Wed. Oct 5th, 2022

    भारत सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी कर दिए हैं। अप्रैल के 10.49 फीसदी के मुकाबले मई में यह रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई है। महंगे ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण मई में मुद्रास्फीति 12.94 फीसदी रही। पिछले साल की समान अवधि यानी मई 2020 में यह (-) 3.37 फीसदी थी। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में तेजी का यह लगातार पांचवां महीना है।

    निचले आधार प्रभाव के चलते भी मई 2021 में डब्ल्यूपीआई मु्द्रास्फीति तेजी से बढ़ी। इस संदर्भ में वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि, ‘मासिक डब्ल्यूपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर मई 2021 (मई, 2020 के मुकाबले) में बढ़कर 12.94 फीसदी हो गई, जो मई 2020 में ऋणात्मक 3.37 फीसदी थी।’

    बयान के मुताबिक, ‘मई 2021 में मुद्रास्फीति की उच्च दर मुख्य रूप से कम आधार प्रभाव और पेट्रोल, डीजल, नेफ्था, फर्नेस ऑयल आदि पेट्रोलियम उत्पादों और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में पिछले वर्ष के समान महीने की तुलना में वृद्धि के कारण है।’

    मई, 2021 में फ्यूल और पावर बास्केट में थोक महंगाई दर में 37.61 फीसद का उछाल दर्ज किया गया। अप्रैल में इन दोनों सेक्टर्स में मुद्रास्फीति 20.94 फीसद की तेजी दर्ज की गई। मई, 2021 में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में थोक महंगाई दर में 10.83 फीसद की बढ़त देखने को मिली।

    मंत्रालय ने कहा है, ”मई, 2021 में उच्च महंगाई दर की मुख्य वजह लो बेस इफेक्ट के साथ क्रूड पेट्रोलियम, मिनरल ऑयल, पेट्रोल, डीजल इत्यादि और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स के मूल्य में तेजी से मई, 2021 में महंगाई में काफी तेज दर से वृद्धि दर्ज की गई।”

    हालांकि, प्याज की कीमतों में उछाल के बावजूद खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर मई, 2021 में मामूली नरमी के साथ 4.31 फीसद पर रही। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को रिकॉर्ड निचले स्तर पर बरकरार रखा। इसके साथ ही नीतिगर रुख को भी उदार बनाए रखा।

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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