निर्देशक तुषार हीरानंदानी को फिल्म ‘सांड की आंख’ बनाने में लगे पूरे चार साल

निर्देशक तुषार हीरानंदानी को फिल्म 'सांड की आंख' बनाने में लगे पूरे चार साल

तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर अभिनीत फिल्म ‘सांड की आंख‘ का टीज़र कल ही रिलीज़ हुआ था। फिल्म में दोनों युवा अभिनेत्रियों को उम्रदराज़ शार्पशूटर के किरदार में देखकर दर्शक आश्चर्यचकित रह गए और जमकर उनकी तारीफे करने लगे। फिल्म दुनिया की सबसे उम्रदराज़ शार्पशूटर चन्द्रो तोमर और प्रकाशी तोमर की ज़िन्दगी पर बनी एक बायोपिक है जिन्हें शूटर दादी के नाम से भी जाना जाता है।

हर कोई तापसी और भूमि की प्रशंसा कर रहा है लेकिन यहाँ इतनी सराहना का एक और कलाकार लायक है और वो है फिल्म के निर्देशक तुषार हीरानंदानी। तुषार एक अनुभवी लेखक है लेकिन इस फिल्म के साथ वह निर्देशन की दुनिया में कदम रख रहे हैं। फिल्म को शुरुआत से ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा था और ऐसा भी वक़्त आया था जब फिल्म बंद हो गयी थी। हालांकि, अनुराग कश्यप और निधि परमार द्वारा निर्मित फिल्म फिर शुरू हुई और दिवाली पर रिलीज़ होने के लिए तैयार है।

निर्देशक तुषार ने साझा कि उन्होंने शूटर दादी पर फिल्म बनाने का कैसे फैसला किया। उनके मुताबिक, “मैंने उन्हें आमिर खान के ‘सत्यमेव जयते’ पर देखा था। मेरी आँखों में आंसू आ गए थे जब चन्द्रो दादी ने कहा-‘तन बुड्ढा होता है, मन बुड्ढा नहीं होता है’। मैंने निधि को कहा कि मैं उनकी कहानी दुनिया को सुनाऊंगा।”

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What’s cooking Jiji ??? 😉 #SaandKiAankh

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“मैंने हर शैली का आनंद लिया है और मैंने सभी के बारे में लिखकर लुत्फ़ उठाया है। अब ‘सांड की आंख’ की बात की जाये तो, ये बनाने के लिए आसान फिल्म नहीं थी। कास्टिंग एक बड़ी चुनौती थी। तापसी और भूमि इकलौती ऐसी अभिनेत्री हैं जिनमे हां कहने की हिम्मत थी। मुझे प्रोजेक्ट शुरू करने में चार साल लग गए।
अगर निधि को मुझ पर भरोसा नहीं होता तो मैंने हार मान ली होती। मैंने बालाजी [टेलीफिल्म्स] में अपनी अच्छी कमाई वाली नौकरी छोड़ दी थी और इस फिल्म को शुरू करने के लिए फिल्में लिखना बंद कर दिया था। उन्होंने पूरे वक़्त पैसो से मेरा समर्थन किया।”

 

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