शनिवार, अप्रैल 4, 2020

नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने राजनाथ सिंह को लिखा पत्र: राज्य पर नागरिकता बिल लागू नहीं हो सकता

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साक्षी बंसल
पत्रकारिता की छात्रा जिसे ख़बरों की दुनिया में रूचि है।

नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर कहा है कि नागरिकता विधेयक राज्य पर लागू नहीं है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 371 (ए) के तहत संरक्षित है।

रियो की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की बैठक ने शुक्रवार को इस बात पर जोर दिया कि राज्य, बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन 1873 के अनुसार अनुच्छेद 371 (ए) और इनर लाइन परमिट के तहत संरक्षित है।

इस अनुच्छेद के तहत नागालैंड के लिए कुछ विशेष प्रावधान मिले हैं। इसमें कहा गया है कि नागाओं की धार्मिक या सामाजिक परंपराओं, नागा प्रथाओं संबंधी कानून एवं प्रक्रिया, नागा प्रथा कानून के अनुसार फैसले लेने वाले नागरिक एवं आपराधिक न्याय के प्रशासन, भूमि एवं उसके संसाधनों के मालिकाना हक और हस्तांतरण से जुड़े मामलों पर संसद का कोई कानून तब तक लागू नहीं हो सकता, जब तक राज्य विधानसभा ऐसे निर्णयों के संबंध में प्रस्ताव पारित नहीं कर देती।

बैठक में नागरिकता विधेयक के नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा हुई। यह विधेयक आठ जनवरी को लोकसभा से पारित हो चुका है।

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर राज्य के लोगों की चिंताओं से अवगत कराया है। बैठक के दौरान राज्य की कैबिनेट ने केंद्र सरकार से यह अपील करने का निर्णय लिया कि वह सभी पूर्वोत्तर राज्यों के साथ विचार विमर्श कर यह सुनिश्चित करे कि इन राज्यों के मूल निवासियों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।

पत्र में कहा गया है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक, भले ही अधिनियमित हो, नागालैंड के अनुच्छेद 371 (ए) के मद्देनजर लागू नहीं होगा, जो कि नागों के जीवन के तरीके को किसी भी संसद अधिनियमन द्वारा हस्तक्षेप ना करने की गारंटी देता है, जब तक कि विधान सभा द्वारा एक संकल्प द्वारा ये तय ना करले।

नागरिकता विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आये हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को भारत में छह साल निवास करने के बाद किसी दस्तावेज बिना भी नागिरकता दिये जाने का प्रावधान है। फिलहाल ऐसे लोगों को 12 वर्ष भारत में निवास करने के बाद नागरिकता दिये जाने का प्रावधान है।

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