गुरूवार, फ़रवरी 27, 2020

गुरूवार को होगी करतारपुर गलियारे की पहली बैठक, जानिए गुरूद्वारे का इतिहास

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर गलियारे के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए आधिकारिक मुलाकात गुरुवार को भारतीय सीमा पर होगी। इस गलियारे के माध्यम से भारत के सिख श्रद्धालु पाकिस्तान में स्थित पवित्र स्थल के दर्शन कर पाएंगे। नवंबर, 2019 में गुरु नानक देव जी की 550 वीं वर्षगाँठ का आयोजन होगा।

भारत के गृह मंत्रालय ने करतारपुर गलियारे पर यात्रियों के लिए 2160 वर्ग मीटर के भव्य टर्मिनल के निर्माण लिए मंज़ूरी दे दी है। इसकी लागत 190 करोड़ रूपए होगी। इस टर्मिनल में रोजाना 5000 यात्री ठहर सकते हैं। इसमें सिख आस्था का प्रतिक खंडवा भी लगाया जायेगा, जो एकजुटता और मानवता के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करेगा।

भारत ने पुष्टि की कि भारत और पाकिस्तान की मुलाकात करतारपुर गलियारे के तौर-तरीकों पर चर्चा करने और उसे अंतिम रूप देने के लिए अट्टारी-वाघा बॉर्डर पर 14 मार्च को आयोजित होगी।

पंजाब सरकार श्रद्धालुओं के लिए पासपोर्ट और वीजा मुक्त दर्शन की मांग कर रही है। दोनों पक्ष इस प्रोजेक्ट से सम्बंधित तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि “अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुविधा का निर्माण कर रहे हैं तो सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होगी। यह क्षेत्र 24*7 निगरानी में, पूर्ण सुरक्षित और घुसपैठ मुक्त रहेगा। इसकी सुरक्षा का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल पर होगा।”

सूत्रों के मुताबिक “इस बैठक में विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, रोड ट्रांसपोर्ट एंड बॉर्डर सिक्योरिटी इस बैठक में शरीक होंगे। भारतीय दल का नेतृत्व गृह मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी अनिल मलिक, अफगानिस्तान, ईरान और पीओके में भारत के जॉइंट सेक्रेटरी दीपक मित्तल करेंगे।”

पाकिस्तान की तरफ से दल का प्रतिनिधित्व सार्क और साउथ एशिया के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर मोहम्मद फैसल करेंगे जिनके साथ आंतरिक, कानून और धार्मिक मामलों से जुड़े मंत्री भी शामिल होंगे।

बीते हफ्ते विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि “दोनों पक्षों के बीच कोई बातचीत बहाल नहीं हुई है। कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं होगी। यह भारत के सिख नागरिकों की आस्था और भावनाओं से सम्बंधित है और भारत की मुलाकात करतारपुर साहिब गलियारे के संचालन शुरू करने की मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

खालिस्तान आतंक का डर का साया

भारत सरकार नें पाकिस्तान की सरकार से मिलने से पहले यह सुचना जारी की है कि खालिस्तानी समर्थकों से सावधान रहा जाए।

भारत सरकार को डर है कि पाकिस्तान की सरकार इस मौके पर कुछ उल्टा-सीधा कर सकती है।

जाहिर है हाल ही में पाकिस्तान समर्थक कुछ खालिस्तानी समर्थको नें लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर भारतीय समर्थकों पर हमला किया था।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की कोई चूक नहीं होगी। भारत पाकिस्तान से एक परिणामदायक बैठक चाहता है।

करतारपुर गलियारे की खासियत

  • अंतर्राष्ट्रीय सीमा से करतारपुर साहिब गरुद्वारा सिर्फ 4.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
  • भारतीय सरजमीं पर इसका ढांचा 50 एकड़ जमीन पर फैला होगा।
  • यह एक हरी ईमारत होगी जो दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक होगी।
  • यह सीमा पर पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से काफी नजदीक है।
  • गुरु नानक ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष यही व्यतीत किये थे।
  • सिख समुदाय बीते 70 वर्षों के गलियारे की मांग कर रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 300 फ़ीट ऊँचे तिरंगे को फहराया जायेगा।
  • इसकी स्थापना के संस्थापक गुरुनानक देव ने साल 1522 में की थी।
  • पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 1999 में लाहौर की यात्रा के दौरान गलियारे का सुझाव दिया था।
  • भारत सरकार ने इस निर्णय को 22 नवम्बर 2018 को लिया था, क्योंकि यह प्रस्ताव लम्बे समय से अटका हुआ था।
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