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    महिलाओं का विद्रोह दिवस

    दार्जलिंग में मंगलवार को विश्व के साथ ही तिब्बती महिलाओं का राष्ट्रीय विद्रोही दिवस का आयोजन किया गया था। तिब्बतन वीमेन एसोसिएशन ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से तिब्बत के मसले पर दखलंदाज़ी करने का आग्रह किया है।

    10 मार्च, 1959 को हज़ारों तिब्बती नागरिक राजधानी लहासा की सड़कों एकजुट हुए थे और चीनी आधिपत्य के खिलाफ प्रदर्शन किया था। यह लहासा विद्रोह का प्रतिक है। 12 मार्च तिब्बती महिलाओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। चीनी अधिकारीयों ने बर्बरता का इस्तेमाल कर विद्रोह को कुचल दिया और नतीजतन हज़ारों लोगों की मृत्यु हो गयी थी।

    18 अप्रैल 1959 को भारत पहुंचे दलाई लामा
    18 अप्रैल 1959 को भारत पहुंचे दलाई लामा

    दार्जलिंग में टीडब्ल्यूए की अध्यक्ष ने कहा कि “यह तिब्बतन वीमेन नेशनल उपरीसिंग डे का 60 वां वर्ष है। 12 मार्च को महिलाओं ने चीनी आधिपत्य के खिलाफ गैर हिंसक प्रदर्शन किया था। तिब्बत की महिलाएं सबसे आक्रमक सरकार के खिलाफ साहस और दृढ़ निश्चय के साथ खड़ी थी और आज भी यह जारी है।”

    टीडब्ल्यूए द्वारा जारी बयान के मुताबिक “कम्युनिस्ट चीनी नेता तिब्बत के उन्मूलन के लिए दृढ़ संकल्पित है। चीन निरंतर और जान बूझकर तिब्बत में मानव अधिकारों का उल्लंघन करता है। वह तिब्बती जनता के पास दृढ़ निश्चयी होने के अधिकार को खारिज करते हैं।”

    इस दिवस को मनाने के लिए दार्जलिंग के चौरास्ता में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। तिब्बत के लिए कुर्बानी देने वाले पुरुषों और महिलाओं के लिए दुआ मांगी और उनकी वीरता पर भाषण दिया गया था। एक शांतिपूर्ण रैली का भी आयोजन किया गया था।

    हाल ही में इस समारोह के कारण तिब्बत की सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत कर दिया गया है। तिब्बत पूरी तरह विदेशी पर्यटकों, पत्रकारों और कूटनीतिज्ञों के लिए बंद है। यहां की असल हकीकत की जानकारी जुटाना काफी मुश्किल है। 60 वर्ष के इस समारोह पर विभागों का विशेष ध्यान केंद्रित है।

    Tibet-Women-Uprising-India-2018

    चीनी ट्रेवल एजेंसियों ने बताया कि तिब्बत में विदेशी सैलानियों को 1 अप्रैल तक आने की अनुमति नहीं है। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रतिबन्ध कब शुरू होगा लेकिन निगरानी समूहों के मुताबिक यह इस माह से शुरू होगा।

    हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में तिब्बत कानून पर हस्ताक्षर कर दिए थे, जिसके तहत अमेरिकी नागरिक, कूटनीतिज्ञ और पत्रकार बेरोकटोक तिब्बत जा सकेंगे। रायटर्स के मुताबिक चीन ने इस कानून का विरोध करते हुए धमकी दी कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए बलपूर्वक कार्रवाई करेगा।

    “रेसिप्रोकल एक्सेस टू तिब्बत एक्ट” यानी अमेरिकी तिब्बत कानून, जो हाल ही में कांग्रेस की मंज़ूरी के बाद राष्ट्रपति के समक्ष हस्ताक्षर के लिए भेजा गया था। आखिरकार अमेरिका की कथित तिब्बत की जनता की भलाई के लिए इस बिल कानून में परिवर्तित कर दिया गया है।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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