नशीली दवाईयों का दुरूपयोग

drug abuse


अफीम (opoid), गांजा (cannabinoids), कोका अल्कलॉइड आदि कुछ नशीली दवाइयां हैं जिनका काफी दुरूपयोग किया जाता है। इनमे से ज्यादातर दवाइयां फूलदार पौधों के द्वारा बनाया जाता है और कुछ कवक (fungi) से भी बनाए जाते हैं।

अफीम

अफीम दवाई लेने पर वह शरीर में मौजूद केंद्रीय स्नायु तंत्र (central nervous System) के कुछ रिसेप्टर को और जठरांत्र पथ (gastrointestinal tract) को प्रभावित करती है।

हेरोइन

हेरोइन जिसको स्मैक कहा जाता है उसका केमिकल नाम diacetylmorphine है, एक अन्य नशीली दवाई है। यह सफ़ेद रंग का, बिना गंध वाला और स्वाद में कड़वा एक crystaline यौगिक है। यह मॉर्फिन के एसिटिलीकरण से प्राप्त होता है। मॉर्फिन का उद्धरण पोस्ता (poppy) नामक पौधे से किया जाता है। नशे के आदी इसे सूंघकर या इंजेक्शन के द्वारा लेते हैं। हेरोइन के कारण अवसाद होता है और शरीर का कार्य प्रणाली धीमा हो जाता है।

गांजा

गांजा एक प्रकार के केमिकल होते हैं, जो दिमाग के रिसेप्टर को प्रभावित करते हैं। प्राकृतिक रूप से गांजा इसी नाम के पौधे के पत्तों से बनाए जाते हैं। पत्तों के अलावा इसके पौधे, अर्क आदि हशीश, चरस, मारिजुआना आदि दवाई बनाने के काम आते हैं। यह सूंघ कर और खाकर लिए जाते हैं एवं हृदय और रक्तवाहिका तंत्र को प्रभावित करते हैं। आजकल कई जानेमाने खिलाडी भी इसका उपयोग करते हुए पकडे गए हैं।

कोकीन

कोकीन दक्षिणी अमेरिका के एक कोका पौधे Erythroxylum कोका से प्राप्त होती है। यह डोपामाइन नामक हॉर्मोन को प्रभावित करने का काम करता है। कोकीन को कोक या क्रैक भी कहा जाता है और यह सूंघ कर लिया जाता है। यह केंद्रीय स्नायु तंत्र को काफी हद तक प्रभावित करता है। इसको लेने के बाद पीड़ित को उत्साह और ऊर्जा में संचार होता हुआ महसूस होता है। अधिक मात्रा में लेने पर बौखलाहट होने लगती है।

कुछ अन्य दवाई एवं उनके प्रभाव

  • Altropa Belladrona नामक पौधे से बने नशीले पदार्थ से भी बौखलाहट होती है।
  • Lysergic acid diethyl amides (LSD), benzodiazepines, barbiturates और ऐसे कई प्रकार की दवाइयां हैं जो मानसिक रोगियों (जैसे डिप्रेशन, अनिद्रा आदि के शिकार) के इलाज में उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इनका काफी ज्यादा दुरूपयोग हो रहा है।
  • कई पौधे, फल, फूल, बीज आदि ऐसे रहे हैं जो प्राचीन काल से परम्परागत चिकित्सा, त्यौहार, खानपान आदि में उपयोग किए जाते रहे हैं। लेकिन जब इनका गलत इस्तेमाल होने लगता है और जरुरत से अधिक मात्रा में इनका सेवन किया जाता है तो किसी भी इंसान की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है।

तम्बाकू

धूम्रपान भी एक ऐसा साधन है जिससे किसी को नशा करने की आदत लग जाती है। तम्बाकू ऐसा ही एक नशीला पदार्थ है जो प्राचीन काल से उपयोग किया जाता रहा है। इसको लोग पीते हैं, चबाते हैं एवं सूंघ कर भी सेवन करते हैं। इसके अंदर कई प्रकार के केमिकल होते हैं जिनमे निकोटिन प्रमुख है, यह एक अल्कलॉइड है। निकोटीन अधिवृक्क ग्रन्धि (adrenal gland) में प्रवेश कर जाता है और एड्रेनाइल एवं नॉन एड्रेनाइल खून में रिहा कर देता है जो रक्तचाप और ह्रदय की धड़कन बढ़ाने का काम करता है।

धूम्रपान करने के कारण फेफड़ा, मूत्राशय आदि के कैंसर, ब्रोचाइटिस, ह्रदय की बीमारियां आदि होने की सम्भावना कई गुना तक बढ़ जाती है।

तम्बाकु के चबाने से मुख के कैंसर होने की सम्भावना रहती है। धूम्रपान करने से खून में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है जिससे खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने लगती है। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है।

धूम्रपान और तम्बाकु चबाने के हानि को जानते हुए भी लोगों में नशे की लत देखी जाती है। यह जरुरी है कि बूढ़े एवं जवान दोनों इसके हानि को समझें और इस आदत को छोर दें। अगर किसी को लत छुड़ानी है तो उसे किसी विशेषज्ञ या मनोचिकित्सक से सहायता लेनी चाहिए।

दुरूपयोग का प्रभाव (Effect of Drug Abuse in Hindi)

ख़राब व्यव्हार, हिंसा, तोड़ फोड़ करना आदि कुछ प्रभाव हैं जो नशीले पदार्थ का सेवन करने के बाद सबसे पहले सामने आते हैं। अगर जरुरत से ज्यादा मात्रा में इन पदार्थों का सेवन कर लिया गया है तो उससे इंसान कोमा में पहुँच जाता है एवं श्वशन प्रणाली में समस्या होने के कारण तुरंत मृत्यु भी हो सकती है। इसके अलावा दिल का दौरा एवं ब्रेन हैमरेज जैसी घातक समस्या भी हो सकती है। अगर बहुत सरे नशीले पदार्थों को एक साथ ले लिया जाए एवं उसे शराब के साथ ले लिया जाए तो उससे भी तत्काल मृत्यु हो सकती है।

आजकल के युवाओं में नशीले दवाइयों के दुरूपयोग को लेकर कुछ प्रमुख लक्षण हैं – पढाई में ठीक से प्रदर्शन नहीं करना, स्कूल या कॉलेज से गायब रहना, अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखना, डिप्रेशन, लोगों से मेल जॉल कम कर देना, परिवार एवं दोस्तों के साथ सम्बन्ध ख़राब करना, सोने और खाना खाने की दिनचर्या में बदलाव आदि। कई युवा नशीले पदार्थ पाने के लिए अपराध पर भी उतरने लगे हैं। इससे सिर्फ पीड़ित पर ही बुरा प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि परिवार पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

कई लोग इंजेक्शन के द्वारा ड्रग लेते हैं। इससे एड्स एवं हेपेटाइटिस B जैसी बीमारियां होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है जो कभी ठीक न होने वाली बीमारियां हैं। यह स्नायु तंत्र और लिवर को भी पूरी तरह से ख़राब कर देता है।

इलाज एवं उपाय (Prevention & Control of Drug Abuse in Hindi)

आजकल यह देखा गया है कि कम उम्र से ही छात्र नशे के आदी बनते जा रहे हैं। अभिभावकों एवं शिक्षकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह युवाओं में हो रहे व्यव्हार परिवर्तन को पहचानें और उस हिसाब से उपाय करें।

छात्रों पर पढाई में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए ज्यादा दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उनको उनके विषय एवं रूचि के हिसाब से आगे बढ़ने देना चाहिए। हर छात्र में एक खूबी रहती है, अभिभावकों एवं शिक्षकों को बच्चों के रूचि को बढ़ावा देना चाहिए। अगर छात्र किसी बात को लेकर परेशान है तो वह दूसरों से सहायता लेने में झिझके नहीं। उसे अपना खानपान ठीक रखना चाहिए।

अगर परेशानी ज्यादा है तो विशेषज्ञों एवं मनोचिकित्सकों से परामर्श लें। ऐसे बहुत सारे डॉक्टर हैं जो छात्रों की इस प्रकार की समस्याओं को दूर करने में सक्षम हैं।

आप अपने सवाल एवं सुझाव नीचे कमेंट बॉक्स में व्यक्त कर सकते हैं।

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