Thu. Dec 8th, 2022
    भारत की विदेश मन्त्री सुषमा स्वराज और मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद

    मालदीव में राजनीतिक संकट के बादल छटते ही आर्थिक परेशानियों का पहाडा कर खड़ा हो गया था। चीनी परियोजनाओं में अंधाधुंध निवेश के कारण मालदीव पर कर्ज का भार बढ़ गया था, जिसे भारत ने कम कर दिया है। भारत ने अपने आर्थिक तंगी से जूझ से मित्र मालदीव को कम ब्याज दरों पर एक बिलियन डॉलर की मदद राशि मुहैया की है।

    हाल ही में मालदीव के रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन प्रस्तावित कीमतों के तुलना में काफी अधिक दामों पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा कि मालदीव अपने किये वादों से मुकर नहीं सकता है।

    जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत मालदीव के साथ मज़बूत रक्षा सम्बन्ध कायम कर माले को चीन के प्रभाव से बहार लाएगा। साथ ही मालदीव में स्थायी तौर पर भारतीय सैनिक की नियुक्ति भी की जाएगी। इस सूचना से सम्बंधित सभी जानकारी का खुलासा मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहीम सोलिह दिसम्बर के अंत में करेंगे।

    मालदीव और भारत के मध्य वार्ता स्तर सकारात्मक है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नई दिल्ली में सोमवार को हुई बैठक के दौरान मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद को आर्थिक और रक्षा सहयोग का आश्वासन दिया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत मालदीव के वित्त और बजट स्थिरता में सहायता करेगा।

    मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने कहा था कि चीन का मालदीव पर तीन बिलियन डॉलर का कर्ज है।  उन्होंने कहा था कि मालदीव के लिए अपनी कमी से चीनी कर्ज का भुगतान करना असंभव है। मालदीव पर इस कर्ज का भार पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल के दौरान बढ़ा था। उन्होंने चीन के साथ नजदीकी के कारण कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर दस्तखत किये थे, उन्होंने चीन और मालदीव के मध्य मुक्त व्यापार समझौता भी किया था।

    नकदी से जूझ रही सरकार की मदद के लिए भारत मालदीव का तत्काल बजट घाटा तैयार करेगा। भारतीय नेतृत्व से मुलाकात के बाद मालदीव के विदेश मन्त्री ने इसका ऐलान किया था। अब्दुल्लाह सोलिह ने कहा कि मालदीव की भारत पहले नीति वापस पटरी पर आ गई है।

    इब्राहीम सोलिह की सरकार चीनी समर्थक होने की अवधारणा को समाप्त करना चाहती है और भारत के साथ गहरे मज़बूत सम्बन्ध स्थापित करना चाहती है। इब्राहीम सोलिह की सरकार ने मुक्त व्यापार समझौते की दोबारा समीक्षा करने की बात कही है और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए जापान और भारत का ‘मुक्त और खुले इंडो पैसिफिक’ के विचार पर कार्य कर सकता है।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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