सोमवार, फ़रवरी 24, 2020

नवीन पटनायक ने केंद्र सरकार पर ओड़िसा के साथ सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया लेकिन 2019 में समर्थन के सवाल पर साधी चुप्पी

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आदर्श कुमार
आदर्श कुमार ने इंजीनियरिंग की पढाई की है। राजनीति में रूचि होने के कारण उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने कई वेबसाइट पर स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। द इन्डियन वायर पर वो राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते हैं।

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को केंद्र पर ओडिशा के साथ सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया और केंद्रीय योजनाओं पर हमला किया, लेकिन सभी इस बात का अंदाजा लगाते रहे कि क्या 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजू जनता दल भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देगा।

बीजेडी के 21 वें स्थापना दिवस के अवसर पर ओडिया में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, पटनायक ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व सीएम बीजू पटनायक को ओडिशा के विकास के प्रति उनके दृष्टिकोण के लिए याद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा “बीजू बाबू सही थे। उन्होंने कहा था कि मुझे वित्तीय स्वायत्तता दी जाए और मैं ओडिशा को दक्षिण एशिया के शीर्ष राज्यों में से एक बना सकता हूं। मुझे कोई केंद्रीय सहायता या अनुदान नहीं चाहिए। मैं ओडिशा के अपने पैसे से ओडिशा का विकास करूंगा।”

भाजपा पर तीखे हमले करते हुए, पटनायक ने केंद्र से नौ सवाल किए और मोदी सरकार की योजनाओं का मजाक उड़ाया गया। उज्ज्वला योजना, जिसके तहत गरीबों के लिए गैस कनेक्शन, दूरसंचार कनेक्टिविटी योजनाएं, राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए योजनाओं को पूरा करने और प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना की धज्जियाँ उड़ा दी।

उन्होंने कहा “राउरकेला से कटक तक और संबलपुर तक यात्रा – कोई समस्या नहीं। यह एक बीजू एक्सप्रेसवे (एक राज्य सरकार की योजना) है। लेकिन संबलपुर के बाद से, या बारीपदा और देवघर के बीच, आप अपनी आँखें खोले बिना भी राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति को समझ सकते हैं। और हम अभी भी उस तटीय राजमार्ग की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसी तरह, बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड) एक बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है, लेकिन ओडिशा के आधे गाँवों में ऐसा नहीं है। आपको एक ऊंचे स्थान पर चढ़ना होगा या मोबाइल पर बात करने के लिए पेड़ पर चढ़ना सीखना होगा।”

पटनायक ने उज्जवला योजना का भी मजाक उड़ाया, जिसके तहत प्रधानमंत्री मोदी ने ओडिशा में 3 मिलियन मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन वितरित करने का दावा किया था। उन्होंने कहा “गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमत को देखते हुए कोई आपके दिए सिलिंडर को दुबारा नहीं भरवा रहा।”

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि “रेलवे में, परिवर्तन हुए हैं, लेकिन केवल प्लेटफॉर्म और ट्रेन टिकटों की दरों में। खुरदा-बोलनगीर रेलवे लाइन, जिसके लिए राज्य सरकार आधी लागत वहन कर रही है, अभी काम नहीं हुआ है। किसानों को नहीं, निजी बीमा कंपनियों को फासल बीमा योजना का लाभ मिल रहा है। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को समर्थन देने का पैसा रोक दिया गया है। एससी / एसटी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का पैसा भी दो साल पहले रोक दिया गया था।”

24 दिसंबर को मोदी के ओड़िसा दौरे के दौरान पटनायक ने प्रधानमंत्री के साथ मंच साझा किया था और गपशप करते हुए मुस्कुराते-ठहाके लगाते नज़र आये। जिससे कांग्रेस को ये अंदेशा हुआ कि इनके बीच कुछ खिचड़ी पक रही है।

ममता बनर्जी और चन्द्रबाबू जैसे मुख्यमंत्रियों से इतर ओड़िसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और मोदी या भाजपा के रिश्तों में कभी तल्खी देखने को नहीं मिली। 2009 में बीजेडी और भाजपा गठबंधन टूटने के बाद भी कभी भाजपा और बीजेडी नेताओं को एक दुसरे के खिलाफ बयानबाजी करते नहीं देखा गया।

ओड़िसा के राजनितिक विश्लेषक मानते हैं  कि पटनायक, एनडीए को समर्थन करने का विकल्प खुला रखना चाहते हैं अगर एनडीए बहुमत से दूर रह जाती है तो।

पिछले साढ़े चार सालों के मोदी सरकार के कार्यकाल में एक भी ऐसा मौका नहीं आया कि पटनायक ने मोदी सरकार या मोदी के नेतृत्व की आलोचना की हो। जब सारे विपक्षी दल नोटबंदी की आलोचना में व्यस्त थे, पटनायक ने उस पर कुछ नहीं कहा। चाहे जीएसटी हो या राफेल, पटनायक हमेशा चुप रहे। भाजपा के राष्ट्रपति उम्मीदवार राम नाथ कोविंद को भी समर्थन दिया और जब संसद में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो सदन से वाक आउट कर के बीजेडी सांसदों ने भाजपा की मदद की।

बाकी क्षेत्रीय दलों के मुख्यमंत्रियों के अलावा पटनायक ने कभी प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी महत्वकांक्षा जाहिर नहीं की और न कभी विपक्षी या फेडरल फ्रंट बनाने की कोशिश की। इसलिए भी पटनायक को भाजपा के करीबी के तौर पर देखा जाता है।

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