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    डोनाल्ड ट्रम्प और बेंजामिन नेतन्याहू

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में बुधवार को अमेरिका गोलन के मुद्दे पर अलग-थलग हो गया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सीरिया के विवादित भाग को आधिकारिक तौर पर इजराइल का भूभाग मानने वाले दस्तावजों पर हस्ताक्षर कर दिए थे। यूएन में अन्य देशों ने इस कदम पर अपनी आपत्ति दर्ज की थी।

    यूएन संधि का उल्लंघन

    रायटर्स के मुताबिक सीरिया ने अमेरिका के निर्णय को अंतर्राष्ट्रीय नियमों का खुलेआम उल्लंघन करार दिया था। यूएन में ब्रितानी राजदूत करेन पेरेस ने कहा कि “अमेरिका का निर्णय साल 1981 में हुई संधि का उल्लंघन है।” रूस के यूएन राजदूत ने कहा कि “वांशिगटन ने यूएन संधि का उल्लंघन किया है और चेताया कि इससे मध्य एशिया में अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है।”

    यूरोपीय समुदाय के अन्य सदस्यों फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, बेल्जियम और पोलैंड ने मंगलवार को अवैध कब्जे को मान्यता देने के गंभीर परिणाम और व्यापक क्षेत्रीय परिणामो पर अपनी चिंता व्यक्त की है। जर्मनी के यूएन राजदूत ने सीरिया के पत्र को बेहद निंदक बताया था। उन्होंने कहा कि “बीते आठ वर्षों में सीरिया की सरकार निरंतर अंतर्राष्ट्रीय जंग के नियमों का उल्लंघन कर रही है और वह मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध और जंग के अपराधों के लिए जिम्मेदार है।”

    सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, क़तर और कुवैत ने मंगलवार को अमेरिका के गोलन हाइट्स के निर्णय की आलोचना की थी और कहा कि यह क्षेत्र अरब में आता है।

    निगरानी के लिए तैनात यूएन सेना

    गोलन हाइट्स में सीरिया और इजराइल के बीच सीजफायर पर निगरानी के लिए सुरक्षा परिषद् ने साल 1974 में पीसकीपिंग फाॅर्स तैनात की थी। अमेरिका के राजदूत ने कहा कि “अमेरिका का निर्णय गोलन हाइट्स में तैनात शान्ति सेना को प्रभावित नहीं करेगी। सीरिया और इजराइल के बीच स्थिरता को कायम रखने के लिए यूएनडीओएफ एक महत्वपूर्ण किरदार निभाना जारी रखेगा।”

    रायटर्स के मुताबिक सोमवार को अमेरिकी राज्य सचिव माइक पोम्पिओ ने कहा कि “हम इजराइल के साथ खड़े हैं क्योंकि उनके कार्य हमारे कार्य है, उनके मूल्य अमर मूल्य है और उनकी लड़ाई हमारी लड़ाई है। ईरान पर हमला बोलते हुए कहा कि ट्रम्प के कार्यकाल में हम ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे।”

    यूएन के सुरक्षा परिषद् प्रस्ताव को 15 सदस्यीय संस्था ने साल 1981 में लिया था जिसके तहत गोलन पर इजराइल का प्रशासन, कानून और न्यायिक प्रक्रिया को मान्यता नहीं दी गयी थी। यह अंतर्राष्ट्रीय कानून से प्रभावित नहीं हैं।

    अन्य देशों की प्रतिक्रिया

    डोनाल्ड ट्रम्प के इस फैसले को कई देशों से प्रतिक्रिया मिली है:

    1. सीरिया: सीरिया नें तुरंत इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रम्प का यह फैसला सीरिया की संप्रभुता पर एक बड़ा हमला है और सीरिया गोलन हाइट्स पर फिर से अधिकार जमा सकता है। सीरिया के विदेश मंत्री नें कहा कि अमेरिका का यह फैसला उसे ‘अलग-थलग’ कर देगा।
    2. सऊदी अरब: सऊदी अरब ने अमेरिका के इस फैसले को खारिज करते हुए इसकी निंदा की और कहा कि यह सरासर अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
    3. तुर्की: तुर्की के विदेश मंत्रालय नें कहा, “यह फैसला अंतराष्ट्रीय नियमों का घोर उल्लंघन है। अमेरिका को यह समझना चाहिए कि वह समस्या को सुलझाने के बजाय, खुद समस्या बन रहा है।”
    4. फिलिस्तीन: फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास नें इसपर कहा कि कोई भी फैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् और अरब शांति स्थापना का उल्लंघन नहीं कर सकता है।
    5. हमास: गाजा में हमास के नेता इस्मेल हानिया नें कहा कि गोलन हमेशा सीरिया का आंतरिक अंग रहेगा।
    6. क़तरक़तर नें कहा है कि वह डोनाल्ड ट्रम्प के इस फैसले को पूरी तरह से निरस्त करते हैं और इसके खिलाफ संयुक्त राष्ट्र और अन्य जगहों पर आवाज उठाएंगे।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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