Tue. Apr 16th, 2024
    कमल हासन हिंदुत्व बयान

    तमिलनाडु देश का एकलौता ऐसा राज्य है जहाँ राजनेताओं से ज्यादा अभिनेताओं की चलती है। पिछले 5 दशकों से तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेताओं का बोलबाला रहा है फिर चाहे वो रामाचन्द्रन हो, जयललिता हो या फिर विजयकांत हो। एम जी रामाचन्द्रन के सक्रिय राजनीति में आने से शुरू हुआ यह सिलसिला आज कमल हासन तक आ पहुँचा है। खबर मिली है कि दक्षिण के लोकप्रिय सितारे और अनुभवी कलाकार कमल हासन सितम्बर महीने के अंत तक अपनी नई पार्टी के गठन की घोषणा कर सकते हैं। तमिलनाडु की राजनीति के मौजूदा हालात अभी स्थिर नहीं है। ऐसे में कमल हासन की निगाहें नवंबर महीने में तमिलनाडु में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों पर टिकी हैं। निकाय चुनावों में उनकी नई पार्टी के उतरने की उम्मीद है जिससे वह जमीनी स्तर तक पहुँच कर लोगों का समर्थन जुटा सकें।

    सत्ताधारी दल एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके दो धड़ों में बँट गई थी और दोनों के बीच सत्ता की खींचतान मची हुई थी। हाल ही दोनों धड़ों का विलय हुआ है लेकिन दिनाकरन और उनके समर्थन में 19 विधायकों ने फिर बगावत के सुर छेड़ दिए हैं। ऐसे में कमल हासन के लिए अपनी नई पार्टी की शुरुआत करने का यह बिल्कुल सही समय है। कमल हासन के करीबी सूत्रों ने कहा है कि दशहरा या गाँधी जयंती के समय कमल हासन नई पार्टी के गठन की घोषण कर सकते हैं। अभी पार्टी के गठन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और शीघ्र ही इसकी घोषणा हो सकती है। अभी कमल हासन ने अपने समर्थक नेताओं को पूरे विवरण से अवगत नहीं कराया है पर वह निश्चित तौर पर निकाय चुनावों से पहले ही पार्टी गठित कर लेंगे।

    बैठकों में व्यस्त हैं कमल हासन

    कमल हासन आजकल लगातार बैठकों में व्यस्त हैं। कमल हासन अभी हाल ही में केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन से मिले थे। माना जा रहा है कि तमिलनाडु के सत्ताधारी दल एआईएडीएमके और विपक्षी दल डीएमके के गठबंधन करने से पहले ही कमल हासन अपनी पार्टी के गठन की घोषणा कर सकते हैं। तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश करने के लिए यह महत्वपूर्ण समय है। कमल हासन का मानना है कि जयललिता के निधन के बाद से तमिलनाडु का सियासी फलक सूना पड़ा हुआ है। राजनीति से जुड़े अपने हालिया कुछ बयानों पर मिले जनता के समर्थन से वह अभिभूत नजर आ रहे हैं। फिलहाल कमल हासन अपने समर्थक नेताओं और राजनीतिज्ञों के साथ मिलकर अपनी पार्टी के गठन का सियासी खाका खींचने में लगे हुए हैं।

    वामपंथी विचारधारा की तरफ है झुकाव

    कमल हासन का झुकाव वामपंथी विचारधारा की तरफ है। अपने हालिया बयानों में उन्होंने इसे स्पष्ट भी कर दिया है। कमल हासन ने हाल ही में भाजपा पर तंज कसते हुए कहा था कि आपने मेरे बहुत से रंग देखे होंगे पर यह निश्चित है कि भगवा मेरा रंग नहीं है। कमल हासन इससे पहले भी कई बार मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं। बीते 1 सितम्बर को कमल हासन ने केरल जाकर मुख्यमंत्री पी विजयन से मुलाकात की थी। आगामी 15 सितम्बर को कमल हासन चेन्नई में अपनी भविष्य की योजनाओं का निर्धारण करने के लिए एक बैठक करेंगे। इसके पश्चात वह 16 सितम्बर को कोझिकोड में पी विजयन और सीपीएम के वरिष्ठ नेताओं संग एक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इसके बाद ही कमल हासन के अगले कदम के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

    सत्ता की भूख नहीं

    कमल हासन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें ताजपोशी या सत्ता की चाह नहीं है। उन्होंने कहा है कि वह राजनीति में अहम भूमिका निभाना चाहते हैं और लोगों की सेवा करना चाहते हैं। उन्होंने तमिल अभिनेता विजयकांत जैसे कद की राजनीति करने से भी साफ़ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह सत्ता में आने या प्रमुख विपक्षी दल बनने के लिए नहीं बल्कि लोगों की सेवा के लिए राजनीति से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज की भलाई से जुड़ी कुछ चीजे ऐसी होती हैं जिस पर सिर्फ राजनीति का नियंत्रण होता है। उन चीजों को पूरा करने के लिए उन्हें राजनीति में आने की जरुरत महसूस हुई है।

    रजनीकांत को लेकर भी उठी थी अफवाहें

    कमल हासन से पूर्व सुपरस्टार रजनीकांत के राजनीति में आने की खबरें थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रजनीकांत की नजदीकियां जगजाहिर हैं और ऐसे में यह माना जा रहा था कि रजनीकांत अपनी नई पार्टी का गठन कर भाजपा के साथ गठबंधन कर लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रजनीकांत कई मंचों पर साथ नजर आ चुके हैं और रजनीकांत ने कई मुद्दों पर मोदी सरकार की नीतियों का समर्थन भी किया है। चर्चा तो यह भी थी कि भाजपा, रजनीकांत और एआईएडीएमके के साथ मिलकर गठबंधन करना चाहती है ताकि तमिलनाडु से बाकि पार्टियों का सूफड़ा साफ हो जाए। लेकिन अब तक रजनीकांत ने सक्रिय राजनीति में कदम रखने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। अब कमल हासन के राजनीति में आने के लिए अपना रुख स्पष्ट करने के बाद यह मुमकिन है कि रजनीकांत भी कोई निर्णायक कदम उठाए।

    By हिमांशु पांडेय

    हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है।मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।