दक्षिणी चीनी सागर के विकास को रोक रहा चीन: अमेरिकी सलाहकार माइक पोम्पिओ

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माइक पोम्पिओ
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अमेरिका के राज्य सचिव माइक पोम्पिओ ने चीन पर आरोप लगाया कि वह आसियान के सदस्यों की दक्षिणी चीनी सागर तक पंहुच को प्रतिबंधित कर रहा है। दक्षिणी चीनी सागर में 2.5 ट्रिलियन डॉलर के ऊर्जा संसाधन मौजूद है और चीन की वहां अवैध निर्माण गतिविधियां चल रही है।

चीन समस्त दक्षिणी चीनी सागर में अपने आधिपत्य का दावा करता है। उन्होंने कहा कि “अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग पर चीन के अवैध द्वीप का निर्माण सिर्फ सुरक्षा से जुड़ा मसला नहीं है। आसियान के सदस्यों को चीन 2.5 ट्रिलियन डॉलर की ऊर्जा भंडार से वंचित रखना चाहता है।”

उन्होंने कहा कि “अमेरिकी सरकार साउथ ईस्ट एशियन नेशनस के लिए ऊर्जा सुरक्षा का प्रचार कर रही है। यह वैश्विक ऊर्जा वाले देशों के नेताओं की सबसे बड़ी बैठक होगी। हम चाहते हैं कि उस क्षेत्र में स्थित देशों की भी अपनी ऊर्जा तक पंहुच हो। हम उनकी मदद करना चाहते हैं। हम साझेदारी बनाना चाहते हैं। हम पारदर्शी ट्रांसक्शन्स चाहते हैं कोई कर्ज का जाल नहीं। लेकिन चीन ऐसे ही नियमों को नहीं बनाना चाहता है।”

माइक पोम्पिओ ने कहा कि “चीन के मूल्य भिन्न है। अब अफ्रीका में विविधता को देखिये, चीन ने अपने मज़दूरों को वहां भेजा। चीनी कर्मचारियों के लिए रोजगार का सृजन किया न कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए कुछ किया। वह कर्ज के जाल का इस्तेमाल उन देशों को ऐसे स्थान पर लाने के कर रहा है जहां कमर्शियल ट्रांसक्शन न हो। जिस देश में चीन सक्रिय है वह वहां अपना राजनितिक प्रभुत्व कायम करना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि “रूस की कहानी हम सभी को मालूम है। यूक्रेन को रूस गैस और तेल के भण्डार से दूर रखना चाहता है। वह यूक्रेन पर राजनीतिक दबाव बनाता है।”

युक्रेन और रूस के मध्य साझा जल मार्ग के इस्तेमाल को लेकर जंग चीन छिड़ी हुई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेनको ने रुस को जंग की धमकी दी थी और कहा कि रूस लगातार साझे जलमार्ग में सैन्य बल को बढाता जा रहा है। इससे दोनों राष्ट्रों के मध्य भयावह जंग के आसार बढ़ रहे हैं। रूस के साल 2014 में क्रीमिया में अधिग्रहण के बाद दोनों राष्ट्रों के मध्य विवाद शुरू हो गया था।

चीन नें किया पलटवार

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग नें अमेरिका के आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें निराधार बताया है।

कांग नें बुधवार को बीजिंग में बताया कि चीन नें दक्षिण एशिया के देशों के साथ मिलकर दक्षिणी चीन सागर के मुद्दों को सुलझाना शुरू कर दिया है।

कांग नें अमेरिका को ‘बाहरी’ देश बताया और कहा कि प्रभावित देश इस मसले का हल निकाल लेंगे।

कांग के शब्दों में, “इस इलाके के देश इस प्रकार के मसलों को सुलझाने में सक्षम हैं। बाहर के देशों को ऐसे मुद्दों से दूर रहना चाहिए जिससे क्षेत्र की संप्रभुता पर कोई असर पड़े।”

लू नें अपने बयान में बार-बार अमेरिका का जिक्र करते हुए उसे ‘बाहरी’ देश बताया।

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