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नौकरियों तथा जीडीपी में वृद्धि के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पर पुनर्विचार करेगी केंद्र सरकार

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केंद्र सरकार नौकरियों तथा जीडीपी स्तर सुधारने के लिए मेक इन इंडिया पर पुनर्विचार करेगी, ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर को बढ़ावा दिया जाएगा।

केंद्र सरकार देश में रोजगार तथा आर्थिक विकास में वृद्धि के लिए एक बार फिर से अपने ‘मेक इन इंडिया‘ कार्यक्रम पर पुनर्विचार कर सकती है। वर्तमान में सरकार ने अपना ध्यान करीब 25 सेक्टरों पर लगा रखा है लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि चमड़ा, टैक्सटाइल्स और वस्त्र, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल जैसे चार या पांच सेक्टर पर ही ज्यादा जोर दिया जाएगा। सरकार अब इन्ही सेक्टरों को ज्यादा आगे बढ़ाने का काम करेगी।

नीति आयोग इसके लिए कई उच्च स्तरीय बैठकों का आयोजन भी कर चुका है। आॅटो इंडस्ट्रीज के लिए हैवी उद्योग मंत्रालयों और उनके विभाग ने एक नई नीति बनाई है जिससे रोजगार के ज्यादा अवसर बढ़ सके। श्रम और रोजगार मंत्रालय के अनुसार, हर साल भारत में लगभग 1 करोड़ युवा नौकरियों की दौड़ में शामिल होते हैं।

ऐसे में सरकार की मंशा है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा ग्लोबल ऑटोमोटिव कंपनियां निवेश करें। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि कोई भी देश बिना ऑटो उद्योग के कभी भी विकसित नहीं हो सका है। ऐसे में हमें इस मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में अपने ऑटो सेक्टर को मजबूत बनाना होगा।

भारत सरकार की निवेश संवर्धन इकाई ने भारी उद्योग मंत्रालय को ऑटो क्षेत्र के लिए कई विचार प्रस्तावित किए हैं। जिसके तहत सुझाव दिया गया है कि सरकार को भारत में प्रौद्योगिकी स्थापित करने के लिए कंपनियों को आॅटोमेटिव इंजीनियरिंग में डिजाइन को प्रमोट करना चाहिए। भविष्य का आधार अब तकनीकी सेक्टर ही है।

साउथ और साउथ ईस्ट एशिया, रोथ्सचुल्ड के वाइस चैयरमेन विकास सहगल का कहना है कि “भारत को चीन जैसे देशों से क्यू लेने की जरूरत है, जो 1999 में हमसे कम कारें बना रहे थे और आज ये आंकड़ा हमसे पार कर गया है, यही नहीं चीन ऑटो उद्योग में निर्यात भी करता है।”

रोथ्सचुल्ड कंपनी भारत के विभिन्न सेक्टर में निवेश के लिए रणनीति तैयार करने में लगी हुई है। सरकार की ओर से उन कंपनियों को पूरी सहायता दी जाएगी जो देश में इंजीनियर्स को बढ़ावा देंगी और सामानों का डिजाइन करेंगी। सरकार उन संयुक्त उद्यमों को भी प्रोत्साहित करेगी जो अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता तकनीक को भारत में लाएंगे, उदाहरण के लिए एमएंडएम और फोर्ड के बीच हुआ समझौता।

भारत सरकार आॅटो सेक्टर के लिए भूमि लागत पर छूट, पटटे के स्टाम्प शुल्क पर छूट, बिजली टैरिफ प्रोत्साहन, ऋण पर रियायती ब्याज दरें, निवेश सब्सिडी, टैक्स दर में छूट तथा पिछड़े क्षेत्र के लिए सब्सिडी और अन्य मेगा परियोजनाओं के लिए विशेष पैकेज आदि प्रदान करेगी।

सहगल ने बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा पांचवा यात्री और कमर्शियल आॅटो मार्केट है। ऐसे में केंद्र सरकार चीन, जापान, अमेरिका, फ्रांस और इटली जैसे शीर्ष बाजारों को देखते हुए आॅटो इंडस्ट्री को विशेष योगदान देगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि 2020 तक देश में 60 लाख से अधिक मिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन बेंचे जाएंगे। साल 2016 में अप्रैल-जून की तिमाही में ऑटो सेक्टर की एफडीआई 5 फीसदी के साथ बढ़कर 4.6 अरब डॉलर हो गया।




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