मंगलवार, दिसम्बर 10, 2019

पाकिस्तान में जबरन दो हिन्दू नाबालिगों का धर्मांतरण, भारत ने जताई चिंता

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

पाकिस्तान में शनिवार को दो हिन्दू लड़कियों का इस्लाम में जबरन धर्मांतरण करा दिया था। भारत ने पाकिस्तानी विदेश विभाग को आधिकारिक नोट देकर लड़कियों के अपहरण और धर्मांतरण की ख़बरों पर चिंता व्यक्त की है। भारत ने पाकिस्तान सरकार से अपनी आवाम विशेषकर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को संरक्षित और प्रचारित करने और जलकल्याण के लिए अनुरूप कार्रवाई करने की मांग की है।

हिन्दू समुदाय के नेताओं के हवाले से एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुतबिक अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाली दो नाबालिग लड़कियों का कोहबर और मालिक जनजाति के लोगों ने 21 मार्च को अपहरण किया है। अपहरण की गयी लड़कियों के भाई ने आरोप लगाया कि बालविवाह से पूर्व लड़कियों का अपहरण किया गया और उनका धर्म परिवर्तन कराया गया था।

एक वीडियो में लड़किया कहती दिख रही है उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम को कबूल किया है। पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को खानपुर से गिरफ्तार किया है। इस व्यक्ति ने दोनों नाबालिग लड़कियों के निकाह में मदद की थी। पाकिस्तानी मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि अपहरण और जबरन धर्मांतरण का यह मामला दूसरा है। सिंध के दक्षिणी भाग में यह मामले अब सामान्य है।

जनवरी 2019 में हिन्दू लड़की अनुषा कुमारी का अपहरण किया गया था और जबरन उसका निकाह एक मुस्लिम युवक से किया गया था। उच्चायुक्त ने इस मामले को पाकिस्तान के समक्ष उठाया था। सितम्बर 2017 में हिन्दू अल्पसंख्यक अध्यापक आरती कुमारी का जबरन धर्म परिवर्तन किया गया था। एक अन्य सिख समुदाय के लड़की प्रिया कौर का अप्रैल 2017 में अपहरण किया गया था और खैबर पख्तूनवा के बुनेर जिले के मुस्लिम युवक वाजिद अली से उसका निकाह करवा दिया गया था।

भारत सरकार ने फरवरी 2019, जून 2018 और दिसंबर 2017 में पाकिस्तान सरकार के समक्ष हिन्दू और सिख समुदाय को धमकी और उनके पूजा स्थलों को अपवित्र करने के मामले को उठाया था। साल 2014 की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में प्रतिवर्ष 1000 लड़कियों को जबरन इस्लाम कबूलने कराया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार 12 से 25 साल तक की लड़कियों का अपहरण किया जाता है और फिर उनका धर्मांतरण कर उनकी शादी उनके अपहरणकर्ता से कर दी जाती है।

सामान्य तौर पर ऐसे मामलों की परिवाद दर्ज नहीं की जाती है। अगर शिकायत दर्ज  भी हो जाती है सुनवाई दौरान लड़की को अपहरणकर्ताओं के साथ ही रहना होता है और हिंसा व अपशब्दों से जूझना होता है। इन मामलों में लड़की बमुश्किल ही अपने परिवार के पास वापस जा पाती है। कम उम्र में बच्चियों के धर्मांतरण के बाद सिंध प्रान्त के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विधानसभा से नवंबर 2016 में इसके खिलाफ मसौदा पारित करने की मांग की थी। अलबत्ता, मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद सरकार ने बिल को वापस ले लिया और यह अभी लंबित है।

उत्तरी और मध्य सिंध में अधिकतर हिन्दू समुदाय के उच्च वर्ग के कारोबारी परिवार रहते हैं जो अब कराची शिफ्ट हो चुके हैं। इन आमिर परिवारों की बच्चियों के धर्मपरिवर्तन की खबरे दुर्लभ ही सुनने को मिलती है। बहरहाल, दखिनी सिंध में हिन्दू समुदाय की निचली जातियां रहती है। जिनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतों से पंहुच काफी दूर है और इन लोगों को हारिस कहा जाता है, जो मुस्लिम जमींदारों की जमीनों पर मज़दूरी करते हैं। हारिस की महिलायें और लड़कियां जमीदारों की आसानी से शिकार बन जाती है।

पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक उमेरकोट के कुनरी और समारो तलुकस की 25 हिन्दू लड़कियों का इस माह में धर्मपरिवर्तन किया गया है। अधिकतर मामलो में धर्मपरिवर्तन के बाद यह लड़कियां अपने असल परिवारों को नहीं मिल पाती है।

धर्मपरिवर्तन से पूर्व हिन्दू लड़कियों को 15 से 20 दिनों के लिए कैद में रखा जाता है, जहां उनका बलात्कार किया जाता है और परिवार के पास वापस न जाने की धमकियाँ दी जाती है। मौलवी उनका धर्मपरिवर्तन कर देते हैं। यह लड़कियां सामाजिक कलंक और गर्भधारण के कारण अपहरणकर्ता के साथ रहने मज़बूर हो जाती है।

अधिकतर अपहरणकर्ताओं में पुराने जमींदार शामिल होते हैं जो युवा लड़कियों को घरेलू कामकाज के लिए ढूढ़ते हैं। यह ज़मींदार लड़कियों और उनके बच्चों को कभी स्वीकार नहीं करते हैं और उन्हें अलग माहौल में रखा जाता है। स्थानीय हिन्दुओं के मुताबिक अमीर ज़मींदार ही उनकी महिलाओं और लड़कियों का शिकार करते हैं।

सिंध प्रान्त में महिलाओं के साथ ही उनके परिवारों को भी धर्म परिवर्तन करने के लिए मदरसे और मुस्लिम चैरिटी आर्गेनाईजेशन कई तरह का लालच देते हैं। हालिया वक्त में जबरन धर्मांतरण इस क्षेत्र का ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है।

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