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प्रतिरोधी सेनाओं के आखरी गढ़ पंजशीर घाटी में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है तालिबान

तालिबान लड़ाके अफगानिस्तान के होल्डआउट पंजशीर घाटी में तेज़ी से आगे बढ़े हैं। जबकि प्रतिरोध सेनानियों ने कहा कि वे इस्लामवादियों को रोके हुए हैं लेकिन विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि ऐसा होता दिख नहीं रहा है। पिछले महीने अफगानिस्तान की सेना के बिजली की तेजी से हारने के बाद तालिबान पंजशीर घाटी की रक्षा करने वाले प्रतिरोध बलों को कुचलने की कोशिश कर रहा है। वहीं तालिबान ने अभी तक अपने नए शासन को अंतिम रूप नहीं दिया है।

इसके उलट शीर्ष अमेरिकी जनरल मार्क मिले ने सवाल किया कि क्या तालिबान सत्ता पर मजबूत तरह से काबिज हो सकते हैं क्योंकि वे खुद को एक गुरिल्ला बल से सरकार में स्थानांतरित करना चाहते हैं। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मिले ने कहा कि, “मुझे लगता है कि कम से कम एक व्यापक गृहयुद्ध की बहुत अच्छी संभावना है।” उन्होंने फॉक्स न्यूज को बताया, “इससे बदले में ऐसी स्थितियां पैदा होंगी जो अल-कायदा के पुनर्गठन या आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ग्रुप) के विकास की ओर ले जा सकती हैं।” अफगानिस्तान के नए शासकों ने सत्ता में अपने पहले कार्यकाल की तुलना में अधिक मिलनसार होने का वादा किया है।

तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने ट्विटर पर कहा कि प्रांतीय राजधानी बाजारक से सटे रूखा का पुलिस मुख्यालय और जिला केंद्र उनके कब्ज़े में आ गया है। उन्होंने कहा कि बजरक में लड़ाई अभी भी चल रही है।प्रतिरोध सेनानियों ने जोर देकर कहा कि उन्होंने इस्लामवादियों को दूर रखा है, लेकिन विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि वे संघर्ष कर रहे हैं।

अमेरिका स्थित लॉन्ग वॉर जर्नल के प्रबंध संपादक बिल रोगियो ने रविवार को ट्वीट किया, “तालिबान सेना 20 साल के युद्ध के साथ सख्त हो गई है।” दोनों पक्षों ने एक दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा (एनआरएफ) के प्रमुख अहमद मसूद के साथ पंजशीर में छिपे हुए पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने गंभीर स्थिति की चेतावनी दी है।

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आदित्य सिंह

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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