Mon. Jul 22nd, 2024

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार पर बैकलॉग के तहत कराह रहे ट्रिब्यूनल में नियुक्तियों के लिए “चेरी-पिकिंग” कर के नाम लेने का आरोप लगाया। बेंच ने कहा कि लंबे समय से लंबित रिक्तियों से इसका महत्त्व लगभग समाप्त हो गया है।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और एल. नागेश्वर राव ने सरकार के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने पर विचार करते हुए बाद के दो सप्ताह को “सभी न्यायाधिकरणों” में नियुक्तियां करने की अनुमति दी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है, तो हम आदेश पारित करेंगे।”

    सीजेआई ने न्यायाधिकरणों की स्थिति और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हजारों लोगों को “दयनीय” करार दिया। मामलों को महीनों तक के लिए स्थगित कर दिया जाता है। बेंच बनाने के लिए कोई जनशक्ति नहीं है। न्याय मांगने वालों को दूर-दराज के राज्यों की यात्रा करने के लिए कहा गया है जहां मामलों की सुनवाई के लिए कम से कम कुछ ट्रिब्यूनल सदस्य उपलब्ध हैं।

    इस पीठ ने अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल को इस बारे में बताया कि कैसे सरकार ने ट्रिब्यूनल के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों के साक्षात्कार और शॉर्टलिस्टिंग के साथ काम करने वाले सुप्रीम कोर्ट के जजों की अध्यक्षता वाली खोज-सह-चयन समितियों की कड़ी मेहनत के बाद भी कोई नतीजा निकलने नहीं दिया।

    सीजेआई ने कहा कि सरकार ने समिति द्वारा तैयार की गई अंतिम ‘चयन’ सूची में से कुछ नामों को चुना और फिर ‘प्रतीक्षा’ सूची से कुछ अन्य लोगों को नियुक्त किया।

    मुख्य न्यायाधीश रमना ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि, “मैंने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की चयन सूची देखी है। चयन समिति ने नौ न्यायिक सदस्यों और 10 तकनीकी सदस्यों की सिफारिश की। नियुक्ति पत्र चयन सूची में से अन्य को अनदेखा करते हुए तीन नामों और अन्य को प्रतीक्षा सूची से चुनने का संकेत देते हैं। सेवा कानून में आप चयन सूची को अनदेखा कर प्रतीक्षा सूची में नहीं जा सकते। यह कैसी नियुक्ति है?”

    श्री वेणुगोपाल ने उत्तर दिया, “लेकिन क्या सरकार के पास किसी को चुनने की शक्ति नहीं है?”

    सीजेआई ने जवाब दिया, “हम एक लोकतांत्रिक देश हैं जो कानून के शासन के तहत काम कर रहे हैं। इन समितियों की पवित्रता क्या है यदि वे नियुक्तियों की गारंटी नहीं दे सकती हैं?”

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *