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    जुलाई में सकल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) राजस्व संग्रह ₹1,16,393 करोड़ हो गया। वहीं जून में आठ महीनों में पहली बार यह ₹1 लाख करोड़ के निशान से नीचे फिसल गया था। केंद्र सरकार ने संग्रह को कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से तेजी से आर्थिक सुधार का संकेत बताया है। हालांकि अर्थशास्त्रियों ने कहा कि उन्होंने “अपूर्ण” तेज़ी का संकेत दिया।

    वित्त मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि “कोरोना ​​प्रतिबंधों में ढील के साथ, जुलाई 2021 के लिए जीएसटी संग्रह फिर से ₹1 लाख करोड़ को पार कर गया है, जो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि अर्थव्यवस्था तेज गति से ठीक हो रही है। आने वाले महीनों में भी मजबूत जीएसटी राजस्व जारी रहने की संभावना है।”

    जुलाई की संख्या में 1 से 5 जुलाई के बीच दाखिल किए गए जून के रिटर्न भी शामिल हैं जिसकी कुल राशि लगभग ₹ 4,937 करोड़ है। करदाताओं को दूसरी लहर के मद्देनजर जून के लिए देरी से रिटर्न दाखिल करने पर राहत दी गई थी।

    जुलाई संग्रह एक साल पहले की तुलना में 33% अधिक रहा है। वहीं माल के आयात में 36% की वृद्धि और सेवाओं के आयात सहित घरेलू लेनदेन में 32% की वृद्धि हुई है।

    आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि, “ यह एक खुश करने वाली क्रमिक वृद्धि है और साथ ही साथ साल-दर-साल वृद्धि भी हुई है। लेकिन जीएसटी संग्रह अप्रैल में दर्ज किए गए सर्वकालिक उच्च 1.41 लाख करोड़ के संग्रह से काफी नीचे है। हमारे विचार में यह एक और सबूत है कि जून 2021 में अनलॉकिंग प्रत्रिया शुरू होने की वजह से तेज़ी से संग्रह शुरू हो चूका है। इसके जुलाई में और मजबूत होने की उम्मीद है।”

    अधिकांश राज्यों ने जुलाई 2020 की तुलना में कर संग्रह में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण भिन्नताएं भी रहीं – ओडिशा और झारखंड ने 54% की वृद्धि दर्ज की, इसके बाद हरियाणा (53%) और महाराष्ट्र (51%) जबकि तमिलनाडु और गुजरात के संग्रह में 36% की वृद्धि हुई। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान (जिसमें क्रमशः 18%, 15% और 12% की वृद्धि दर्ज की गई) जैसे राज्यों की तुलना में सख्त कोरोना वायरस के प्रतिबंध होने के बावजूद केरल ने जीएसटी राजस्व में 27% की वृद्धि दर्ज की।

    अदिति नायर ने कहा कि, “जुलाई 2021 में राज्यों में विकास की गति अत्यधिक असमान थी, कुछ औद्योगिक राज्यों ने तेज विस्तार दर्ज किया।”

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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