नरेंद्र मोदी के दुसरे कार्यकाल में मध्य प्रदेश का बढ़ा रुतबा

नरेंद्र मोदी

भोपाल, 13 जून (आईएएनएस)| केंद्र की सत्ता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दूसरी बार काबिज होने के बाद मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का राजनीतिक रुतबा लगातार बढ़ रहा है। राज्य से नाता रखने वाले जहां पांच सांसदों को केंद्रीय मंत्री बनाया गया है, वहीं अन्य जिम्मेदारियां राज्य के नेताओं के हिस्से में आ रही हैं।

राज्य की सत्ता से भाजपा को 15 साल बाद दिसंबर 2018 में मतदाताओं ने बाहर कर दिया था, तो मई में हुए लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने फिर भाजपा पर विश्वास जाहिर किया है। लोकसभा चुनाव की 29 में से 28 सीटों पर भाजपा को जीत मिली, जो पिछले चुनाव से कहीं ज्यादा है। भाजपा को वर्ष 2014 के चुनाव में यहां से 27 सीटें मिली थीं। भाजपा को राज्य में मिली सफलता के एवज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर पुरस्कार देने का सिलसिला जारी रखा है।

प्रधानमंत्री मोदी की टीम में मध्य प्रदेश से नरेंद्र सिंह तोमर, थावरचंद गहलोत, धर्मेंद्र प्रधान, प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते को स्थान दिया गया। तोमर, गहलोत और प्रधान कैबिनेट, पटेल स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री और कुलस्ते राज्यमंत्री बनाए गए। प्रधान हैं तो ओडिशा के, मगर राज्य से राज्यसभा सदस्य हैं।

लोकसभा का सत्र शुरू होने से पहले टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक को प्रोटेम स्पीकर बनाने का निर्णय लिया गया है। डॉ. खटीक सातवीं बार सांसद बने हैं। वहीं, राज्यसभा सदस्य थावरचंद गहलोत को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने के साथ राज्यसभा में पार्टी का नेता बनाया गया है।

संभवत: गहलोत राज्य के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्हें केंद्रीय राजनीति में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है। इससे पहले गहलोत राज्य सरकार में 1990 से 1992 तक मंत्री रहे। वह तीन बार लोकसभा सदस्य रहे। वह दूसरी बार राज्यसभा के सदस्य बने हैं। पिछली सरकार में गहलोत सामाजिक न्याय मंत्री थे।

इसी तरह भाजपा द्वारा संसदीय दल में राज्य के पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को संसदीय दल कार्यालय का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मिश्रा का कहना है, “विधानसभा चुनाव में जहां राज्य की जनता ने भाजपा को नकारा था, वहीं लोकसभा चुनाव में भरपूर समर्थन दिया है। पार्टी भी इस बात को जानती है कि राज्य की जनता को संतुष्ट करने का तरीका सिर्फ नेताओं को महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंपना है। इसके पीछे पार्टी की मंशा आगामी दिनों की रणनीति को सफल बनाने की है। राज्य में कांग्रेस की सरकार को लेकर जनता में भ्रम है और भाजपा इस भ्रम को और पुख्ता करके अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहती है। ताकि मौका मिले तो जनता के बीच यह संदेश न जाए कि भाजपा ने सरकार गिराई है।”

राज्य में प्रदेश की सरकार को गिराने के भाजपा की ओर से कई नेताओं के बयान आते रहे हैं। राज्य की विधानसभा में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं है। 230 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास 114 विधायक, भाजपा के 108 विधायक, बसपा दो, सपा एक और चार निर्दलीय हैं। एक सीट अभी हाल ही में खाली हुई है, क्योंकि झाबुआ से भाजपा विधायक जी. एस. डामोर लोकसभा के चुनाव में निर्वाचित हुए हैं। भाजपा आने वाले दिनों में राज्य सरकार को अस्थिर करने का अभियान चला सकती है और उसके लिए राज्य के नेताओं का मजबूत होना जरूरी है। इसी के तहत केंद्र की सरकार और संगठन में स्थानीय नेताओं को महत्व मिल रहा है।

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