सोमवार, जनवरी 27, 2020

जम्मू-कश्मीर पर यूएन की त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट की ईएफएसएएस ने की आलोचना

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साऊथ एशियाई स्टडीज के रिसर्च एनालिस्ट ने मानव अधिकार के उच्चायोग की जम्मू कश्मीर पर रिपोर्ट की आलोचना की है। रिसर्च एनालिस्ट वेरोनिका एकेलुंड ने रिपोर्ट में कहा कि “रिपोर्ट्स में पूरी तरह गलत तथ्य है कि जम्मू कश्मीर में सभी आतंकी संगठनों  मुख्यालय पाकिस्तान में हैं और उन्हें पाकिस्तान की सेना ने शरण दे राखी रखी है।”

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के 41 वें सत्र मे कहा कि “मानव अधिकार के उच्चायोग ने कभी न आतंकवाद को समझा था और न ही परिणाम को, जो जम्मू कश्मीर पर रिपोर्ट को बनाने के लिए महत्वपूर्ण और पर्याप्त है। यह तथ्य कि जम्मू कश्मीर में सक्रीय सभी आतंकी संघठनो का मुख्यालय पाकिस्तान है और जम्मू कश्मीर में प्रॉक्सी जंग को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान की सेना से मदद मिलना जारी है, इस रिपोर्ट में कई खामियां है।”

इस आतंकवाद के निर्यात ने साल 1990 से 14000 से अधिक नागरिकों की जान ली है और 5000 से अधिक सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई है। यह रिपोर्ट दो वर्षों के संघर्ष के काल में इतिहास को निष्फल करने कोशिश है और इसकी शुरुआत साल 2016 में आतंकियों की मौत के साथ शुरू हुई थी।

उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान में सेना की स्थापना के जरिये जम्मू कश्मीर में धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद के गैर मौजूदगी में  उच्चायोग के दफ्तर के पास जम्मू कश्मीर का सन्दर्भ देने का कोई तुक नहीं है।  यह रिपोर्ट दो वर्षों के संघर्ष के काल में इतिहास को निष्फल करने कोशिश है और इसकी शुरुआत साल 2016 में आतंकियों की मौत के साथ शुरू हुई थी।”

उन्होंने अकेले त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट को बनाया है। उन्होंने कहा कि “आतंकवाद और इसके परिणाम को दृढ़ता से जानने के लिए रिपोर्ट को ठीक करने की जरुरत है।

 

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