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यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रैक के प्रारूप में बदलाव करेगी भारतीय रेलवे

भारतीय रेलवे

भारतीय रेलवे ने अपने यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करने की ज़िम्मेदारी को अब गंभीरता से लिया है।

फाइनेंसियल एक्सप्रेस के मुताबिक पिछले 5 सालों के भीतर घटे कुल 659 रेल हादसों में से 56 प्रतिशत रेल हादसों की मुख्य वजह रेलगाड़ी का पटरी पर से उतर जाना रहा है।

इसी के चलते कई बार रेलवे की पटरी संबन्धित प्रणाली को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं, लेकिन भारतीय रेलवे अब रेल पटरी के दृष्टिकोण से सुरक्षा को पुख्ता करने का निश्चय कर चुका है। इसी क्रम में रेलवे ने वर्ष 2017-18 में 4,405 किलोमीटर पटरी का नवीनीकरण हुआ था, जिसकी वजह से रेल हादसों की घटना में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।

रेलवे के इस कदम से करीब 13 हज़ार यात्री ट्रेनों को लाभ मिलेगा। यह सभी ट्रेनें कुल 67 हज़ार किलोमीटर लंबे ट्रैक पर दौड़ती हैं। रेलवे अपनी इस योजना के तहत पहले मुख्य रेलमार्गों पर यह काम 2020 तक पूरा कर लेगा, वहीं पूरे भारत में यह कम 2024 तक पूरा होने की उम्मीद है।

इसी क्रम में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) व जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) ने कहा है कि “रेलवे को इस काम के लिए बड़ी मात्र में रेल पटरी की जरूरत पड़ेगी, ऐसे में हमें टेंडर के लिए तैयार रहना चाहिए।”

मालूम हो कि वर्तमान में भारतीय रेलवे को रेल पटरी उपलब्ध कराने का काम सेल के पास है, लेकिन यदि सेल इसकी पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं कर पता है, तब जेएसपीएल बची मात्र की पूर्ति करेगा।

वहीं रेलवे पिछले 40-50 सालों से कंक्रीट वाले स्लीपर का इस्तेमाल करता आ रहा है, लेकिन अब रेलवे उनकी जगह ‘ग्रीन कम्पोजिट स्लीपर‘ का उपयोग करने जा रहा है। रेलवे ने बताया है कि अगले साल तक लगभग सभी ट्रैक में रेलवे स्लीपर का बदलाव कर लिया जाएगा।

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प्रियाँन्शु

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