कुम्भ मेले में आखिरी शाही स्नान हुआ संपन्न; 2 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव-'कुम्भ मेला' में 10 करोड़ श्रद्धालुओं के इकठ्ठा होने की उम्मीद

10 फरवरी (रविवार) को प्रयागराज में कुंभ मेले के तीसरे और अंतिम शाही स्नान के दौरान लगभग दो करोड़ श्रद्धालुओं ने जल में आध्यात्मिक डुबकी लगाई। यह माघ माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को सरस्वती पूजा के उपलक्ष में किया जाता है। इसके बाद सभी शाही स्नान ख़त्म हो जाते हैं। 

 नरेन्द्र मोदी और रामनाथ कोविंद ने किया आभिवादन :

इसके अलावा, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने बसंत पंचमी के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। इस बीच, पश्चिम बंगाल में सरस्वती पूजा को पारंपरिक तीव्रता और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। विद्या की देवी मां सरस्वती की मूर्ति की पूजा हर घर, विशेषकर शिक्षण संस्थानों में की जाती है।

मौनी अमावस्या को 3 करोड़ लोगों ने किया स्नान :

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार कुम्भ में आज यानि मौनी अमावस्या का स्नान बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु आज बड़ी संख्या में कुम्भ स्नान करने के लिए प्रयागराज में उपस्थित हुए हैं।रिपोर्ट के अनुसार आज लाखों की तादाद में श्रद्धालु रेलवे स्टेशन से कुम्भ घाटों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं, जिन्हें लाउड स्पीकर के माध्यम से निर्देशित भी किया जा रहा है।

हिन्दू मान्यताओं में सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या का अधिक महत्व है, ऐसे में कुम्भ स्नान के लिए इस दिन को पवित्र दिन माना गया है।

सुरक्षा के लिहाज से व्यवस्था को अधिक चाक चौबन्द रखा गया था। पूरे इलाके को 10 ज़ोन और 25 सेक्टर में बाँट दिया गया है। इन सेक्टर की ज़िम्मेदारी एएसपी स्तर के अधिकारियों को दी गयी है। वहीं करीब 40 थानों की फोर्स को सुरक्षा के काम में लगाया गया था।

कुम्भ मेले के बारे में जानकारी :

कुम्भ मेला हिन्दू की पौराणिक कथाओं पर आधारित है। यह पूरी दुनिया में सबसे बड़ी सार्वजनिक सभा और सामूहिक कार्य है। अर्द्ध कुंभ हर छह साल में आयोजित किया जाता है, जबकि कुंभ मेला 12 साल बाद आता है। इसका आयोजन गंगा के तट पर होता है। गंगा नदी को सबसे पवित्र माना जाता है एवं यह भी माना जाता है की यदि कुम्भ के समय गंगा में स्नान किया जाए तो स्नान करने वाले के सारे पाप धुल जाते हैं। अतः हर साल करोड़ों की संख्या में लोग यहाँ पधारते हैं।

ये होती हैं स्नान करने की छः पवित्र तिथियां :

पौराणिक कथाओं के अनुसार 48 दिनों में कुल छः तिथियां स्नान करने के लिए सबसे पवित्र होती हैं। ये मकर संक्रांति (15 जनवरी), पौष पूर्णिमा (21 जनवरी), मौनी अमावस्या (4 फरवरी), बसंत पंचमी (10 फरवरी), माघी पूर्णिमा (19 फरवरी) और महाशिवरात्रि (4 मार्च) हैं।

योगी सरकार ने बदला नाम :

कुम्भ मेले के दो प्रकार होते हैं: अर्ध कुम्भ एवं कुम्भ। अर्ध कुम्भ का हर छः साल में आयोजन किया जाता है एवं कुम्भ का हर 12 साल में एक बार किया जाता है। योगी सरकार ने हाल ही में अर्ध कुम्भ का नाम बदलकर कुम्भ रख दिया है एवं कुम्भ का नाम बदलकर महा कुम्भ कर दिया है।

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