोगों के निष्कर्ष से पता चला है की इस तेजी से बदलती दुनिया में दो पीढ़ियों में बदलाव आना एक साधारण बात है। बल्कि यह इंसानों के लिए बहुत अच्छी बात है क्योंकि इसी के आधार पर हम बेहतर होते हैं और बदलती दुनिया के साथ अपने आप को भी बदल पाते हैं। यदि पीढ़ी में कोई अंतर नहीं होगा तो हम उन्नति नहीं करेंगे और हमारे जीवन जीने का कोई उद्देश्य नहीं बच जाएगा।

रिश्तों पर पीढ़ी अंतराल का असर (Impact on Relations)

दो पीढ़ियों के विचार भिन्न होना एक आम बात है यह सामान्य है क्योंकि सभी समान विचार वाले नहीं होते लेकिन जब इस विचार में अंतर की वजह से रिश्तों में अनबन होती है तो यह जनरेशन गैप के नुक्सान बताता है। जैसा की अक्सर देखा जाता है की माँ-बाप और बच्चों के बीच विचार भेद जनरेशन गैप की वजह से होता है। इससे माँ-बाप जो बच्चे को सिखाते है उस पर वह सवाल उठाता है और वह जो करता है उस पर उसके माँ-बाप सवाल उठाते हैं। इन कारणों से जनरेशन गैप के दुप्रभाव अधिक माने जाते हैं।

माता-पिता को अपने बच्चे से बहुत उम्मीदें होती है। वे चाहते हैं की उनका बच्चा उनके हिसाब से कार्य करे लेकिन जब बच्चे के विचार अलग होते हैं तो इससे अक्सर उनके बीच झगडे होते हैं। बच्चे हर एक चीज़ का कारण जानना चाहते हैं लेकिन माँ-बाप केवल ये चीज़ें बच्चों पर पर थोप देते हैं और उनकी जिज्ञासा अधूरी रह जाती है। जब उन्हें किसी चीज़ का कारण नहीं पता होता तो वे उसे कारन भी पसंद नहीं करते। माँ-बाप को लगता है की वे हर जगह सही हैं लेकिन उन्हें हर फैसले से पहले दोनों पक्षों की राय लेनी चाहिए और अपने बच्चों से अच्छी तरह बातें करनी चाहिए।

जनरेशन गैप कैसे ख़त्म हो सकता है? (How to Bridge the Gap?)

माता-पिता और बच्चों के बीच एक बहुत सुन्दर होता है। इसमें माता-पिता का कर्त्तव्य होता है की वे बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करें और प्यार से रखें। ऐसे में कभी बच्चे के विभिन्न विचार होते हैं तो ऐसे में माँ-बाप को इसे निपुणता से संभालना चाहिए और बच्चे की हर जिज्ञासा शांत करना चाहिए।

यह समझने की ज़रुरत है की दो पीढ़ियों में से किसी कार्य को लेकर कोई भी पीढ़ी गलत नहीं होती है। वे दोनों अपनी जगह सही होती हैं ऐसे में झगडे की बजाय अपने अपने निर्णय को फिर से एक बार फिर से मंथन करने की ज़रुरत होती है और हम इस गैप को मिटा सकते हैं।

जो लोग पिछली पीड़ी के हैं उन्हें समझना चाहिए की जो नयी पीढ़ी है उनके बेशक विचार अलग होंगे क्योंकि वे अलग समय में जन्मे हैं और इसी के कारण उनके विचार का मेल ना खाना स्वाभाविक है। माँ-बाप को इस बात पर ध्यान देने की ज़रुरत है की उनका बच्चा इस प्रकार का व्यवहार क्यों कर रहा है। उन्हें अपने बच्चे को सारी बातें बतानी चाहिए और प्रोत्साहित करना चाहिए की वह भी अपने विचार उनके समक्ष रखे।

इसके अलावा माँ-बाप को अपने बच्चे को आत्मनिर्भर बानने देना चाहिए क्योंकि वे अगर हर काम में बीच में आयेंगे तो वह खुद से फैसला लेना नहीं सीखेगा। इसके साथ ही उन्हें अपने बच्चे के साथ नियमित रूप से बातें करनी चाहिए। इन कुछ तरीकों से वे जनरेशन गैप से होने वाले नुक्सान से बाख सकते हैं और उनका रिश्ता बना रह सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

यदि दो पीढ़ी के लोग एक दुसरे से मेल नहीं खाते हैं तो यह एक आम बात है लेकिन यदि एक पीढ़ी के लोग दूसरी पीढ़ी के लोगों पर अपने विचार थोपते हैं तो यह जनरेशन गैप से नुक्सान होता है। हमें ऐसा करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दो पीढ़ियों के बीच तनाव बढ़ता है और अक्सर टकराव होते है।

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About the author

विकास सिंह

विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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