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कृषि कानूनों के समर्थन में उतरा अमेरिका

कृषि कानूनों पर देश के अंदर लोगों में अलग-अलग विचार चल रहे हैं। लेकिन इसी बीच अमेरिका ने कृषि कानूनों का समर्थन किया है। नए कृषि कानूनों से देश में बहुत से लोगों को ऐतराज है तो वहीं एक बड़ा तबका इन कानूनों के समर्थन में है। पंजाब और हरियाणा के किसान सड़कों पर विरोध कर रहे हैं और पिछले 2 महीने से ज्यादा समय से देश की राजधानी के आस पास बहुत नुकसान कर चुके हैं। देश की राजनीति इस मामले पर दो धड़ों में बंट चुकी है। बॉलीवुड से लेकर क्रिकेट जगत तक की हस्तियां इन कानूनों पर अपना पक्ष या विपक्ष रखती नजर आ रही हैं।

लेकिन अमेरिका ने इस पर अपनी स्पष्ट राय रखी है। कृषि कानूनों पर अमेरिका ने भारत सरकार का समर्थन किया है। अमेरिका ने नए कृषि कानूनों के समर्थन में कहा कि इससे दुनिया में भारत के बाजार का प्रभाव काफी ज्यादा बढ़ सकता है। अमेरिका ने नए कानूनों का स्वागत किया है। वहीं किसानों के द्वारा किए गए आंदोलन को अमेरिका ने स्वस्थ लोकतंत्र के निशानी बताया है।

अमेरिका का कहना है कि वह भारत के बाजारों में दक्षता सुधार के लिए उठाए गए कदमों का स्वागत करता है और यह नई नीतियां निजी क्षेत्रों के द्वारा अधिक निवेश को आकर्षित कर सकती हैं। अमेरिका की नई बनी सरकार ने कृषि नीतियों का समर्थन किया है। लेकिन वहीं दुनिया भर के बड़े-बड़े एक्टिविस्ट, नेता, अभिनेता आदि इन मामलों को बिना जाने इन पर ट्वीट कर रहे हैं। बीते दिन सोशल मीडिया पर सिर्फ विदेशी लोगों के द्वारा भारतीय कृषि कानूनों पर की गई टिप्पणी की ही चर्चा होती रही।

मशहूर पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थानबर्ग, विदेशी सिंगर रिहाना व अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की भतीजी ने भी इन मामलों पर ट्वीट किया है। हालांकि उनके ट्वीट को पढ़कर यह समझ आ रहा है कि उन्हें इस आंदोलन या कृषि कानूनों के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। खबर यह भी है कि ग्रेटा थानबर्ग ने अपने ट्विटर पर अपने बयानों से संबंधित कोई लिंक भी साझा किए थे जिसके बाद उनके ऊपर सवाल उठने लगे। हालांकि बाद में उन्होंने वो ट्वीट डिलीट कर दिया है।

विदेशी लोगों के भारतीय मामलों में टिप्पणी के बाद भारतीय क्रिकेटर, अभिनेता आदि सभी उनका विरोध कर रहे हैं। बहुत सी हस्तियों ने इस समय एकता दिखाने की गुजारिश की है। लेकिन वहीं ये देखा जा रहा है कि बहुत से लोग विदेशी लोगों के द्वारा भारतीय मामलों में दखल अंदाजी का स्वागत कर रहे हैं। किसान संगठनों ने भी ग्रेटा और रिहाना को ट्वीट्स के लिए धन्यवाद किया है।

अमेरिका के इन कृषि कानूनों को समर्थन देने के बाद भारत के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बदनामी की साजिश को नाकाम किया जा चुका है। अमेरिका ने किसान और सरकार के बीच हो रहे गतिरोध को खत्म करने के भी सुझाव दिए हैं। अमेरिका का कहना है कि किसानों व सरकार को अपने बीच के मतभेदों को बैठकर वार्ता के साथ हल करना चाहिए। साथ ही आंदोलन स्थल के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवा बहाल करने का भी सुझाव दिया गया है।

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