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    जस्टिस कुरियन जोसफ

    सुप्रीम कोर्ट के जज से अपनी कुर्सी छोड़ने के बाद, जस्टिस कुरियन जोसफ ने ये बयां दिया है कि उच्च न्यायालय, पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व में सही दिशा में काम नहीं कर रहा था।

    “हमने ये ध्यान दिया कि सुप्रीम कोर्ट सही दिशा में नहीं चल रहा था। हमने पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के सामने कई बातें रखी ताकी वे सही रास्ते पर सही चीज़े रख सकें। जब हमे कोई परिणाम नजर नहीं आया तो हमने सोचा कि अब इसे देश के सामने लाने के सिवा अब हमारे पास कोई चारा नहीं बचा हैं। इसलिए 12 जनवरी को एक प्रेस कांफ्रेंस रखी गयी। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब ऐसा कोई कदम उठाया गया हो।”

    इस बात पर जोर देते हुए कि पहले से चीज़े सुधर गयीं हैं, उन्होंने आगे कहा-“इसके अलावा एक और कारण था। मेरी जगह हमेशा ऐसी रही कि मेरी निगरानी में हमेशा दो लोग रहे हैं जिनमे से एक है मीडिया। हम इसलिए बाहर आये क्योंकि हम लोगो को ये बताना चाहते थे कि हमने अपना सबसे अच्छा दिया। ये बार बार कहने के बावजूद भी कि हमारा मास्टर गहरी नींद में सो रहा है, इसलिए हमने हमला करना जरूरी समझा। संस्थागत प्रणाली और प्रथायो को सही जगह पर रखना जरूरी था। इसमें वक़्त लगेगा।”

    भारतीय न्यायपालिका में अपने लम्बे करियर पर बात करते हुए उन्होंने कहा- “मैंने 2000 में, केरल के हाई कोर्ट के जज के रूप में शुरुआत की थी। लगभग 10 सालो तक मैं वही था। फिर मैं हिमाचल प्रदेश में चीफ जस्टिस के रूप में तीन सालो के लिए गया। इसके बाद, मैं पांच साल और आठ महीनो के लिए सुप्रीम कोर्ट आ गया। मैंने केरल में 66,000 केस निबटाये, हिमाचल प्रदेश में 15,000 से ज्यादा और सुप्रीम कोर्ट में 8,000 केस को ठिकाने लगाया। इसलिए ये एक लम्बा और संतोषप्रद करियर था।”

    जब उनसे न्यायपालिका पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया-“मैं ये कभी नहीं मान सकता कि उच्च न्यायपालिका में कोई भ्रष्टाचार है। अगर निचली न्यायपालिका में हैं तो ये राज्य के लिए चिंता का विषय है। उच्च न्यायपालिका में तो ये मेरे ध्यान में आया नहीं है।”

    By साक्षी बंसल

    पत्रकारिता की छात्रा जिसे ख़बरों की दुनिया में रूचि है।

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