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गिलगिट-बाल्टिस्तान ने एक खुले पत्र में लिखा, पाकिस्तान सिर्फ एक कल्पित पर्यवेक्षक

गिलगिट बाल्टिस्तान

गिलगिट-बाल्टिस्तान ने एक खुले पत्र में इजहार किया कि पाकिस्तान द्वारा अधिकृत यह क्षेत्र जम्मू कश्मीर राज्य का भाग है और पाकिस्तान का दर्जा यहाँ सिर्फ एक कल्पित पर्यवेक्षक है, उसे सीमाओं को परिवर्तित करने का कोई हक़ नहीं है। जम्मू कश्मीर की आज़ादी की मांग कर रहे संगठनों को इस पत्र में संबोधित करते हुए गिलगिट बाल्टिस्तान ने कहा कि “संयुक्त राष्ट्र के कराची समझौते के साथ बने रहे, पाकिस्तान के संविधान, पाकिस्तान के उच्च न्यायलय के आदेश या कश्मीर में सियासी दलों के नजरिये से गिलगिट बाल्टिस्तान जम्मू कश्मीर का भूभाग है।”

खत के मुताबिक, यहाँ पाकिस्तान का दर्जा एक पर्यवेक्षक के तौर पर है और उसके समक्ष यहाँ की सीमाओं को परिवर्तित करने का कोई अधिकार नहीं है। खुले खत के मुताबिक, यह मामला सिर्फ गिलगिट बाल्टिस्तान तक सीमित नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर जम्मू कश्मीर और उसके विवादित दर्जे से जुड़ा हुआ है।

जम्मू कश्मीर से प्राकृतिक मार्गो पर बुरी तरह पाबंदियां लगा रखी है। एक खबर को इलाके के एक भाग से दुसरे भाग में भेजना बेहद मुश्किल है। साल 1947 में जब जम्मू कश्मीर को तीन भागो में विभाजित किया गया था तो गिलगिट लद्दाख के तीसरे उत्तरी भाग को दो भागो में विभाजित किया गया था। यह 28000 वर्ग मील का इलाका मुज़फ्फराबाद और श्रीनगर से अलग था और पाकिस्तान के नियंत्रण में आ रहा था।

जम्मू कश्मीर पर भारत और पाकिस्तानी नियंत्रण में तनाव के कारण गिलगिट बाल्टिस्तान के 2000 वर्ग मील के इलाके को चीन के सुपुर्द (चीन-पाक समझौता, 1963) कर दिया गया था। इस पत्र में एक खतरनाक खेल का जिक्र किया है, यह खेल सटी हुई सीमा से जुड़ा है, गिलगिट की सीमा पाकिस्तान के प्रान्त खैबर पख्तून वा से जम्मू कश्मीर की सीमा कई बिन्दुओं पर मिलती है। बीते 71 वर्षों में खैबर हमारे राज्य में निरंतर अतिक्रमण कर रहा है।

पहली वारदात दिअमेर जिले में दखलंदाज़ी की गयी जो खैबर पख्तुन्वा के बासरी से जुड़ा हुआ है। यहाँ से पाकिस्तान ने 30 किलोमीटर पर अतिक्रमण किया था। अगर यह इलाका गिलगिट बाल्टिस्तान में होता तो खैबर पख्तुन्वा कभी दिअमेर बाशा बाँध पर दावा नहीं कर सकता था।

इस पत्र में जम्मू कश्मीर नेशनल अवामी पार्टी, जम्मू कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी, जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट, जम्मू कश्मीर नेशनल स्टूडेंट्स फेडरेशन, कश्मीर नेशनल पार्टी, जम्मू कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायन्स और अन्यो के नेताओं को संबोधित किया गया है।

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कविता

कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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