शुक्रवार, नवम्बर 22, 2019

एमएस धोनी के महत्व को कभी कम मत समझो: माइकल क्लार्क ने भारत की श्रृंखला हार के बाद आलोचकों को जवाब देते हुए कहा

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अंकुर पटवाल
अंकुर पटवाल ने पत्राकारिता की पढ़ाई की है और मीडिया में डिग्री ली है। अंकुर इससे पहले इंडिया वॉइस के लिए लेखक के तौर पर काम करते थे, और अब इंडियन वॉयर के लिए खेल के संबंध में लिखते है

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच वनडे मैचो की सीरीज के शुरुआती दो वनडे मैच जीतने के बाद, भारतीय क्रिकेट टीम को आखिरी के तीन वनडे मैचो में हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम ने कई भारतीय क्रिकेट प्रशंसक हैरान रह गए क्योंकि 50 ओवर के क्रिकेट में यह विराट कोहली के नेतृत्व में घर में भारत की पहली वनडे सीरीज हार थी। भारत की इस हार के कई  कारक सामने आ रहे है, सबसे बड़ा कारण अंतिम दो मैचो में एमएस धोनी की अनुपस्थिति थी। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क द्वारा भी इस पर प्रकाश डाला गया है।

यह शीर्ष पर शुरुआत हो या मध्य में दृढ़ संकल्प हो, भारतीय बल्लेबाजी क्रम इस अवसर पर उठने में नाकाम रहा और इसके लिए आवश्यक परिणाम हासिल नहीं किया। ट्विटर पर एक प्रशंसक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्तमान भारतीय मध्य क्रम में युवराज सिंह जैसे खिलाड़ी की कमी है, जो 2011 के विश्व कप में धोनी के साथ थे।

इस फैन का जबाव देते हुए, क्लार्क ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मध्य क्रम में भारत के लिए धोनी का कारक कितना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से विश्व कप पर विचार करना और आलोचकों को 37 वर्षीय को कम आंकने के खिलाफ चेतावनी दी। यह शायद उनकी अनुपस्थिति है जो इस श्रृंखला के मध्य क्रम में स्थिरता से भारत को रहित करती है।

एक बल्लेबाज के रुप में ही नही, धोनी एक विकेटकीपर और एक सहयोगी लीडर के रूप में भी टीम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कुलदीप यादव, जो शुरुआती तीन वनडे मैचो में धोनी के साथ रणनीति बनाकर बल्लेबाजो को आउट करते हुए नजर आए थे। वह धोनी की अनुपस्थिति में चौछे और पांचवे वनडे में बहुत महेंगे साबित हुए है।

कुलदीप यादव की गेंदबाजी में माही का प्रभाव साफ-साफ दिखता है क्योंकि उन्होने धोनी के साथ खेले 40 मैचो में 87 विकेट अपने नाम किए है। और जब धोनी मैच खेलने के लिए उपलब्ध नही होते है तो उन्होने 4 मैच में केवल 2 विकेट लिए है।

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