गुरूवार, अक्टूबर 17, 2019

पाकिस्तान ने 58 सिख श्रद्धालुओं का वीजा किया ख़ारिज

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

पाकिस्तान ने बुधवार को 58 सिख श्रद्धालुओं को वीजा देने से इंकार कर दिया है जो महाराजा रंजीत सिंह की पुण्यतिथि की अवसर को देखने के लिए जाना चाहते थे। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक सिमिति ने वीजा के लिए 282 आवेदनों को भेजा था और सिर्फ 224 को ही वीजा दिया गया है, 58 का वीजा ख़ारिज कर दिया गया है।

एसजीपीसी सचिव मंजीत सिंह ने कहा कि “हमने 282 सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा का आवेदन किया था लेकिन सिर्फ  224 को ही वीजा दिया गया है और 58 वीजा को जारी नहीं किया गया है।” यह सिख श्रद्धालु कल अट्टारी रेलवे स्टेशन से एक विशेष ट्रैन से पाकिस्तान जायेंगे।

जिन सिखों का वीजा मंज़ूर नहीं किया गया है उन्होंने एसजीपीसी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया था। उन्होंने मांग की कि यहां वीजा सिस्टम नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि “हमारी मांग है कि इस वीजा सिस्टम को खत्म कर देना चाहिए। श्रद्धालुओं को इसके बगैर यात्रा की अनुमति होनी चाहिए। हम अब पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का इन्तजार कर रहे हैं।”

धार्मिक स्थलों पर यात्रा के भारत-पाकिस्तान प्रोटोकॉल, 1974 के तहत मंज़ूरी दी गयी है। इस समझौते के तहत भारत से हज़ारो श्रद्धालु  हर साल धार्मिक त्योहारों और अवसरों में शामिल होने के लिए पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं।

सिखों में महाराजा रणजीत सिंह का रसूख काफी ज्यादा है। सिख सम्राज्‍य के संस्‍थापक रणजीत सिंह का जन्म 13 नवंबर 1780 को हुआ था। महाराजा रणजीत सिंह ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने न केवल पंजाब को एक सशक्त सूबे के रूप में एकजुट रखा, बल्कि अपने जीवित रहते हुए अंग्रेजों को अपने साम्राज्य से कोसो दूर तक रखा।

12 अप्रैल 1801 का दिन 20 साल की उम्र में उन्हें पंजाब का महाराज बनाया गया था। गुरु नानक के एक वंशज ने उनकी ताजपोशी संपन्न की थी।

 

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