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कैल्शियम : फायदे, स्त्रोत भोजन, नुकसान और कमी

कैल्शियम calcium in hindi

स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए कैल्शियम बेहद जरुरी पोषक तत्व है। ऐसे तो हमें प्रतिदिन थोड़ी मात्रा में कैल्शियम की जरुरत होती है लेकिन अगर इसे खाने में शामिल न किया गया तो शरीर में इसकी कमी होने लगती है। और इसे नजरअंदाज़ करना खतरनाक साबित हो सकता है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों और युवाओं से लेकर गर्भवती महिलाओं तक, सभी को आजीवन कैल्शियम की जरुरत होती है।

आज इस लेख के जरिये हम कैल्शियम के फायदों, नुकसान, इसे पाने के स्त्रोत, इसकी कमी से होने वाली समस्यायों आदि के बारे में चर्चा करेंगे।

कैल्शियम के फायदे (benefit of calcium in hindi)

जैसे हमें हर पल ऑक्सीजन की जरुरत होती है, ठीक वैसे ही हमें कैल्शियम की भी जरुरत होती है। यह सुनने में शायद अटपटा लगे लेकिन अगर आप रोजमर्रा की ज़िन्दगी में कैल्शियम की जरुरत को समझ लेंगे तो फिर कभी लापरवाही नहीं बरतेंगे।

कैल्शियम शरीर में मौजूद हड्डियों का आधार है। यह आपकी हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है।

साथ ही कैल्शियम आपको सदाबहार मुस्कान भी देता है। कैसे? क्योंकि यह आपके दाँतों को सफ़ेद और मजबूत बनता है। वास्तव में शरीर में मौजूद 99 प्रतिशत कैल्शियम हड्डियों और दांतों में मौजूद होता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि बेहद छोटी मात्रा में लेकिन कैल्शियम आपके ह्रदय के लिए भी बेहद जरुरी है। यह ह्रदय के सहायक के रूप में काम करता है ताकि वो ठीक से काम करता रहे।

इसके अलावा कैल्शियम नाखूनों की मजबूती और चमक के लिए भी बेहद जरुरी माना जाता है। अगर आप सोच रहे हैं कि इसकी इतनी ही अहमियत है तो ज़रा रुकिए। कैल्शियम हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई बीपी के साथ ही बच्चों में हाई फ्लोराइड लेवल को नियंत्रित करने में ख़ास भूमिका निभाता है।

स्रोत: इनमें है भरपूर कैल्शियम (calcium rich food in hindi)

शरीर में कैल्शियम की जरुरत को आप आसानी से खाद्य पदार्थों के माध्यम से पूरा कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कैल्शियम के प्राकृतिक एवं लजीज़ स्रोतों के बारे में जिनसे आपको भरपूर मात्रा में कैल्शियम मिलेगा।

इस लिस्ट में सबसे ऊपर आता है दूध। लेकिन अगर आपको दूध पसंद नहीं या लैक्टोज से परेशानी है तो आप दही या पनीर का सेवन कर सकते हैं।

दूध के अलावा सब्जियों से भी भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जा सकता है।। सब्जियों को कैल्शियम का ‘पावर हाउस’ कहा जाता है और इस लिस्ट में भिंडी, गोभी, ब्रोकली, कढ़ी पत्ता, मेथी, पुदीना, हरा धनिया, गाजर, टमाटर, ग्वारफली, सेम आदि शामिल है।

फल जैसे नारियल, सीताफल, जामफल, आम, संतरा एवं अनानास से आपको पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मिलता है। इसके अलावा बादाम, पिस्ता, अखरोट, मुनक्का जैसे मेवे भी इसका मुख्य स्त्रोत हैं।

इसके अलावा अगर प्राकृतिक स्त्रोतों की बात करें तो चना, राजमा, मूंग दाल, अजवाइन, लौंग, हींग, जीरा, काली मिर्च, गेहूं, बाजरा, रागी जैसे नाम भी शामिल हैं। यहां दिए गए खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल कर आप प्राकृतिक स्रोतों के माध्यम से कैल्शियम की जरुरत को पूरा कर सकेंगे।

कैल्शियम की कमी (deficiency of calcium in hindi)

अक्सर खानपान में अनियमितता, बिगड़ते लाइफस्टाइल और लापरवाही के कारण शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती है। लम्बे समय तक इस पर ध्यान न देने पर कई तरह की परेशानियां जैसे मांसपेशियों में अकड़न और दर्द होने लगता है। हड्डियां कमजोर हो जाती है और आसानी से टूट भी जाती है। और स्थिति गंभीर होने पर ये रिकेट्स नामक बीमारी का रूप ले लेती है।

इसके साथ दांतों पर इसका असर साफ़ दिखाई देता है जिसमें सड़न शुरूआती लक्षण है। अगर आपके नाख़ून बहुत कमजोर हैं और आसानी से टूट रहे हैं तो यह संकेत है शरीर में कैल्शियम की कमी का। वहीं रूखे और कठोर बाल, बालों का झड़ना भी इस ओर इशारा करता है। शरीर समय-समय पर विभिन्न संकेतों के माध्यम से कैल्शियम की कमी के संकेत देता है। जरुरत है तो बस इन संकेतों को समझकर समय रहते जरुरी कदम उठाने की।

कैल्शियम टैबलेट्स (calcium tablets benefits in hindi)

कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए डॉक्टर कैल्शियम टैबलेट्स लेने की सलाह देते हैं। इससे शरीर को सही मात्रा में कैल्शियम मिलता है।

यह टैबलेट्स पास की मेडिकल दुकान पर आसानी से उपलब्ध है। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह लिए इसे नहीं खाना चाहिए।

कैल्शियम के नुकसान (side effects of calcium in hindi)

इसका एक दूसरा पहलु भी है। जैसा की कहा जाता है अति किसी चीज की अच्छी नहीं और इससे नुकसान ही होता है, ये बात यहां भी पूर्णतः सत्य है।

कैल्शियम की गोली अधिक मात्रा में लेने से इसका सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जरुरत से ज्यादा टैबलेट्स लेने पर हार्ट अटैक का खतरा रहता है।

इसका असर पेट पर पड़ता है जिससे भूख न लगना, कब्ज और दर्द जैसी शिकायतें होती है। साथ ही यह बॉडी डिहाइड्रेशन के लिए भी जिम्मेदार होता है। कैल्शियम का अधिक सेवन किडनियों को भी खराब कर सकता है और पत्थरी की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

वहीं पुरूषों में ये प्रोस्टेट कैंसर की आशंका को बढ़ा देता है। दूसरी तरफ अगर किसी को चक्कर आ रहे हैं तो इसके लिए भी कैल्शियम की अधिक मात्रा जिम्मेदार हो सकती है। लोगों को जितना हो सके प्राकृतिक रूप से कैल्शियम को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। वहीं कैल्शियम टैबलेट्स को अंतिम विकल्प के तौर पर ही रखना चाहिए।

महिलाओं को होती है ख़ास जरुरत

महिलाओं में ख़ासतौर पर कैल्शियम की कमी पाई जाती है। भारत में महिलाएं 35 साल की उम्र के बाद अमूमन इसकी शिकार होती है। लेकिन आखिर सिर्फ महिलाएं ही क्यों? क्योंकि महिलाएं उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं से गुजरती हैं जैसे मासिक धर्म, गर्भधारण, स्तनपान एवं मेनोपॉज।

ऐसे में उन्हें विशेष रूप से कैल्शियम की आवश्यकता होती है। लेकिन यह जरुरत कभी संतुलित तो कभी अधिक होती है। ऐसे में खारतौर पर महिलाओं को विशेष ध्यान रखने की जरुरत है। इसके लिए पर्याप्त मात्रा में धूप लेनी चाहिए जिससे विटामिन डी मिल सके और इसकी मदद से कैल्शियम हड्डियों तक पहुंच सके। साथ ही नियमित व्यायाम करना चाहिए जिससे शरीर का लचीलापन बना रहे।

तो अब आप समझ ही चुके होंगे कि कैल्शियम हमारे शरीर के लिए कितना जरुरी तत्व है जो कोशिकाओं से लेकर रक्त, मांसपेशियों और हड्डियों के लिए विशेष रूप से आवश्यक है। तो शरीर को स्वस्थ रखें, अच्छा आहार लें और नियमित व्यायाम के साथ ही नियमित चेक-अप भी करवाएं।

अगर आपको कैल्शियम सम्बंधी कोई अन्य जानकारी प्राप्त करनी हो, तो आप नीचे कमेंट में इसे लिखकर हमसे पूछ सकते हैं।

About the author

पंकज सिंह चौहान

पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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