बुधवार, जनवरी 22, 2020

चीन की महत्वकांक्षी परियोजना बीआरआई से दक्षिण एशियाई देशों का यू-टर्न

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना से दक्षिण एशियाई राष्ट्र यू-टर्न ले रहे हैं और समीक्षा कर रहे है। बलोचिस्तान के स्थानीय नेता इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और यह दूसरी बीआरआई बैठक में चीन के लिए सरदर्द बनकर उभर सकता है।

मालदीव भी बीआरआई के तहत चीन से लिए कर्ज की समीक्षा कर रहा है। भारत का पडोसी देश श्रीलंका भी विदेशी कर्ज चुकाने के लिए चीन के नए कर्ज लेने की योजना बना रहा है। बलोचिस्तान के मुख्यमंत्री इस चीनी परियोजना का विरोध कर रहे हैं और चीनी कंपनियों को जमीं सौंपने से इंकार कर दिया है।

बलोच नेताओं ने इस परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि सीपीईसी परियोजना से इस अविकसित क्षेत्र का कोई भला नहीं होगा। ग्वादर शहर के नेता ने कहा कि ‘ग्वादर बिकाऊ नहीं है।’ बलोच के विद्रोही सीपीईसी के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और चीनी अधिकारीयों को निशाना बना रहे हैं।

मालदीव में कई परियोजनाओं की समीक्षा की जा रही है। 29 जनवरी को मालदीव के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हमें इन आंकड़ों को जुटाने के लिए विदेशी सहायता की जरुरत है। मालदीव के वित्त मंत्रालय ने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुए समझौते के बाबत समीक्षा के लिए गठन किया है।

विदेशी कर्ज में फंसा श्रीलंका अब भारत और जापान से सहायता ले रहा है। श्रीलंका ने चीन से 1.5 डॉलर कर्ज लिया था जिसे चुकता न कर पाने के कारण श्रीलंका ने हबनटोटा बंदरगाह चीन के सुपुर्द कर दिया था। श्रीलंका पर चीन का इंफ्रास्ट्रक्चर कर्ज 9.2 अरब डॉलर है।

चीन अपनी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान में बंदरगाह, राजमार्ग और ब्रिज का निर्माण करवा रहा है। इस परियोजना के कारण कई विकासशील और छोटे देश कर्ज के दलदल में दब चुके हैं। मालदीव के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने भारतीय नेताओं को सुनिश्चित कर दिया है कि उनका देश पडोसी के साथ मज़बूत सम्बन्ध चाहता है और भारत पहले की नीति की इच्छा रखता है।

चीन की बीआरआई परियोजना 115 देशों से होकर गुजरेगी। इस परियोजना के लिए चीन की वैश्विक स्तर आलोचना हुई है। चीन को इससे न सिर्फ आर्थिक फायदा होगा बल्कि राजनीतिक मुनाफा भी होगा।

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