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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर जम्मू-कश्मीर को लेकर सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और प्रदेश भाजपा के तीनों नेता बुधवार को दिल्ली पहुंच गए। नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे। नेकां व पीडीपी समेत अधिकांश दलों ने साफ कर दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर से जुड़े अपने पुराने एजेंडे पर ही बात करेंगे। पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष प्रो. भीम सिंह, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के चेयरमैन सैयद अल्ताफ बुखारी और पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन, मुजफ्फर हुसैन बेग पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ आज गुरुवार को वार्ता होनी है।

    उधर, आतंकियों की हरकतों को देखते हुए सुरक्षा बलों के लिए जम्मू कश्मीर मे 48 घंटे का हाई अलर्ट का एलान किया गया है। 24 को इंटरनेट सेवा को सस्पेंड किया जा सकता है।

    अहम मानी जा रही बैठक

    उल्लेखनीय है पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लागू किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पहली बार केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के 14 नेताओं की बैठक बुलाई है। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। इसमें हिस्सा लेने के लिए महबूबा बुधवार दोपहर को दिल्ली के लिए रवाना हुई।

    सर्वदलीय बैठक में चुनाव कराने, पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली पर चर्चा होने की संभावना

    उल्लेखनीय है कि पंडित प्रेमनाथ डोगरा और प्रजा परिषद ने जम्मू क्षेत्र की उपेक्षा और भेदभाव का विरोध करते हुए उसके साथ बराबरी और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लंबा संघर्ष किया था। संभवत: परिसीमन आयोग उनके संघर्ष को निष्फल नहीं जाने देगा। सर्वदलीय बैठक में विधानसभा चुनाव कराने के साथ ही उसके पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली पर भी चर्चा होने की संभावना है। पिछले दिनों मीडिया और इंटरनेट मीडिया में जम्मू-कश्मीर के विभाजन की खबरें दिखाई दीं। इन खबरों में जम्मू को एक पृथक पूर्ण राज्य और कश्मीर को एक या दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने की बात की गई थी, लेकिन इन खबरों में कोई दम नहीं दिखता। पाकिस्तान जब भी कश्मीर समस्या के अंतरराष्ट्रीयकरण की कोशिश करता है, उसमें जम्मू क्षेत्र बहुत बड़ी रुकावट बनता है।

    इसी प्रकार उसके द्वारा छेड़े जाने वाले जनमत संग्रह के शिगूफे की काट भी जम्मू क्षेत्र ही है। आतंकवाद और अलगाववाद का भी जम्मू क्षेत्र ही प्रतिकार करता है। इसलिए जम्मू-कश्मीर के विभाजन का विचार ख्याली पुलाव से अधिक नहीं है। 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णय के बाद 31 अक्टूबर, 2019 को जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक द्वारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दो केंद्रशासित प्रदेश बना दिए गए। इस महत्वपूर्ण संवैधानिक परिवर्तन के बाद कश्मीर केंद्रित छह दलों ने केंद्र के इस निर्णय के विरोध में पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन का गठन किया था। इस अवसरवादी गठजोड़ को राजनीतिक गलियारों में गुपकार गैंग की संज्ञा दी गई।

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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