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    भारतीय रेलवे ने कुम्भ में जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक खुशखबरी दी है। इसमें इसने बताया है की प्रयागराज में मेले में यह सभी तीर्थयात्रियों को मुफ्त में हाई स्पीड वाईफाई प्रदान करेगा। यह कार्य भारतीय रेलवे विभाग में से रेलटेल (RailTel) द्वारा किया जाएगा।

    भारतीय रेलवे का कहना है की तीर्थयात्रियों को बड़ी संख्या में उपस्थित होने के कारण सामान्य मोबाइल नेटवर्क से कॉल करने में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते भारतीय रेलवे विभाग ने ओजोन नेटवर्क और हल्सबर्ग के साथ मिलकर वहां भक्तों को मुफ्त हाई स्पीड वाई फाई उपलब्ध कराने की पहल शुरू की है। इसके द्वारा उन्हें आशा है की सामान्य वोएस कॉल के बजाय वे व्हाट्सएप कॉल कर पायेंगे।

    इस तरह तीर्थयात्री कर सकते हैं हाई स्पीड वाई फाई का प्रयोग :

    रेल विभाग द्वारा सभी तीर्थयात्रियों को पहले एक घंटे के लिए मुफ्त हाई स्पीड वाईफाई उपलब्ध कराया जाएगा लेकीन जैसे ही एक घंटा ख़त्म होता है तब यूजर को रेलवे कूपन खरीदना होगा जिसकी कीमत 10 रूपए होगी जिससे वे हाई स्पीड वाईफाई को पूरे एक दिन प्रयोग कर पायेंगे।

    इन्टरनेट के अलावा प्रबंधन द्वारा भक्तों के फ़ोन पर मेले से जुडी सभी जानकारी साझा की जा रही हैं। असुविधाओं को संबोधित करने के उद्देश्य से, यदि किसी को वाईफाई के उपयोग पर असुविधा का सामना करना पड़ता है, तो कुंभ मेला 2019 में लगभग 10,000 पोस्टर लगाए गए हैं। 100 से अधिक लोगों को वाईफाई मित्र बनाया गया है, जिनकी जिम्मेदारी इस सेवा के बारे में जागरूकता फैलाना है। औसत दैनिक उपयोगकर्ता लॉगिन 40,000 को पार कर गया है।

    कुम्भ मेले के बारे में अधिक जानकारी :

    कुम्भ मेला हिन्दू की पौराणिक कथाओं पर आधारित है। यह पूरी दुनिया में सबसे बड़ी सार्वजनिक सभा और सामूहिक कार्य है। अर्द्ध कुंभ हर छह साल में आयोजित किया जाता है, जबकि कुंभ मेला 12 साल बाद आता है। इसका आयोजन गंगा के तट पर होता है। गंगा नदी को सबसे पवित्र माना जाता है एवं यह भी माना जाता है की यदि कुम्भ के समय गंगा में स्नान किया जाए तो स्नान करने वाले के सारे पाप धुल जाते हैं। अतः हर साल करोड़ों की संख्या में लोग यहाँ पधारते हैं।

    स्नान की छः पवित्र तिथि:

    पौराणिक कथाओं के अनुसार 48 दिनों में कुल छः तिथियां स्नान करने के लिए सबसे पवित्र होती हैं। ये मकर संक्रांति (15 जनवरी), पौष पूर्णिमा (21 जनवरी), मौनी अमावस्या (4 फरवरी), बसंत पंचमी (10 फरवरी), माघी पूर्णिमा (19 फरवरी) और महाशिवरात्रि (4 मार्च) हैं।

    योगी सरकार ने बदला नाम :

    कुम्भ मेले के दो प्रकार होते हैं: अर्ध कुम्भ एवं कुम्भ। अर्ध कुम्भ का हर छः साल में आयोजन किया जाता है एवं कुम्भ का हर 12 साल में एक बार किया जाता है। योगी सरकार ने हाल ही में अर्ध कुम्भ का नाम बदलकर कुम्भ रख दिया है एवं कुम्भ का नाम बदलकर महा कुम्भ कर दिया है।

    By विकास सिंह

    विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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