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जुकाम के बेहतरीन आयुर्वेदिक इलाज और उपचार

जुकाम के आयुर्वेदिक इलाज

जुकाम एक वायरल बिमारी है जो मुख्य रूप से श्वास तंत्र में संक्रमण की वजह से होती है।

जुकाम के लिए बहुत से इलाज बताये गए हैं। लेकिन इनमें से आयुर्वेदिक इलाज काफी असरदार और बेहतर साबित हुआ है।

आयुर्वेदिक इलाज के बारे में अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक होते हैं। ऐसे में इनके दुष्प्रभाव होनें की बहुत कम संभावनाएं हैं।

जुकाम के बारे में क्या कहता है आयुर्वेद?

आयुर्वेद के जानकर कोप्पल के मुताबिक, ‘आयुर्वेद आपके भीतरी भावनाओं और आपके आत्म भावों को समझकर काम करता है। सरल भाषा में कहें, तो आयुर्वेद आपके शरीर की भाषा सुनता है, ना कि किसी चिकित्सक या अन्य व्यक्ति की। आयुर्वेद आपके शरीर की जरूरत को देखते हुए इलाज करता है।’

जुकाम के बारे में आयुर्वेद का कहना है कि जब किसी व्यक्ति को सर्दी लग जाती है और उसकी छाती में जमाव हो जाता है, तब यह जमाव ‘कफ’ होता है। इस ‘कफ’ को कम करने के लिए इंसान के ‘पित्त’ को बढ़ाना पड़ता है।

‘पित्त’ गर्मी होती है। तो गर्म भोजन हैसे अदरक, तुलसी आदि के सेवन से छाती में जमाव कम होता है और छाती हलकी हो जाती है। ‘कफ’ भोजन जैसे बर्फ आदि के सेवन से जमाव फिर बढ़ जाता है।

यहाँ हमनें जुकाम के लिए कुछ आयुर्वेदिक इलाज की जानकारी दी है।

जुकाम का आयुर्वेदिक इलाज

1. तुलसी, हल्दी और अदरक की चाय

इस मिश्रण का सेवन करने से आप बुखार, गले में खराश, झुकाम, जी मिचलाना और फ्लू जैसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं

आपको चाहे बैक्टीरिया से संक्रमण हुआ हो या वायरस से, यह मिश्रण सभी तरह के संक्रमण से निजात दिलाने के काबिल होता है। इससे इम्यून सिस्टम सशक्त होता है, पाचन सम्बन्धी समस्याएं आदि दूर होती हैं।

आप इसे सुबह बनाकर दिन भर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। 

कैसे इस्तेमाल करें?

बीमारी के प्रथम लक्षण दिखने पर इसका उपयोग शुरू कर दें। आप इसे 1-3 बार प्रतिदिन ले सकते हैं।

जब आपको बीमारी घेर लेती है तो हर 3-4 घंटे में 1 कप गर्म चाय अवश्य लें। शक्कर के स्थान पर शहद का इस्तेमाल करें क्योंकि बैक्टीरिया शक्कर से संक्रमण पैदा करते हैं।

हालांकि, ध्यान रखें कि शहद की मात्रा कम हो क्योंकि अधिक शहद जुकाम में नुक्सान करता है। 

2. लौंग की कली

यह उपाय बहुत ही मामूली लगता है लेकिन अत्यधिक उपयोगी होता है। इसमें एंटीवायरल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं। इन सभी गुणों के कारण ही यह गले की खराश से निजात पाने का सबसे उपयोगी उपाय है। 

कैसे इस्तेमाल करें?

जब आपको अत्यधिक खांसी आये तो 3 लौंग की कलियाँ लेकर अपने मुँह में डाल लें। जब तक इनका स्वाद खत्म न हो जाये तब तक इन्हें चूसते रहे। 

3. अदरक का रस

अदरक में एंटीमाइक्रोबियल, एंटीइंफ्लेमेटरी जैसे गुण होते हैं जिसके कारण यह बुखार आदि में आराम देने में सहायक होता है। यह संक्रमण से लड़ने में उपयोगी होता है इसलिए फ्लू में उपयोगी होता है। 

कैसे इस्तेमाल करें?

1/2 पाउंड अदरक के छोटे टुकड़े कर लें ताकि यह जूसर में आ सके। इसका जूस निकालकर हवाबंद डिब्बे में रख दें। इससे लगभग 1/2 अदरक का रस बन जायेगा। 1 बड़ा चम्मच जूस 1/2 कप गर्म पानी में मिला लें। बीमारी के दौरान इसे हर 3-4 घंटे में लें। 

4. अदरक-बेकिंग सोडा बाथ

किसी भी प्रकार की संक्रमित बीमारी से लड़ने का एक बहुत ही उच्च उपाय गर्म पानी से अपने शरीर की सिकाई करना होता है। इससे आपको पसीना भी आ जाता है जिससे आपके बुखार के तापमान में कमी आती है।

ये आपकी मांसपेशियों को आराम देता है और फ्लू के दौरान होने वाले दर्द से राहत देता है। ये आपकी श्वास नली को भी राहत देता है। 

कैसे इस्तेमाल करें? 

मध्यम गर्म पानी से टब भर लें। इसमें 1/3 अदरक का चूर्ण और 1/3 कप बेकिंग पाउडर डाल लें। लगभग 15 मिनट के लिए इस टब में रहे जब तक आपको पसीना न आ जाये।

यदि आपको श्वास की तकलीफ हैं तो आप इसमें युकलिप्टुस, पुदीने और स्वीट ऑरेंज जैसे आवश्यक तेल भी डाल सकते हैं।

अन्य उपाय

  • 1/4 चम्मच अदरक का चूर्ण 1/2 चम्मच हल्दी के चूर्ण के साथ मिला लें और इसमें शहद डालकर पेस्ट बना लें। इसे दिन में दो बार लें। 
  • 1 चम्मच पीसी हुई दालचीनी 1 कप पानी में डालकर उबाल लें। इसकी मात्रा आधी हो जाने तक इसे सिम पर उबालें, फिर इसे छानें और इसमें शहद डालकर इसे गर्म ही पी लें। 
  • 3-4 किशमिश को सूखा ही भून लें और इसमें चुटकी भर काली मिर्च और सेंधा नमक डाल लें। इसे 15-20 दिन तक दिन में 2-3 बार लें। 
  • 10-12 धुली हुई और पीसी हुई तुलसी की पत्तियां लें और इसमें 1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हुआ अदरक डाल लें। इसे धीमी आंच पर भून लें जब तक अदरक भूरा न हो जाये। इसमें 1 कप पानी डालकर कई मिनट तक उबालें। इसे छानकर इसमें शहद डालें और पी लें। 
  • गर्म पानी में थोडा नमक डालकर दिन में 2-3 बार गार्गल करें। 
  • 1-2 लौंग या इलाइची या कुछ किशमिश चबाकर खा लें। 
  • मेथी के दाने, हल्दी का चूर्ण, हल्दी का चूर्ण और अदरक के चूर्ण को समान मात्रा में मिला लें। इसका 1 चम्मच सुबह और 1 शाम को गर्म पानी के साथ लें। 
  • अदरक, काली मिर्च, लौंग, इलाइची, दालचीनी और हल्दी को 5-5 ग्राम लें। इन सभी को मिला लें। इसमें 30 ग्राम पीसी हुई चीनी डालें। आधा से 1 चम्मच चूर्ण शहद के साथ मिला लें और इसका सेवन कर लें। 
  • 1/2 चम्मच मुलैठी का चूर्ण, 1/4 चम्मच पीसी हुई काली मिर्च, 1 चम्मच ताज़ा किसा हुआ अदरक 8-10 तुलसी की पत्तियों के साथ एक गिलास में मिलाकर उबाल लें। इसकी मात्रा आधी रह जाने तक उबालें। इसमें 1/2 चम्मच शक्कर डालें और सुबह चाय/कॉफ़ी के स्थान पर इसे गुनगुना पीयें। 
  • सूखे हुए अदरक का चूर्ण, काली मिर्च और लम्बी काली मिर्च का मिश्रण बनाकर इसे हवाबंद डिब्बे में रख लें। इस मिश्रण का 1/2 चम्मच शहद के साथ लें। 
  • 1 चम्मच हल्दी का चूर्ण 1 गिलास गर्म पानी में डाल लें। इसे दिन में कई बार सिप करके पीयें। 
  • 2 चम्मच धनिये को पीस लें और इसमें 2 चम्मच बारीक कटा हुआ अदरक डाल लें। इस मिश्रण को धीमी आंच पर फ्राइंग पैन पर रख दें। इसे चलते रहे ताकि ये जले नहीं। इसमें 2 कप पानी डालें और इसे ढक दें जिससे भाप बने। इसे कुछ मिनट के लिए उबालें, फिर छान लें और 1 बड़ा चम्मच शहद डालकर गर्म ही पी लें। 

About the author

पंकज सिंह चौहान

पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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