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तालिबान ने हेरात और गजनी जैसे प्रमुख शहरों पर किया कब्जा

एक सरकारी वार्ता सूत्र ने गुरुवार को कहा कि कतर में अफगान सरकार के वार्ताकारों ने लड़ाई को समाप्त करने के बदले तालिबान को सत्ता-साझाकरण सौदे की पेशकश की है। सूत्र ने कहा कि “हां, सरकार ने कतर के मध्यस्थ से तालिबान को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। प्रस्ताव तालिबान को देश में हिंसा रोकने के बदले में सत्ता साझा करने की अनुमति देता है।

तालिबान ने काबुल से महज 150 किलोमीटर दूर रणनीतिक शहर गजनी पर गुरुवार को कब्जा कर लिया। बाद में उसी दिन में तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने अफगानिस्तान के तीसरे सबसे बड़े शहर हेरात पर कब्जा कर लिया है।

अभी तक 11 प्रांतीय राजधानियों पर कब्ज़ा

एक हफ्ते में आतंकियों ने 11 प्रांतीय राजधानियों को अपने कब्जे में ले लिया है। आंतरिक मंत्रालय ने गजनी पर तालिबान के कब्ज़े की पुष्टि की। यह शहर प्रमुख काबुल-कंधार राजमार्ग के साथ स्थित है और दक्षिण में राजधानी और उग्रवादी गढ़ों के बीच प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। प्रवक्ता मीरवाइस स्टानिकजई ने मीडिया को एक संदेश में कहा “दुश्मन ने गज़नी पर अपना नियंत्रण कर लिया।” बाद में उन्होंने बताया कि शहर के गवर्नर को अफगान सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार इस बात से नाराज थी कि प्रांतीय प्रशासन ने कैसे आत्मसमर्पण किया।

जैसे ही सुरक्षा बल देश भर में पीछे हटे काबुल ने तालिबान वार्ताकारों को सत्ता साझा करने का प्रस्ताव सौंप दिया। एक वार्ताकार गुलाम फारूक मजरोह ने कहा कि तालिबान को अधिक विवरण प्रदान किए बिना “शांति की सरकार” के बारे में एक प्रस्ताव दिया गया है। मई के बाद से अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष बढ़ गया है जब अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं ने 20 साल के बाद इस महीने के अंत में सेना की वापसी का अंतिम चरण शुरू किया था।

अमेरिका का फैसला बदलने का नहीं कोई इरादा

लेकिन व्हाइट हाउस, पेंटागन या अमेरिकी जनता के बीच इस संघर्ष को रोकने की कोशिश करने की कोई इच्छा नहीं है और शायद ऐसा करने में बहुत देर भी हो चुकी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका पिछले साल में किए गए निर्णय को उलटने का कोई इरादा नहीं है भले ही परिणाम तालिबान के अधिग्रहण की ओर इशारा करता हो। अधिकांश अमेरिकी सैनिक अब अफ़ग़ानिस्तान से चले गए हैं और तालिबान अपने युद्ध के मैदान में तेजी ला रहा है। वहीं अमेरिकी सैन्य नेता उस पर अपना विचार बदलने के लिए दबाव नहीं डाल रहे हैं। वे जानते हैं कि राष्ट्रपति के लिए एकमात्र महत्वपूर्ण विकल्प उस युद्ध को फिर से शुरू करना होगा जिसे उन्होंने पहले ही समाप्त करने का फैसला किया था।

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आदित्य सिंह

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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