चाबहार बंदरगाह के द्वारा अफगानिस्तान से पहला शिपमेंट पंहुचा भारत

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

अफगानिस्तान से चाबहार बंदरगाह के रास्ते भारत भेजा गया पहला शिपमेंट बुधवार को भारत पंहुच चुका है। अफगानी उत्पाद शेवा, मुंबई और मुंद्रा के बंदरगाह पंहुच चुका है। कुछ दिनों पूर्व अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अफगानिस्तान में भारतीय राजदूत विनय कुमार के साथ इस शिपमेंट को हरी झंडी दिखाई थी

टीआईआर

यह पहला शिपमेंट है जो अफगानिस्तान से टीआईआर सिस्टम के माध्यम से भारत आया है। टीआईआर ‘ट्रांसपोर्ट्स इंटरनेशनॉक्स रोटियर्स’, यूएन कन्वेंशन के तहत है। जो उत्पादों को कम्पार्टमेंट्स में सील रखने की इजाजत देता है और इसके लिए जांच की भी जरुरत नहीं होती है। यह शिपमेंट बॉर्डर पर बिना खुले एक देश से दूसरे देश में जा सकते हैं।

इंटरनेशनल रोड ट्रान्सपोर्टेशन यूनियन के जनरल सेक्रेटरी ने विकास पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “टीआईआर के लिए चाहबार बंदरगाह का खुलना बेहद फलदायी है। चारों तरफ से घिरे हुए देश की कनेक्टिविटी बढ़ी है।”

भारत के निर्यात में होगी वृद्धि

चाबहार नक्शा
चाबहार नक्शा

सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ इनडायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम्स ऑफ़ रेवेन्यू के चेयरमैन प्रणब कुमार दास ने कहा कि “यह कई देशों में उत्पादों की पंहुच के लिए सुविधाजनक और गैर दखल माहौल बनाएगा। यह कन्वेंशन भारत के निर्यात में वृद्धि करेगा और वैश्विक मूल्यों की साझेदारी में अत्यधिक भागीदारी बनाएगा।”

भारत ने टीआईआर कन्वेंशन में 15 जून 2017 को प्रवेश किया था। जनवरी में भारत ने आधिकारिक तौर पर चाहबार बंदरगाह पर शिपिंग लेन्स स्थापित की थी। अब हर दो हफ्ते में भारत के तीन बंदरगाहों मुंबई, कांडला और मुंद्रा से ईरान के बंदरगाह के लिए जहाज निकलता है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को बढावा देने के लिए ईरान ने चाहबार बंदरगाह को खोला था। इसका मकसद व्यापार का प्रचार करना है। 23 ट्रकों में कारपेट, ड्राई फ्रूट, रूई, स्टॉन व अन्य सामान था। इसका वजन 570 टन था।अधिकरिक सूत्रों के मुताबिक भारत ने साल 2017 से गेंहू, दाल व अन्य सामान का 1.1 लाख टन भारी कन्साइनमेंट चाहबार बंदरगाह के माध्यम से अभी तक पहुंचा चुका है।

ईरान ने चाहबार बंदरगाह का विकास के लिए आधिकारिक नियंत्रण की कंपनी इंडिया पोर्ट ग्लोबल लिमिटेड को सौंप दिया था। कंपनी ने जल्द ही चाहबार पर अपना दफ्तर शुरू कर दिया और चाहबार में स्थित शाहीद बहेस्ती बंदरगाह का नियंत्रण भी ले लिया है।

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